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श्रीकृष्ण को क्यों प्रिय है पारिजात जानें इस दिव्य फूल की पौराणिक कथा
nidhi
5 Sept 2026 12:55 PM IST

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भगवान कृष्ण से जुड़ी रोचक कथा
धर्म डेस्क: हिंदू पूजा-पद्धति में सामान्यतः भगवान को ताजे और स्वच्छ फूल चढ़ाने की परंपरा है। जमीन पर गिरे फूलों को पूजा में इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन पारिजात यानी हरसिंगार को लेकर एक खास धार्मिक मान्यता प्रचलित है। माना जाता है कि इसके फूल प्राकृतिक रूप से पेड़ से गिरने के बाद भी पूजा योग्य माने जा सकते हैं। सफेद पंखुड़ियों और नारंगी डंठल वाला यह सुगंधित फूल भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथाओं में विशेष स्थान रखता है।
जमीन पर गिरा पारिजात क्यों माना जाता है पूजा योग्य?
पारिजात के फूलों की खासियत है कि ये रात में खिलते हैं और सुबह होते-होते अपने आप पेड़ से नीचे गिर जाते हैं। इसलिए इन्हें रात की रानी या नाइट फ्लावरिंग जैस्मिन से भी जोड़ा जाता है, हालांकि वनस्पति की दृष्टि से पारिजात का वैज्ञानिक नाम Nyctanthes arbor-tristis है। धार्मिक परंपरा में मान्यता है कि पारिजात के जो फूल स्वाभाविक रूप से पेड़ से गिरते हैं, उन्हें साफ स्थान से उठाकर भगवान को अर्पित किया जा सकता है। यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि यह धार्मिक मान्यता है; पूजा की विधियां अलग-अलग संप्रदायों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
समुद्र मंथन से जुड़ी है पारिजात की कथा
पौराणिक मान्यताओं में पारिजात को समुद्र मंथन से निकले दिव्य रत्नों में शामिल बताया जाता है। कथा के अनुसार देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से कई दिव्य वस्तुएं प्रकट हुई थीं। उन्हीं में पारिजात का दिव्य वृक्ष भी माना जाता है। कथाओं में इसे देवराज इंद्र के स्वर्गलोक से भी जोड़ा गया है। इसी वजह से पारिजात को सामान्य पुष्प के बजाय देवलोक का दिव्य पुष्प मानने की परंपरा विकसित हुई।
भगवान कृष्ण से क्या है पारिजात का संबंध?
पारिजात से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा का उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार सत्यभामा ने पारिजात वृक्ष की इच्छा व्यक्त की थी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण पारिजात वृक्ष को स्वर्ग से पृथ्वी पर लेकर आए। कथा के अलग-अलग संस्करणों में घटनाक्रम थोड़ा अलग मिलता है। एक लोकप्रिय मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण ने पारिजात वृक्ष सत्यभामा के आंगन में लगाया, लेकिन उसके फूल इस तरह गिरते थे कि वे उनकी दूसरी पत्नी रुक्मिणी के आंगन में पहुंचते थे। इस कथा को कई व्याख्याओं में प्रेम, अहंकार और भक्ति के संदेश से जोड़कर देखा जाता है।
भगवान विष्णु को भी प्रिय माना जाता है पारिजात
धार्मिक मान्यताओं में पारिजात को भगवान विष्णु और उनके अवतार भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय पुष्प माना जाता है। इसलिए विष्णु और कृष्ण की पूजा में इसे अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है। सुबह जमीन पर गिरे ताजे पारिजात के फूलों को श्रद्धालु एकत्र करते हैं, साफ करते हैं और पूजा में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि गंदे स्थान पर पड़े, पैरों से कुचले या खराब हो चुके फूलों को पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
मां लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है पारिजात
पारिजात को मां लक्ष्मी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भी शुभ माना जाता है। चूंकि माता लक्ष्मी और पारिजात दोनों को समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है, इसलिए कई लोग इसे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक मानते हैं। वास्तु संबंधी लोकप्रिय मान्यताओं में भी पारिजात का पौधा घर में लगाना शुभ बताया जाता है, लेकिन इन मान्यताओं को धार्मिक परंपरा के रूप में ही समझना चाहिए।
औषधीय महत्व भी है खास
पारिजात केवल धार्मिक महत्व वाला पौधा नहीं है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसकी पत्तियों, फूलों और अन्य हिस्सों का विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि किसी बीमारी के इलाज के लिए पारिजात का सेवन बिना योग्य चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
पारिजात देता है खास संदेश
रात में खिलना और सुबह धरती पर गिर जाना पारिजात की सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक है। इसी प्राकृतिक व्यवहार के कारण धार्मिक परंपराओं में इसे जमीन पर गिरने के बाद भी पूजा योग्य मानने की विशिष्ट मान्यता बनी। भगवान कृष्ण से जुड़ी पारिजात की कथा इस फूल को और खास बनाती है। यही कारण है कि जन्माष्टमी, विष्णु पूजा और अन्य धार्मिक अवसरों पर पारिजात के फूलों का विशेष महत्व माना जाता है।
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