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Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश: श्री विश्व विज्ञान विद्या आध्यात्मिक पीठम के पादरी डॉ. उमर अलीशा ने कहा है कि समाज की वास्तविक प्रगति महिलाओं की उन्नति से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “महिलाओं की भलाई ही इंसानियत की भलाई है” और जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो पूरा समाज और परिवार मजबूत होता है।
यह बात उन्होंने शुक्रवार को काकीनाडा में श्री विश्व विज्ञान विद्या आध्यात्मिक पीठम परिसर में फरज़ाना अलीशा पेपर प्लेट निर्माण इकाई के उद्घाटन अवसर पर कही। इस इकाई की शुरुआत उमर अलीशा रूरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के तहत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है।
कार्यक्रम में डॉ. उमर अलीशा ने कहा कि किसी भी परिवार की प्रगति में महिला की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि जब एक महिला शिक्षित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सक्षम बनती है तो उसका सीधा असर पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर पड़ता है।
इस पहल के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे अपनी आजीविका स्वयं चला सकें और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें। डॉ. उमर अलीशा ने विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों का उल्लेख किया और कहा कि ट्रस्ट की ओर से कई सामाजिक और आजीविका से जुड़े कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने वेस्ट गोदावरी जिले के चीमलावरिगुडेम क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की, जहां कट्टा लक्ष्मी के नेतृत्व में कई कल्याणकारी और रोजगार आधारित योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी काकीनाडा (JNTUK) के प्रिंसिपल डॉ. के. पद्मराजू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए बेहद उपयोगी हैं।
महिला समन्वयक पेरूरी कोमाली ने इस परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पेपर प्लेट निर्माण इकाई का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर देना है। उन्होंने कहा कि इस यूनिट के माध्यम से महिलाएं छोटे स्तर पर काम शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं और अपनी आय बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रशिक्षण और आवश्यक सहायता के जरिए महिलाओं को उत्पादन प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, ताकि वे स्वयं अपने उत्पाद तैयार कर बाजार तक पहुंचा सकें। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल का स्वागत किया और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
इस अवसर पर यह भी कहा गया कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलें तो वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों के समान योगदान दे सकती हैं। डॉ. उमर अलीशा ने अंत में कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं का सशक्त होना आवश्यक है और यह प्रयास उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कुल मिलाकर यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और सामाजिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।





