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लाइफ स्टाइल
मिठाइयों पर चांदी का वर्क क्यों लगाया जाता है? जानें वजह
Tara Tandi
26 July 2026 11:09 AM IST
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नई दिल्ली: भारतीय मिठाइयों पर लगा चमचमाता चांदी का वर्क सिर्फ सजावट नहीं होता, बल्कि इसके पीछे परंपरा, शाही संस्कृति और स्वास्थ्य से जुड़ी कई दिलचस्प वजहें छिपी हैं। चाहे काजू कतली हो, पेड़ा, बर्फी या लड्डू—चांदी का वर्क मिठाइयों की खूबसूरती और शान दोनों बढ़ा देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर मिठाइयों पर चांदी ही क्यों लगाई जाती है?
शाही परंपरा से जुड़ा है इतिहास
भारत में चांदी का वर्क लगाने की परंपरा मुगल काल से मानी जाती है। उस समय राजाओं और नवाबों के खान-पान में सोना और चांदी जैसी धातुओं का इस्तेमाल शाही ठाठ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता था। खास मेहमानों के स्वागत और त्योहारों पर मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए उन पर चांदी का वर्क लगाया जाने लगा।
धीरे-धीरे यह परंपरा आम लोगों तक पहुंच गई और आज यह भारतीय मिठाइयों की पहचान बन चुकी है।
आयुर्वेद में भी है महत्व
आयुर्वेद में चांदी को ठंडी तासीर वाली धातु माना गया है। कहा जाता है कि सीमित मात्रा में शुद्ध चांदी शरीर को ठंडक पहुंचाने, पाचन सुधारने और मानसिक शांति देने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि पुराने समय में कई औषधियों और मिठाइयों में चांदी का इस्तेमाल किया जाता था।
हालांकि आधुनिक विज्ञान के अनुसार चांदी का वर्क बहुत पतली परत में होता है और इसका पोषण मूल्य बेहद कम होता है, लेकिन इसे खाने से सामान्यतः कोई नुकसान नहीं माना जाता—बशर्ते वह शुद्ध और सुरक्षित तरीके से बनाया गया हो।
मिठाइयों को बनाता है खास और आकर्षक
चांदी का वर्क मिठाइयों की सुंदरता कई गुना बढ़ा देता है। त्योहारों, शादियों और खास मौकों पर चमकदार मिठाइयां लोगों को ज्यादा आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि महंगी और प्रीमियम मिठाइयों पर अक्सर चांदी का वर्क लगाया जाता है।
इसे सम्मान और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। भारतीय संस्कृति में चमकदार और सुंदर भोजन को समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
कैसे बनता है चांदी का वर्क?
चांदी के वर्क को बेहद पतली परत के रूप में तैयार किया जाता है। इसके लिए शुद्ध चांदी को लंबे समय तक पीटकर बहुत पतला बनाया जाता है। बाद में इसे मिठाइयों पर सावधानी से लगाया जाता है।
हालांकि अब फूड सेफ्टी को लेकर कई नियम लागू किए गए हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाला वर्क पूरी तरह शुद्ध और खाने योग्य होना चाहिए।
नकली वर्क से रहें सावधान
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में कई बार एल्यूमीनियम या मिलावटी वर्क भी बेचे जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। असली चांदी का वर्क हाथ लगाने पर आसानी से टूट जाता है और उंगलियों पर चिपकता नहीं है।
इसलिए मिठाइयां हमेशा भरोसेमंद दुकानों से खरीदनी चाहिए।
सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया में भी है चलन
दिलचस्प बात यह है कि खाने में सोना-चांदी इस्तेमाल करने की परंपरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कई देशों में महंगे डेजर्ट, केक और ड्रिंक्स में भी गोल्ड और सिल्वर लीफ का इस्तेमाल किया जाता है।
भारतीय मिठाइयों पर चांदी का वर्क आज सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि परंपरा, शान और संस्कृति का प्रतीक बन चुका है।
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