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कुरनूल: बुधवार को वरिष्ठ वकील और 'लॉयर्स एंड पब्लिक फ्रंट' के राज्य संयोजक मड्डुरु सुभाष चंद्र बोस ने बताया कि विशेष SC/ST कोर्ट ने देवनाकोंडा के 20 निवासियों के खिलाफ दर्ज SC/ST अत्याचार का मामला खारिज कर दिया, क्योंकि उन पर लगे आरोप साबित नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, जिससे उन आरोपियों को राहत मिली जो लगभग चार साल से इस मामले का सामना कर रहे थे।
'द हंस इंडिया' से बात करते हुए सुभाष चंद्र बोस ने बताया कि देवनाकोंडा पुलिस ने 2022 में बोब्बा मल्लिकार्जुन और 19 अन्य लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। कमजोर वर्गों से ताल्लुक रखने वाले आरोपी नियमित रूप से कोर्ट की सुनवाई में शामिल होते रहे और लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि वे आरोपियों के वकील के तौर पर पेश हुए और कोर्ट के सामने मामले की पैरवी की।
वरिष्ठ वकील ने कहा कि विशेष SC/ST कोर्ट के जिला जज ने मामला खारिज कर दिया क्योंकि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा। उन्होंने SC, ST, BC और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों से आपसी सद्भाव बनाए रखने और अनावश्यक विवादों व मुकदमों से बचने की अपील की। उन्होंने सलाह दी कि अगर किसी पर झूठा या गैर-कानूनी मामला दर्ज किया जाता है, तो उन्हें डरना नहीं चाहिए, बल्कि उचित राहत के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या कोर्ट से संपर्क करना चाहिए।
सुभाष चंद्र बोस ने आरोप लगाया कि ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें राजनीतिक बदले की भावना से विरोधियों के खिलाफ SC/ST अधिनियम के तहत मामले दर्ज कराने के लिए राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया, जिससे इस कानून के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपों की जांच सक्षम अधिकारियों और कोर्ट द्वारा हर मामले के तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।





