आंध्र प्रदेश

स्थानीय निकाय चुनाव से पहले सर्टिफिकेट विवाद YSRCP ने उठाए सवाल

Ratna Netam
5 Oct 2026 6:17 PM IST
स्थानीय निकाय चुनाव से पहले सर्टिफिकेट विवाद YSRCP ने उठाए सवाल
x
अमरावती। युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के राज्य महासचिव और विधान परिषद (MLC) सदस्य लेल्ला अप्पी रेड्डी ने सोमवार को आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर जाति/समुदाय प्रमाणपत्र तथा नो-ड्यूज़ (No Dues) और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने में कथित बाधाओं को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यभर में सर्वर फेल होने के कारण बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवार आवश्यक दस्तावेज प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, जिससे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।अप्पी रेड्डी ने चुनाव आयोग को भेजे अपने पत्र में कहा कि ग्राम/वार्ड सचिवालय (GSWS) प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाने वाले आवश्यक प्रमाणपत्र समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। उनके अनुसार, तकनीकी समस्याओं के कारण कई आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और इसके बावजूद उन्हें जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्होंने राज्य चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करे, ताकि स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के इच्छुक पात्र उम्मीदवारों को समय पर सभी आवश्यक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जा सकें।YSRCP नेता ने यह भी मांग की कि ग्राम/वार्ड सचिवालय प्रणाली से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि प्रमाणपत्र जारी करने में आ रही देरी केवल तकनीकी कारणों से है या इसके पीछे कोई प्रशासनिक लापरवाही अथवा अन्य कारण हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान अप्पी रेड्डी ने आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार जानबूझकर प्रमाणपत्र जारी करने में देरी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार स्थानीय निकाय चुनावों में YSRCP उम्मीदवारों का सामना करने से बचना चाहती है। यह आरोप YSRCP की ओर से लगाया गया है।अप्पी रेड्डी ने कहा कि यदि पात्र उम्मीदवारों को समय पर जाति प्रमाणपत्र, समुदाय प्रमाणपत्र, नो-ड्यूज़ प्रमाणपत्र और NOC उपलब्ध नहीं होंगे तो वे नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे। उनके अनुसार, इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिलने के सिद्धांत पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि वह तत्काल प्रभाव से सभी जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करे कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही तकनीकी खामियों को भी जल्द से जल्द दूर किया जाए, ताकि सभी पात्र आवेदकों को निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज मिल सकें।YSRCP नेता ने दावा किया कि राज्य के विभिन्न जिलों से पार्टी को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि सर्वर बार-बार बंद होने के कारण आवेदन लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो बड़ी संख्या में इच्छुक उम्मीदवार चुनाव लड़ने से वंचित हो सकते हैं।
हालांकि, इस संबंध में TDP के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की ओर से अप्पी रेड्डी के आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी प्रकार, राज्य चुनाव आयोग ने भी उनके पत्र पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी जारी नहीं की है।आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के चयन और चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे समय में प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
चुनाव प्रक्रिया में जाति प्रमाणपत्र, समुदाय प्रमाणपत्र, नो-ड्यूज़ और NOC जैसे दस्तावेज कई श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आवश्यक होते हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर उम्मीदवार अपनी पात्रता सिद्ध करते हैं और नामांकन दाखिल करते हैं। ऐसे में यदि प्रमाणपत्र समय पर जारी नहीं होते, तो इसका सीधा असर नामांकन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।अप्पी रेड्डी ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि वह इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करे और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे।फिलहाल यह मामला चुनाव आयोग के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब यह देखना होगा कि आयोग इस संबंध में क्या कदम उठाता है और राज्य सरकार या संबंधित विभागों की ओर से सर्वर फेल होने तथा प्रमाणपत्र जारी करने में कथित देरी को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है। स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Next Story