- Home
- /
- राज्य
- /
- आंध्र प्रदेश
- /
- Andhra: तिरुमाला का...
Andhra: तिरुमाला का इतिहास पुनर्निर्मित एसवी संग्रहालय में जीवंत हो उठता है

तिरुपति: तिरुमाला के नए बने श्री वेंकटेश्वर म्यूज़ियम में पुरानी मूर्तियाँ, मंदिर की चीज़ें, शाही चढ़ावे और तिरुमाला की विरासत से जुड़े दुर्लभ रिकॉर्ड को आधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी के साथ दिखाया जा रहा है। इससे आने वाले लोगों को पहाड़ी पर बने इस मंदिर के इतिहास और परंपराओं को जानने का एक नया तरीका मिलता है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने म्यूज़ियम को आधुनिक टेक्नोलॉजी और सुविधाओं के साथ नया रूप दिया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 16 सितंबर को इसका उद्घाटन किया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) ने 125 करोड़ रुपये और MAPS ने 20 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिससे इस प्रोजेक्ट के लिए कुल दान 145 करोड़ रुपये हो गया।
इस म्यूज़ियम की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, जब मुख्य मंदिर के सामने 'हॉल ऑफ़ एंटीक्स' (प्राचीन वस्तुओं का हॉल) बनाया गया था। 1990 के दशक में इसे वैकुंठम क्यू कॉम्प्लेक्स के सामने एक इमारत में शिफ्ट कर दिया गया। म्यूज़ियम में पल्लव, चोल, पांड्य और विजयनगर शासकों से जुड़ी कई चीज़ें और चढ़ावे सुरक्षित रखे गए हैं। नया बना म्यूज़ियम 1.25 लाख वर्ग फुट में फैला है और इसमें तीन मंज़िलें, 19 गैलरी और 14,000 से ज़्यादा कलाकृतियाँ हैं। यह हर दिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक आने वालों के लिए खुला रहेगा। एंट्री फ़ीस 50 रुपये है, जबकि ब्रह्मांड गैलरी के साथ एंट्री की फ़ीस 200 रुपये है। नई प्रस्तुति में टेक्नोलॉजी मुख्य भूमिका निभाती है। चीज़ों को समझाने के लिए होलोग्राफिक डिस्प्ले, स्पेशल साउंड, 360-डिग्री इंटरैक्टिव स्क्रीन और 3D इमेज प्रोजेक्शन का इस्तेमाल किया गया है। मोशन-सेंसर लाइटिंग यह पक्का करती है कि लाइटें सिर्फ़ उन्हीं जगहों पर जलें जहाँ लोग मौजूद हों। म्यूज़ियम में हाई-स्पीड लिफ़्ट, एयर-कंडीशंड गैलरी, पीने का पानी और रेस्ट-रूम जैसी सुविधाएँ भी हैं।
ग्राउंड-फ़्लोर पर बनी SV गैलरी में भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति और उनके गहनों की तस्वीरें दिखाई गई हैं, जिनमें शिखामणि, हीरे का मुकुट, मकर कुंडल, सहस्रनाम माला, सूर्य कटारी और दशावतार वड्डानम शामिल हैं। पत्थर की मूर्तियों वाली गैलरी में सोपस्टोन, ग्रेनाइट और संगमरमर से बनी श्री कृष्ण, लक्ष्मी नरसिम्हा और भू-वराह स्वामी की मूर्तियां हैं। कांस्य (ब्रॉन्ज़) गैलरी में पारंपरिक 'लॉस्ट-वैक्स' तकनीक से बनी मूर्तियां हैं, जिनमें नटराज, सप्तमातृका, श्रीदेवी, भूदेवी, राधा-कृष्ण और हयग्रीव शामिल हैं। आर्ट गैलरी में बापू और कृष्णराव जैसे कलाकारों की कलाकृतियां, दशावतार और विराट पुरुष की पेंटिंग, तिरुमाला की दुर्लभ तस्वीरें, प्राचीन सिक्के और तांबे की प्लेटों पर लिखे अन्नमाचार्य के भक्ति गीत दिखाए गए हैं।
पहली मंज़िल मंदिर की वास्तुकला, वास्तु शास्त्र और पूजा व मंदिर प्रशासन में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों पर केंद्रित है। यहां कोलुवु सिंहासनम, एक पुरानी हुंडी और मंदिर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले बर्तन रखे गए हैं। आनंद निलयम के लिए तैयार की गई लगभग 400 किलोग्राम सोने की शीट भी यहां दिखाई गई है। हथियार, संगीत वाद्ययंत्र और पूजा की सामग्री अन्य गैलरियों का हिस्सा हैं।
दूसरी मंज़िल पर बड़ी डिजिटल स्क्रीन के ज़रिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर की भूमिकाओं के साथ-साथ दशावतार, वेदों और प्राचीन धर्मग्रंथों को दिखाया गया है। तीसरी मंज़िल पर ब्रह्मांड गैलरी है, जहां 7D और इमर्सिव तकनीक का इस्तेमाल करके सृष्टि, ग्रहों, समय के चक्र और भगवान वेंकटेश्वर के ब्रह्मांडीय रूप को दिखाया गया है।
म्यूज़ियम का अनुभव छत तक फैला हुआ है, जहां 17 गोपुरम अन्नमाचार्य, तारिगोंडा वेंगामंबा और रामानुजाचार्य जैसे भक्तों के जीवन के साथ-साथ रामायण और महाभारत के दृश्यों को दर्शाते हैं।





