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व्रत में क्यों खाए जाते हैं समा के चावल? जानिए सेहत से जुड़ी वजह
Saba Naaz
22 Sept 2025 4:14 PM IST

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Lifestyle लाइफस्टाइल : नवरात्रि 2025 का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह नौ दिनों का त्योहार देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास का प्रतीक होता है।
व्रत के दौरान लोग अनाज, नमक, लहसुन-प्याज आदि त्याग कर सात्विक भोजन करते हैं। इस दौरान "समा के चावल" (या व्रत वाले चावल) का विशेष स्थान होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर व्रत में समा के चावल ही क्यों खाए जाते हैं? और ये आपके ब्लड शुगर लेवल पर किस तरह का असर डालते हैं?
इस रिपोर्ट में हम जानेंगे समा के चावल की उपयोगिता, पोषण संबंधी तथ्य और डायबिटीज के रोगियों के लिए इसके फायदे या नुकसान। समा के चावल को Barnyard Millet के नाम से जाना जाता है। ये असली चावल नहीं होते, बल्कि एक प्रकार का पौष्टिक अनाज होते हैं जो मुख्य रूप से व्रत में खाया जाता है क्योंकि ये अनाज की श्रेणी में नहीं आते और फलाहार में मान्य होते हैं।
इनमें ग्लूटन नहीं होता और ये आसानी से पचने वाले होते हैं, जिससे व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा भी मिलती है और पेट भी हल्का बना रहता है।
व्रत में क्यों खाए जाते हैं समा के चावल?
सात्विकता का प्रतीक: समा के चावल अनाज की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए व्रत के नियमों के अनुसार इन्हें खाना मान्य होता है।
आसान पाचन: व्रत में पेट को हल्का रखना ज़रूरी होता है। समा के चावल फाइबर युक्त होते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखते हैं।
ऊर्जा से भरपूर: व्रत के दौरान शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने वाले भोजन की जरूरत होती है। समा के चावल कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत हैं।
ग्लूटन-फ्री: यह ग्लूटन-फ्री डाइट का हिस्सा होते हैं, जिससे एलर्जी या ग्लूटन-संवेदनशील लोगों को भी फायदा होता है। ब्लड शुगर पर समा के चावल का असर
अब बात करते हैं एक अहम सवाल की – क्या समा के चावल डायबिटीज़ रोगियों के लिए सुरक्षित हैं?
ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI): समा के चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, यानी यह धीरे-धीरे ग्लूकोज़ रिलीज़ करते हैं। इससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता।
फाइबर का स्रोत: इनमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है।
डायबिटिक फ्रेंडली: विशेषज्ञ मानते हैं कि नियंत्रित मात्रा में समा के चावल का सेवन डायबिटीज़ के रोगियों के लिए सुरक्षित हो सकता है, बशर्ते कि वह बिना तला-भुना और अत्यधिक घी या चीनी के सेवन से बचा जाए।
कैलोरी नियंत्रण: समा के चावल की तुलना सफेद चावल से करें तो यह कम कैलोरी और अधिक पोषण प्रदान करते हैं।
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