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विश्व शौचालय दिवस: वैश्विक स्वच्छता संकट के प्रति जागरूक करती है ये तारीख
SHIDDHANT
18 Nov 2025 9:25 PM IST

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Delhi दिल्ली। आज के समय में हम टेक्नोलॉजी और स्मार्टफोन की दुनिया में जी रहे हैं। वहीं हमारे आसपास के बहुत लोग आज भी साफ-सफाई और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं। वैश्विक स्वच्छता संकट के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है। यह सिर्फ एक दिन नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाने का जरिया है कि शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा हर इंसान का हक है।
अगर शौचालय नहीं होंगे तो लोग खुले में शौच करेंगे। इससे न सिर्फ गंदगी फैलती है बल्कि कई तरह की बीमारियां भी। दस्त, टाइफाइड और हैजा जैसी बीमारियां खुली जगह पर शौच करने से फैलती हैं। यही नहीं, यह बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर भी असर डालता है। विश्व शौचालय दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि साफ-सफाई सिर्फ व्यक्तिगत काम नहीं है, बल्कि यह समाज और देश की जिम्मेदारी भी है। भारत में पिछले कुछ सालों में सरकार और कई संगठन इस दिशा में काम कर रहे हैं। हर घर शौचालय के लिए योजनाएं भी चलाई जा रही है, लेकिन अभी कई गांव और छोटे शहरों में लोग खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ शौचालय बनाना ही काफी है क्या? नहीं। सिर्फ इमारत बना देने से काम नहीं चलेगा। हमें इसे साफ-सुथरा रखना भी जरूरी है। पानी की सुविधा और लोगों को इसके इस्तेमाल की आदत डालना भी उतना ही जरूरी है। यही वजह है कि विश्व शौचालय दिवस पर लोग जागरूकता फैलाने के लिए सेमिनार, रैली और अभियान चलाते हैं। बच्चों, माता-पिता और स्कूलों में लोगों को बताया जाता है कि साफ-सफाई सेहत के लिए कितनी जरूरी है।
इस दिन को मनाने का एक और बड़ा मकसद यह भी है कि यह हमें यह एहसास दिलाता है कि साफ-सफाई केवल सरकारी काम नहीं है, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है। अगर हम अपने घर, मोहल्ले और आस-पास के क्षेत्र को साफ रखेंगे तो बीमारियों की संभावना कम होगी। विश्व शौचालय दिवस हमें यह भी सिखाता है कि विकास तभी सच्चा है जब सभी तक स्वास्थ्य और सुरक्षा पहुंचे। आज के समय में यह सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि सालभर की जिम्मेदारी है कि हम स्वच्छता और हाइजीन को अपने जीवन और समाज का हिस्सा बनाएं। 2020 में सरकार ने बताया था कि 6,03,175 गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है, लेकिन कुछ गांव अभी भी ओडीएफ नहीं हो पाए हैं।
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