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आंध्र का कुप्पम हवाई अड्डा कार्गो कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा

तिरुपति: चित्तूर जिले में प्रस्तावित कुप्पम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट से सिर्फ़ आम यात्रियों को ही नहीं, बल्कि घरेलू एयर कार्गो कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि, बागवानी और फूलों की उपज को लाने-ले जाने में आसानी होगी और रायलसीमा में एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड खेती मज़बूत होगी।
इस इलाके की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक लॉजिस्टिक्स गेटवे के तौर पर देखे जा रहे इस एयरपोर्ट से प्रस्तावित 'ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब' (GHH) पहल को भी मदद मिलने की उम्मीद है। इससे बागवानी उत्पादन केंद्रों, बाज़ारों, प्रोसेसिंग सुविधाओं और एक्सपोर्ट चैनलों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। तेज़ ट्रांसपोर्टेशन से फूल, फल, सब्ज़ियाँ और जल्दी खराब होने वाली दूसरी उपज उगाने वाले किसानों को फ़ायदा हो सकता है। उन्हें दूर के बाज़ारों तक पहुँचने में मदद मिलेगी और ट्रांसपोर्टेशन में लगने वाला समय और कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम होगा।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने जून 2024 में इस एयरपोर्ट प्रोजेक्ट का ऐलान किया था। उन्होंने कनेक्टिविटी बेहतर करने, कृषि और बागवानी एक्सपोर्ट को आसान बनाने और कुप्पम इलाके में आर्थिक विकास को तेज़ी देने की इसकी क्षमता पर ज़ोर दिया। पानी की कमी और खेत पर मिलने वाली कीमतों में बार-बार उतार-चढ़ाव के बावजूद रायलसीमा बागवानी का विस्तार करना चाहता है, इसलिए इसका कार्गो-ओरिएंटेड रोल अहम हो जाता है।
प्रस्तावित 'ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब' का मकसद उत्पादन, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में निवेश के ज़रिए बागवानी वैल्यू चेन को मज़बूत करना है। अगर इसे खास कार्गो-हैंडलिंग सुविधाओं, सही कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से मज़बूत लिंक का साथ मिले, तो कुप्पम एयरपोर्ट इस बड़ी रणनीति का एक अहम हिस्सा बन सकता है।
आम यात्री कनेक्टिविटी के उलट, एयर कार्गो ऑपरेशन से ज़्यादा कीमत वाले और समय के प्रति संवेदनशील सामानों, खासकर कटे हुए फूलों और कुछ खास फलों व सब्ज़ियों के लिए एक खास फ़ायदा मिल सकता है। हालाँकि, ऐसे ऑपरेशन का पैमाना एयरपोर्ट के फ़ाइनल डिज़ाइन, कार्गो सुविधाओं, एयरलाइन की भागीदारी और कमर्शियल व्यवहार्यता पर निर्भर करेगा।





