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Andhra: स्वदेशी INS मंगरोल को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया

विशाखापत्तनम: भारतीय नौसेना ने 12 अक्टूबर (सोमवार) को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में 'माहे-क्लास' के तीसरे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) - INS मंगरोल (P82) को कमीशन किया।
कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने की। इस मौके पर रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), इंडस्ट्री पार्टनर्स और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
कोच्चि के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित INS मंगरोल, युद्धपोत डिज़ाइन, निर्माण और सिस्टम इंटीग्रेशन में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री वाला यह जहाज 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दिखाता है। साथ ही, यह स्वदेशी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने में भारतीय रक्षा उद्योगों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के योगदान को भी उजागर करता है।
तटीय और उथले पानी में ऑपरेशन के लिए डिज़ाइन किया गया INS मंगरोल एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW), पानी के नीचे निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन (LIMO) और माइन वॉरफेयर से जुड़े कार्यों को करने में सक्षम है। इसके एडवांस्ड सेंसर, सोनार और हथियार सिस्टम चुनौतीपूर्ण तटीय माहौल में पानी के नीचे के खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उनका मुकाबला करने की इसकी क्षमता को बढ़ाते हैं। तीन डीजल इंजन-संचालित वॉटरजेट प्रोपल्शन यूनिट से चलने वाला यह जहाज आसानी से मुड़ने और तेज़ी से प्रतिक्रिया करने में सक्षम है, जो उथले और सीमित पानी में ऑपरेशन के लिए ज़रूरी है।
वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने अपने संबोधन में भारत की समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं को मजबूत करने में स्वदेशी युद्धपोतों के महत्व पर प्रकाश डाला, खासकर बदलते समुद्री सुरक्षा माहौल में। उन्होंने भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमताओं और तकनीकी प्रगति, ऑपरेशनल तैयारी और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया।
INS मंगरोल का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर और प्रमुख मछली पकड़ने वाले बंदरगाह 'मंगरोल' के नाम पर रखा गया है। यह जहाज़ पुराने INS मंगरोल (M85) की विरासत को भी आगे बढ़ाता है। INS मंगरोल एक माइनस्वीपर था जिसने अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना की सेवा की थी। इस तरह, यह जहाज़ खास युद्धपोतों के नाम को बनाए रखने की नौसेना की परंपरा को जारी रखता है।
INS मंगरोल का कमीशन होना भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं और तटीय सुरक्षा की तैयारियों को मज़बूत करने की दिशा में एक और अहम पड़ाव है। यह जहाज़ भारत के तटीय इलाकों और समुद्री हितों की सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र की जानकारी बढ़ाने और पानी के नीचे के खतरों का मुक़ाबला करने में योगदान देगा।





