आंध्र प्रदेश

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार की नई पहल

Bhumika Sahu
28 Jan 2022 2:34 AM GMT
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार की नई पहल
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आंध्र प्रदेश को 2030 तक पूर्ण प्राकृतिक खेती वाला राज्य बनाने के लक्ष्य को लेकर कार्य किया जा रहा है. इसके लिए यहां पर सीमांत महिला किसानों को कम ब्याज दर या मुफ्त में बीज देने की पहल की जा रही है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने एक नयी पहल की शुुरुआत की है. जिसके तहत राज्य के अनुसूचित जाति (एससी) की 70,000 से अधिक सीमांत किसानों (Marginal Farmers) खास कर महिलाओं को वित्तीय सहायता (Financial Assistance) प्रदान करने की घोषणा की गई है. प्राकृतिक खेती पद्धति में रसायनों का उपयोग नहीं होता है और यह पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है. इसे छोटे जोत वाले किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है क्योंकि यह बाजार से खरीदे गए कृषि इनपुट पर किसानों की निर्भरता को कम करता है.

राज्य सरकार द्वारा किए गए घोषणा के मुताबिक 30 जिलों में काश्तकार किसानों सहित प्रत्येक चिन्हित 71,560 अनुसूचित जाति के किसानों को 10,000 रुपये की एकमुश्त सब्सिडी और ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा. राज्य सरकार का यह कदम किसानों को पारंपरिक खेती से प्राकृतिकत खेती में बदलने के लिए और कृषि की लागत को कम करने के लिए उठाया गया है. 2019 के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वेक्षण के अनुसार, अनुसूचित जाति के किसान परिवार राज्य के कृषि परिवारों का 12 प्रतिशत हैं. इनमें एक बड़ा हिस्सा काश्तकार किसान हैं.
स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क का होगा इस्तेमाल
सरकार इस योजना को लेकर किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए और जन-जन तक पहुंचाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी. डाउन टू अर्थ के मुताबिक अनुसूचित जाति की आबादी के कल्याण के लिए काम करने वाले राज्य एससी निगम के प्रबंध निदेशक हर्षवर्धन ने कहा कि हम शुरुआत में महिला किसानों के साथ शुरू कर रहे हैं क्योंकि हमारे पास महिला समूहों का एक बड़ा नेटवर्क है. इसके अलावा जो किसान प्राकृतिक खेती करना चाहते हैं उनकी पहचान की गई है. किसान प्राकृतिक खेती की तरफ रुचि दिखा रहे हैं. चिन्हित किए गए सभी किसान छोटे, सीमांत या भूमिहीन हैं और उनके पास एक एकड़ या उससे कम जमीन है.
2030 तक पूर्ण प्राकृतिक खेती वाला राज्य बनने का लक्ष्य
हर्षवर्धन ने कहा कि लाभार्थी सब्सिडी का उपयोग बीज खरीदने, मल्चिंग के साथ-प्राकृतिक खेती के लिए उपयोगी वस्तुओं के लिए कर सकते हैं. लोन अमाउंट के लिए किसान व्यक्तिगत एमसीपी (Micro Credit Plan) तैयार करेंगे और उसके आधार पर उन्हें ब्याज मुक्त ऋण (Interest Free Loan) दिया जाएगा. उन्होंने कहा लोन अमाउंट पर कोई सीमा नहीं है, लेकिन हमारे आकलन से, औसत राशि लगभग 40,000-50,000 रुपये होगी. 2030 तक आंध्र प्रदेश को पूर्ण प्राकृतिक खेती वाला राज्य बनाने की प्रदेश में चलाए जा रहे आंध्र प्रदेश समुदाय-प्रबंधित प्राकृतिक खेती (APCNF) कार्यक्रम को रफ्तार देने की पहल है.
किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद
परियोजना के तहत किसानों को एपीसीएनएफ को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी रायथु साधिका संस्था द्वारा प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण दिया जाएगा. रायथु साधिका संस्था द्वारा किसानों को माइक्रो क्रेडिट प्लान तैयार करने में मदद करेगा और उन्हें मार्केटिंग टाई-अप के माध्यम से अपनी उपज की बिक्री के लिए बाजार से जोड़ेगा. आरवाईएसएस के सीईओ बी रामाराव ने कहा कि बड़ी संख्या में गरीब और सीमांत किसान अनुसूचित जाति के किसान हैं और प्राकृतिक खेती में जाने से उन्हें खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
समूह के जरिए किया जाएगा क्षमता निर्माण
उन्होंने कहा कि हमने महिला किसानों के साथ परियोजना शुरू की है क्योंकि एसएचजी के पास एक अच्छी तरह से स्थापित नेटवर्क है और हम समूहों में क्षमता निर्माण कार्यक्रम और प्रशिक्षण कर सकते हैं. साथ ही बताया कि फंड की उपलब्धता के आधार पर, हम अन्य किसानों के लिए भी विस्तार करने के बारे में सोचेंगे. सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (Center For Sustainable Agriculture) के कार्यकारी निदेशक जीवी रामंजनेयुलु ने कहा कि आंध्रप्रदेश में 41 फीसदी से अधिक काश्तकार किसान हैं और उनमें से ज्यादातर एससी परिवारों से आते हैं. "वे किसी भी योजना तक नहीं पहुंच सकते क्योंकि जमीन उनके नाम पर नहीं है. इसलिए वे नियमित कृषि ऋण भी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं.


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