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विजयवाड़ा: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर आयोजित होने वाला पहला 'राष्ट्रीय सरस मेला' विजयवाड़ा के पुन्नामी घाट पर चल रहा है और यह 31 अक्टूबर तक चलेगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आंध्र प्रदेश सरकार, नाबार्ड (NABARD), एनआईआरडीपीआर (NIRDPR) और कुडुम्बश्री के सहयोग से आयोजित इस मेले में पारंपरिक हस्तशिल्प और उन महिला उद्यमियों की सफलता की कहानियां प्रदर्शित की गई हैं, जिन्होंने 'लखपति दीदी' का मुकाम हासिल किया है।
'लखपति दीदी पैवेलियन' में चार महिला उद्यमियों ने स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य से लेकर एक सफल व्यवसायी बनने तक के अपने सफर को साझा किया। तिरुपति की चंद्रकला ने अपने परिवार के लकड़ी की नक्काशी के काम को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय बना लिया है, जिसमें 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं। गोवा की सिद्धि ने पारंपरिक कपड़ों (एथनिक वियर) का एक सफल व्यवसाय खड़ा किया है, जिसका सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपये है।
झारखंड की कुंवारी ने बचत की एक छोटी सी पहल को 1,500 से अधिक सदस्यों वाले 'किसान उत्पादक संगठन' (FPO) में बदल दिया, जिससे हर महीने 6 से 7 लाख रुपये की बिक्री होती है।
अनकापल्ली की एस. पार्वती ने काजू प्रसंस्करण (cashew processing) का एक ऐसा व्यवसाय विकसित किया है, जिसका सालाना टर्नओवर लगभग 50 लाख रुपये है।
'लखपति दीदी' उस महिला को कहा जाता है जो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है और सालाना कम से कम 1 लाख रुपये कमाती है। यह पहल प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत 2029 तक छह करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने का लक्ष्य रखा गया है।





