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काकीनाडा: अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में आए चक्रवात 'अरनाब' और तटीय इलाकों में समुद्र के कटाव (sea erosion) के कारण उप्पाडा-काकीनाडा बीच रोड को भारी नुकसान पहुंचा है। ड्रोन से ली गई तस्वीरों में तबाही का पैमाना साफ नजर आ रहा है, खासकर नेमाम और पल्लीपेटा चौराहे के बीच वाले हिस्से में। चक्रवात से पहले अच्छी हालत में रही यह सड़क अब बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, और समुद्र की तेज लहरों ने इसके कई हिस्सों को बहा दिया है। हवाई तस्वीरों में टूटी-फूटी सड़क और तटीय सुरक्षा ढांचों को हुए नुकसान की भयावह तस्वीर दिख रही है।
चक्रवात का असर उन मछुआरा समुदायों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी पड़ा है, जिनका जीवन और आजीविका लगातार हो रहे तटीय कटाव के कारण खतरे में है। कटाव को रोकने के लिए तट के किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवारें और रखे गए बड़े पत्थर, लहरों के तेज दबाव के कारण अपनी जगह से हट गए हैं और इधर-उधर बिखर गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, काकीनाडा बंदरगाह के पास 'होप आइलैंड' की मौजूदगी तट के किनारे लहरों के पैटर्न को प्रभावित करती है। इसके कारण चक्रवात के दौरान उप्पाडा का तट लहरों की भीषण मार झेलता है, जिससे वहां बार-बार कटाव होता है। कोनापापापेटा, पल्लीपेटा और सुब्बाम्पेटा के पास के तटीय इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
तट के किनारे 30 से ज्यादा घर ढह गए और कई बिजली के खंभे उखड़ गए। बीच रोड के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने और संपर्क टूट जाने के कारण, उप्पाडा और काकीनाडा के बीच वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। अधिकारियों ने तटीय इलाकों में खतरे की जद में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है।
उप्पाडा सड़क को हुए भारी नुकसान का आकलन सिर्फ इसके पुनर्निर्माण की लागत के आधार पर ही नहीं, बल्कि पर्यटन, परिवहन और मछुआरा समुदायों की आजीविका पर पड़ने वाले व्यापक असर के नजरिए से भी किया जाना चाहिए। इस महत्वपूर्ण तटीय मार्ग के बंद होने से आवागमन प्रभावित हुआ है, जिसका असर स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। चक्रवात और लगातार हो रहे समुद्री कटाव से हुई तबाही का जायजा लेने के लिए जिला अधिकारियों और एक केंद्रीय टीम ने क्षतिग्रस्त सड़क का निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण से नुकसान का आकलन करने और सड़क की बहाली के लिए जरूरी कदम तय करने में मदद मिलेगी। सरकार ने प्रभावित इलाकों में सड़क की मरम्मत और बहाली का काम शुरू कर दिया है। हालाँकि, हाल ही में हुए नुकसान ने एक बार फिर उन चुनौतियों को उजागर कर दिया है जो संवेदनशील उप्पाडा तटरेखा की सुरक्षा करने, सड़क को बहाल करने, और तट के किनारे रहने वाले मछुआरा समुदायों की सुरक्षा व आजीविका सुनिश्चित करने से जुड़ी हैं।





