आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश में 77वें TB सील सेल अभियान का आगाज

Ratna Netam
7 Oct 2026 4:20 PM IST
आंध्र प्रदेश में 77वें TB सील सेल अभियान का आगाज
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विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और आंध्र प्रदेश TB एसोसिएशन के अध्यक्ष सैयद अब्दुल नज़ीर ने बुधवार को विजयवाड़ा स्थित लोक भवन के दरबार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में 77वें ट्यूबरकुलोसिस (TB) सील सेल अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में काफी प्रगति होने के बावजूद ट्यूबरकुलोसिस आज भी गंभीर और जानलेवा बीमारी बनी हुई है। उन्होंने टीबी के खिलाफ लड़ाई को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित न रखते हुए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी पर जोर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गवर्नर अब्दुल नज़ीर ने टीबी के इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 144 वर्ष पहले, वर्ष 1882 में सर रॉबर्ट कोच ने उस जीवाणु की पहचान की थी जो ट्यूबरकुलोसिस का कारण बनता है। 24 मार्च 1882 को रॉबर्ट कोच ने माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की खोज की घोषणा की थी। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस भी मनाया जाता है।
राज्यपाल ने कहा कि बीमारी की पहचान और उसके उपचार के क्षेत्र में पिछले एक सदी से ज्यादा समय में व्यापक बदलाव आए हैं। बेहतर जांच तकनीक, दवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के जरिए टीबी को नियंत्रित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन इसके बावजूद यह बीमारी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।
अब्दुल नज़ीर ने कहा कि ट्यूबरकुलोसिस को सिर्फ एक मेडिकल समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह एक सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है, क्योंकि बीमारी का असर सीधे मरीज के साथ-साथ उसके परिवार, आय, रोजगार और सामाजिक जीवन पर पड़ता है। लंबे इलाज, पोषण की जरूरत और कई बार काम करने में असमर्थता के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करना बेहद जरूरी है। बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अलग-थलग करने के बजाय उसे समय पर इलाज, पोषण और मानसिक समर्थन मिलना चाहिए। बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होगी और उपचार जितनी नियमितता से चलेगा, मरीज के स्वस्थ होने और संक्रमण फैलने के खतरे को कम करने की संभावना उतनी ही बेहतर होती है।
TB सील सेल अभियान का उद्देश्य भी बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और टीबी नियंत्रण गतिविधियों के लिए समाज की भागीदारी सुनिश्चित करना है। ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया और उसकी राज्य इकाइयां लंबे समय से ऐसे अभियानों के जरिए लोगों को टीबी की रोकथाम, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करती रही हैं। संस्था की वेबसाइट पर भी 2026 के 77वें TB सील अभियान को प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया गया है।
सील सेल अभियान के जरिए एकत्रित संसाधनों का उपयोग टीबी के प्रति जागरूकता, रोगियों की सहायता और बीमारी से जुड़े कार्यक्रमों में किया जाता रहा है। आंध्र प्रदेश में भी इस अभियान की लंबी परंपरा रही है। इससे पहले राज्यपाल अब्दुल नज़ीर ने 2023 में 74वें और 2024 में 75वें TB सील सेल अभियान की शुरुआत की थी।
गवर्नर ने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों को भी मिलकर काम करना होगा। विशेष रूप से लोगों में बीमारी के लक्षणों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और जांच कराने में झिझक को दूर करना जरूरी है।
टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करने वाला संक्रमण है और यह हवा के जरिए फैल सकता है। माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया इसके लिए जिम्मेदार है। सक्रिय फेफड़ों की टीबी से पीड़ित व्यक्ति के साथ लंबे समय तक निकट संपर्क संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है। समय पर पहचान और पूरा उपचार बीमारी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
टीबी की चुनौती भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। हाल के वर्षों में जांच, डिजिटल निगरानी, पोषण सहायता और उपचार की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है। देश में टीबी की घटनाओं और मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि बीमारी का भार अभी भी बड़ा है। मई 2026 में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार पिछले दशक में भारत में टीबी की घटनाओं में 21 प्रतिशत और मृत्यु दर में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि उपचार कवरेज में भी विस्तार हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में कुपोषण, मधुमेह, तंबाकू और कमजोर प्रतिरक्षा जैसी स्थितियों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। ऐसे कारक बीमारी के जोखिम और उपचार की जटिलता को बढ़ा सकते हैं। इसलिए टीबी नियंत्रण केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि मरीज के संपूर्ण स्वास्थ्य और सामाजिक परिस्थितियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
गवर्नर अब्दुल नज़ीर ने इसी व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि टीबी का प्रभाव व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और समुदाय को भी प्रभावित करता है। उन्होंने लोगों से अभियान के साथ जुड़ने और टीबी मुक्त समाज के प्रयासों में सहयोग देने की अपील की।
77वें TB सील सेल अभियान की शुरुआत के साथ आंध्र प्रदेश में एक बार फिर बीमारी के खिलाफ जनजागरूकता और सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया गया है। राज्यपाल का संदेश स्पष्ट रहा कि चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धियों के बावजूद टीबी को समाप्त करने के लिए सामाजिक सहयोग, समय पर जांच, नियमित उपचार और मरीजों के प्रति संवेदनशील रवैया समान रूप से जरूरी है।
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