आंध्र प्रदेश

CM नायडू केस: CBI जांच की PIL पर हाई कोर्ट में सुनवाई टली

Tara Tandi
6 Nov 2026 1:22 PM IST
CM नायडू केस: CBI जांच की PIL पर हाई कोर्ट में सुनवाई टली
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आंध्र: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई टाल दी। इस याचिका में मांग की गई है कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ अपराध जांच विभाग (CID) द्वारा दर्ज मामलों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया जाए, ताकि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो सके।
मुख्य न्यायाधीश लिसा गिल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोट्टी बाल गंगाधर तिलक द्वारा दायर इस जनहित याचिका पर सुनवाई 10 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। यह याचिका 2024 में सरकार बदलने के बाद दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि सत्ता परिवर्तन से जांच प्रभावित हो सकती है और मामले बंद किए जा सकते हैं।
याचिका में कई मामलों को बंद किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जनहित याचिका लंबित रहने के दौरान ही इन मामलों को "तथ्यों की गलती" (mistakes of fact) मानकर बंद कर दिया गया था। ये मामले SC/ST समुदायों की 'असाइन की गई जमीनों' (assigned lands) के हस्तांतरण; ऑप्टिकल-फाइबर नेटवर्क टेंडर देने में अनियमितताओं; कौशल विकास केंद्र स्थापित करने; इनर रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण; आबकारी नीति से जुड़े फैसलों; और मुफ्त रेत नीति (free-sand policy) बनाने व लागू करने से संबंधित हैं। याचिकाकर्ता ने एक अंतरिम याचिका भी दायर की है, जिसमें विजयवाड़ा ACB कोर्ट से निर्देश देने की मांग की गई है कि जांच के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को संबंधित व्यक्तियों को वापस न किया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत ने तर्क दिया कि इन मामलों में शिकायतकर्ता सरकारी अधिकारी हैं। चूंकि चंद्रबाबू नायडू सत्ता में हैं, इसलिए वे इन मामलों को बंद करने की रिपोर्ट (closure reports) को चुनौती देने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता के पास अदालत से हस्तक्षेप की मांग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन मामलों की स्वतंत्र जांच हो।
इस मामले में दायर 'केस-स्टेटस चार्ट' के अनुसार, कई मामलों में क्लोजर रिपोर्ट (मामला बंद करने की रिपोर्ट) दायर की जा चुकी है और उन्हें स्वीकार भी कर लिया गया है। वहीं, इन रिपोर्टों की प्रतियां मांगने या क्लोजर को चुनौती देने से जुड़ी कार्यवाही अभी भी लंबित है। इस चार्ट में एक शिकायतकर्ता द्वारा दायर 'विरोध याचिका' (protest petition) का भी जिक्र है, जो 'असाइन की गई जमीन' से जुड़े एक मामले से संबंधित है। इसमें आरोप लगाया गया है कि CID-SIT के अधिकारियों ने मामले को बंद करने के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) देने का दबाव डाला था। वरिष्ठ वकील रंजीत ने दलील दी कि एक संवैधानिक अदालत के रूप में, हाई कोर्ट के पास यह अधिकार है कि वह ऐसी परिस्थितियों में जांच का आदेश दे—जिसमें बरी होने के बाद की स्थिति भी शामिल है—या निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच को CBI को सौंप दे।
याचिकाकर्ता का पक्ष यह है कि रिपोर्ट बंद कर दिए जाने मात्र से ही कोर्ट को इस बात पर विचार करने से नहीं रोका जा सकता कि क्या किसी स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। पिछले महीने हुई सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार और CID की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से इस जनहित याचिका (PIL) को खारिज करने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि विशेष जांच दल (SIT) ने चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ मामलों में विजयवाड़ा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) कोर्ट के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं। उन्होंने हाई कोर्ट को सूचित किया कि ACB कोर्ट ने इन रिपोर्टों पर विचार करने के बाद मामलों को बंद करने का आदेश दिया था।
रोहतगी ने कोर्ट को यह भी बताया कि कुछ लोगों ने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिकाएं (revision petitions) दायर करके इन मामलों को बंद करने के आदेशों को चुनौती दी है। इन घटनाक्रमों को देखते हुए, उन्होंने तर्क दिया कि अब इस जनहित याचिका में जांच के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा है, और कोर्ट से आग्रह किया कि इसे निष्फल (infructuous) मानकर खारिज कर दिया जाए।
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