आंध्र प्रदेश

Andhra: सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता साफ़ किया

Tulsi Rao
10 Oct 2026 2:43 PM IST
Andhra: सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता साफ़ किया
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अमरावती: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता साफ़ कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता और YSR कांग्रेस पार्टी की चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के 1 अक्टूबर के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग (SEC) से ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव जल्द से जल्द, यानी छह हफ़्ते के अंदर शुरू करने को कहा गया था।

कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर चुनाव आयोग (ECI) चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले संशोधित SIR वोटर लिस्ट जारी करता है, तो उसी लिस्ट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अगर अधिसूचना से पहले संशोधित लिस्ट जारी नहीं होती है, तो चुनाव मौजूदा वोटर लिस्ट के आधार पर और लागू राज्य कानूनों के तहत कराए जा सकते हैं।

ECI ने अंतिम SIR लिस्ट 16 अक्टूबर, 2026 को जारी करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि SEC ने अभी तक चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की है। SEC ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह हाई कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए छह हफ़्ते के अंदर अधिसूचना जारी करने के लिए तैयार है।

YSRCP ने तर्क दिया था कि चुनाव गिनती और संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होने चाहिए। उसने वार्डों के परिसीमन को भी चुनौती दी और 1 जनवरी, 2026 के संदर्भ वाली वोटर लिस्ट का इस्तेमाल करके चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के हाई कोर्ट के निर्देश पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर वकील सी. आर्यमा सुंदरम ने कहा कि लगभग 44 लाख मतदाताओं को लिस्ट से हटा दिया गया था क्योंकि उनके अस्तित्व में न होने की सूचना मिली थी, जबकि नए मतदाताओं को भी जोड़ा गया था। ECI के यह संकेत देने पर कि संशोधन 16 अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा, उन्होंने तर्क दिया कि अगर चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो संशोधित लिस्ट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

बेंच ने चुनाव में देरी करने की ज़रूरत पर सवाल उठाया, जबकि न तो गिनती करने वालों और न ही केंद्र सरकार ने इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव में बाधा डालना जनहित के खिलाफ होगा और YSRCP की याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान, बेंच ने आंध्र प्रदेश पंचायत राज एक्ट, 1994 और आंध्र प्रदेश म्युनिसिपैलिटीज़ एक्ट, 1995 के उन प्रावधानों की जांच की जो स्थानीय निकाय चुनावों के लिए वोटर लिस्ट (इलेक्टोरल रोल) को नियंत्रित करते हैं। SEC की ओर से पेश सीनियर वकील के. परमेश्वर ने कहा कि चुनावों के लिए अभी तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है और जब तक ECI संशोधित लिस्ट पब्लिश नहीं करता, तब तक अभी लागू वोटर लिस्ट ही मान्य रहेगी।

बेंच ने साफ़ किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किया गया कोई भी संशोधन पहले से लागू वोटर लिस्ट को अपने-आप अमान्य नहीं करेगा। कौन सी लिस्ट लागू होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संशोधित SIR लिस्ट चुनाव नोटिफिकेशन से पहले पब्लिश की गई थी या नहीं।

यह मामला हाई कोर्ट के 1 अक्टूबर के उस फ़ैसले से जुड़ा है जो चुनाव में देरी, वार्डों के परिसीमन और इस्तेमाल होने वाली वोटर लिस्ट से जुड़ी याचिकाओं पर आया था। हाई कोर्ट ने गौर किया कि शहरी स्थानीय निकायों का कार्यकाल 17 मार्च, 2026 को और ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 2 अप्रैल, 2026 को खत्म हो गया था। कोर्ट ने सरकार और SEC को निर्देश दिया कि वे छह हफ़्ते के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू करें।

हाई कोर्ट ने 'लक्ष्मी चरण सेन बनाम ए.के.एम. हसन उज़्ज़मान' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि वोटर लिस्ट में चल रहा संशोधन अपने-आप मौजूदा लिस्ट को अमान्य नहीं करता और न ही चुनावों को टालने का आधार बनता है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से स्थानीय निकाय चुनावों के रास्ते में SIR प्रक्रिया से जुड़ी बाधा हट गई है, जिससे राज्य सरकार और SEC अब कोर्ट के निर्देशों और संशोधित वोटर लिस्ट की स्थिति के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं।

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