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Andhra: सीएम नायडू पश्चिम गोदावरी के चक्रवात प्रभावित कोनसीमा का दौरा करेंगे

अमरावती: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू गुरुवार दोपहर चक्रवात 'अरनाब' से प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। वे डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा और पश्चिम गोदावरी जिलों में जाकर चक्रवात से हुए नुकसान का जायजा लेंगे। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने केंद्र से मदद मांगी है। बुधवार को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चक्रवात की तीव्रता और आंध्र प्रदेश पर इसके असर के बारे में जानकारी दी।
बुधवार को सचिवालय स्थित 'रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी' (RTGS) केंद्र में मीडिया से बात करते हुए नायडू ने कहा कि केंद्र को पहले नुकसान का एक शुरुआती आकलन (प्रारंभिक रिपोर्ट) सौंपा जाएगा, और बाद में एक विस्तृत रिपोर्ट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि नारियल के बागानों और अन्य बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों को कितनी मदद की जरूरत है, यह तय करने के लिए कृषि और बागवानी फसलों के नुकसान का पूरा हिसाब लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत उपायों की घोषणा की। जिन परिवारों के घरों में पानी भर गया है, उन्हें 25 किलो चावल दिया जाएगा। बुनकरों और मछुआरों को 50 किलो चावल के साथ-साथ एक-एक किलो प्याज, खाना पकाने का तेल और अरहर की दाल दी जाएगी। इसके अलावा, प्रति व्यक्ति 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। चक्रवात से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
नायडू ने बताया कि प्रभावित जिलों में लोगों को आर्थिक सहायता देने का काम गुरुवार से शुरू हो जाएगा। हालांकि, फसलों के नुकसान के मुआवजे पर फैसला नुकसान के आकलन के बाद लिया जाएगा। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट की वर्चुअल बैठक में इन राहत उपायों पर निर्णय लिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने चक्रवात में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम में बिजली का खंभा और एक पेड़ गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि अनाकापल्ली और भीमवरम में एक-एक व्यक्ति की जान चली गई।
मुख्यमंत्री ने उन अधिकारियों, कलेक्टर्स और मैदानी कर्मचारियों को धन्यवाद दिया जिन्होंने पूरी रात काम किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की आपूर्ति और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया है।
राज्य की आपदा प्रबंधन रणनीति के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक की मदद से अधिकारी यह सटीक रूप से पता लगा पाए कि चक्रवात कहां टकराएगा और किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इससे श्रीकाकुलम से लेकर नेल्लोर तक के पूरे इलाके को 'हाई अलर्ट' पर रखने की जरूरत नहीं पड़ी। सरकार का मुख्य ध्यान पूर्वानुमान, सटीकता और ज़मीनी स्तर पर तैयारियों पर था, ताकि जान-माल के नुकसान को कम से कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि नहरों में रुकावटें कम होने से कई इलाकों में पानी भरने की समस्या को सीमित करने में मदद मिली।
नायडू ने यह भी कहा कि चक्रवात से जुड़ी बारिश के बाद, राज्य में औसत बारिश की कमी 39 प्रतिशत से घटकर 27 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों से RTGS केंद्र की अनदेखी की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता समय पर मदद पहुँचाना, प्रभावित परिवारों को सहारा देना और लोगों का भरोसा फिर से बहाल करना है।





