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आंध्र प्रदेश
पेंचलाकोना मंदिर में Brahmotsavam का समापन, ‘चक्र स्नानम’ के साथ संपन्न हुए अंतिम अनुष्ठान
Harrison
2 May 2026 8:16 PM IST

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Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: नेल्लोर जिले में स्थित पेंचलाकोना लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर में आयोजित वार्षिक ब्रह्मोत्सव का समापन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ। उत्सव के अंतिम दिन पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के साथ ‘चक्र स्नानम’ समारोह संपन्न किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन शुरू हो गया था। पुजारियों ने भगवान लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी, देवी और चक्रतालवार की मूर्तियों का विधिवत पूजन किया। इसके बाद इन मूर्तियों को एक सुसज्जित पालकी में विराजमान कर मंदिर परिसर में शोभायात्रा निकाली गई।
यह शोभायात्रा पारंपरिक तरीके से आयोजित की गई, जिसमें मंदिर के वाद्य यंत्रों और धार्मिक धुनों के बीच भक्तों ने भजन और स्तुति गान किए। श्रद्धालु पूरे रास्ते ‘गोविंदा’ और अन्य धार्मिक जयकारों के साथ शामिल रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
पालकी में विराजमान देवताओं को मंदिर परिसर से नंदना वनम स्थित पवित्र ‘पुष्करिणी’ तक ले जाया गया। यह जलाशय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और विशेष अवसरों पर यहां स्नान और पूजा का आयोजन किया जाता है।
पुष्करिणी पहुंचने के बाद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच ‘चक्र स्नानम’ अनुष्ठान संपन्न किया। इस दौरान चक्रतालवार और अन्य प्रतिमाओं को पवित्र जल में स्नान कराया गया। यह अनुष्ठान ब्रह्मोत्सव के समापन का प्रतीक माना जाता है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ‘चक्र स्नानम’ में भाग लेने या इसे देखने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इसी कारण इस दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक देखी गई। कई लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से इस अवसर पर मंदिर पहुंचे।
मंदिर प्रशासन ने भी आयोजन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और भक्तों की सुविधा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए थे, ताकि सभी श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अनुष्ठानों में भाग ले सकें।
ब्रह्मोत्सव के दौरान कई धार्मिक कार्यक्रम और अनुष्ठान आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न पूजा विधियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक प्रवचन शामिल थे। इन सभी कार्यक्रमों का समापन ‘चक्र स्नानम’ के साथ हुआ।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को सफल और व्यवस्थित बताया। उनका कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी बनाए रखते हैं।
कुल मिलाकर, पेंचलाकोना लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर में आयोजित ब्रह्मोत्सव का समापन पारंपरिक विधियों और भक्तिभाव के साथ हुआ, जिसमें ‘चक्र स्नानम’ समारोह मुख्य आकर्षण रहा।
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