आंध्र प्रदेश

किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए सीएम नायडू की फसल बीमा नीति

Tulsi Rao
31 Oct 2026 9:53 AM IST
किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए सीएम नायडू की फसल बीमा नीति
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विजयवाड़ा: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा फसल बीमा पर दिए गए जोर से उन किसानों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, जो चक्रवात 'अरनाब' से प्रभावित हुए हैं। इस चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश में कृषि भूमि का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है।

भारी बारिश और बाढ़ से खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। ऐसे में, 22 अधिसूचित फसलों के लिए 15,969.51 करोड़ रुपये का बीमा कवरेज किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

नायडू ने हमेशा फसल बीमा के महत्व पर जोर दिया है। उनका मानना ​​है कि भले ही प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उचित बीमा के जरिए किसानों पर पड़ने वाले उनके आर्थिक असर को कम जरूर किया जा सकता है। चक्रवात की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि किसानों के निवेश और उनकी कड़ी मेहनत को सुरक्षित रखना कितना जरूरी है।

साल 2026 के खरीफ सीजन के लिए, आंध्र प्रदेश ने 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' (PMFBY) और 'पुनर्गठित मौसम-आधारित फसल बीमा योजना' (RWBCIS) के तहत लगभग 17.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बीमा कवरेज प्रदान किया है। कुल कवरेज में से, 15 फसलों के लिए 10,534.72 करोड़ रुपये का 'उपज-आधारित' (yield-based) बीमा है, जबकि 7 फसलों के लिए 5,434.79 करोड़ रुपये का 'मौसम-आधारित' (weather-based) कवरेज है।

शुरुआती अनुमानों के अनुसार, चक्रवात 'अरनाब' की वजह से 16 जिलों में लगभग 4.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें जलमग्न हो गई हैं।

फसल बीमा से नुकसान का आकलन करने में मदद मिलेगी और तय दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। यह सहायता उन्हें अगली फसल के सीजन के लिए निवेश की व्यवस्था करने में भी मददगार साबित होगी।

साल 2026 के खरीफ कवरेज के तहत, प्रति एकड़ बीमा राशि इस प्रकार है: धान के लिए लगभग 40,000 रुपये, अरहर (red gram) के लिए 20,000 रुपये, सूखी मिर्च के लिए 90,000 रुपये, मक्का के लिए 33,000 रुपये और हल्दी के लिए 94,000 रुपये।

सरकार ने 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' (PMFBY) के तहत 30,286 'क्रॉप-कटिंग एक्सपेरिमेंट' (CCEs) करने की योजना बनाई है। इसके जरिए वास्तविक उपज का आकलन किया जाएगा और उसे 'थ्रेशोल्ड यील्ड' (तय मानक उपज) से तुलना करके दावों (claims) का निर्धारण किया जाएगा। RWBCIS के तहत, बारिश, तापमान और मौसम के अन्य संकेतकों का आकलन तय की गई सीमा (ट्रिगर लिमिट) के आधार पर किया जाएगा।

किसानों के पंजीकरण, 'ई-पांटा' (e-Panta) फसल विवरण और क्लेम के लिए पात्रता की जांच के बाद, मिलने वाला मुआवजा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा कर दिया जाएगा।

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