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Andhra: सरकार ने मुरासु चक्रवात राहत के लिए ₹37 करोड़ जारी किए

विजयवाड़ा: राज्य सरकार ने चक्रवात 'मुरसु' (Murasu) को देखते हुए बचाव, राहत और आपातकालीन कार्यों के लिए 17 जिलों को 37 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
सरकार ने 2 नवंबर को G.O. Rt. No. 120 जारी किया, जिसके तहत जिला कलेक्टरों और मजिस्ट्रेटों को नियम TR-27 के अंतर्गत राहत कार्यों पर होने वाले तत्काल खर्चों के लिए फंड निकालने की अनुमति दी गई है।
आदेश के अनुसार, छह जिलों — एसपीएसआर नेल्लोर, प्रकाशम, मरकापुरम, बापटला, गुंटूर और कृष्णा — में से प्रत्येक को 3-3 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आठ अन्य जिलों — एलुरु, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, एनटीआर, पलनाडु, तिरुपति, चित्तूर और नंडयाल — को 2-2 करोड़ रुपये मिलेंगे। कडप्पा, श्री सत्य साईं और अन्नमय्या जिलों को 1-1 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
यह आवंटन आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) के एक प्रस्ताव के बाद किया गया है। इसमें IMD (भारतीय मौसम विज्ञान विभाग) के बुलेटिन का हवाला दिया गया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि एक भीषण चक्रवाती तूफान 3 नवंबर की सुबह तक नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है। इस दौरान हवा की गति 100–110 किमी प्रति घंटा रहने और झोंकों के साथ 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है।
कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे बाढ़ संभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाने को प्राथमिकता दें। साथ ही, सुरक्षित पेयजल, भोजन और दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करें, चिकित्सा शिविर लगाएं और साफ-सफाई बनाए रखें। इस फंड का उपयोग आपातकालीन बिजली व्यवस्था करने और क्षतिग्रस्त सड़कों तथा सिंचाई के बुनियादी ढांचे की तत्काल मरम्मत के लिए भी किया जा सकता है।
सरकार ने कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि प्रभावित लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाने के लिए जहां भी संभव हो, APSRTC की बसों का इंतजाम करें। यदि मौजूदा सुविधाएं कम पड़ जाएं, तो सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का उपयोग आश्रय स्थलों के रूप में किया जा सकता है।
कलेक्टरों से यह भी कहा गया है कि वे सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने के लिए सड़क एवं भवन विभाग, नगर प्रशासन और पंचायत राज विभाग के साथ-साथ SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) के कर्मियों से भी मदद लें।
कलेक्टरों को वित्तीय सावधानी बरतनी होगी, फंड निकालने के बाद 30 दिनों के भीतर अकाउंटेंट जनरल को प्राधिकरण आदेश और तत्काल आवश्यकता को स्पष्ट करने वाले बयान सौंपने होंगे, तथा विस्तृत खर्च विवरण (contingent bills) जमा करने होंगे। बची हुई कोई भी राशि वापस करनी होगी।





