- Home
- /
- लाइफ स्टाइल
- /
- ‘&’ को क्यों कहते हैं...
लाइफ स्टाइल
‘&’ को क्यों कहते हैं एम्परसेंड? बच्चों के वर्णमाला पाठ से जुड़ा है नाम का इतिहास
nidhi
17 Oct 2026 4:02 PM IST

x
दो अक्षरों को जोड़कर बना ‘&’, सदियों पुराना है इस चिह्न का सफर
अंग्रेजी वर्णमाला में आज 26 अक्षर पढ़ाए जाते हैं, लेकिन कभी बच्चों की वर्णमाला सूची में Z के बाद ‘&’ भी दिखाई देता था। इसी वजह से इसे अक्सर अंग्रेजी का पुराना ‘27वां अक्षर’ कहा जाता है। हालांकि, इसे आज के अक्षरों जैसा सर्वमान्य औपचारिक अक्षर समझना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। यह एक ऐसा चिह्न था, जिसे वर्णमाला के साथ पढ़ाने की परंपरा रही है। इसके नाम ‘एम्परसेंड’ की कहानी भी इसी पढ़ाई से जुड़ी है।
‘&’ का इस्तेमाल अंग्रेजी शब्द ‘and’ यानी ‘और’ के स्थान पर किया जाता है। यह दो नामों, शब्दों या विचारों को जोड़ने का संक्षिप्त तरीका है। किसी निमंत्रण पत्र पर दो लोगों के नाम हों, किसी साझेदारी का उल्लेख हो या किसी शीर्षक में दो विषय जोड़ने हों, यह चिह्न अक्सर नजर आता है। छोटा होने के बावजूद इसकी बनावट और नाम, दोनों के पीछे लंबा भाषाई इतिहास है।
इस चिह्न की शुरुआत अंग्रेजी से नहीं हुई थी। इसकी जड़ें लैटिन भाषा के शब्द ‘et’ में हैं, जिसका अर्थ भी ‘और’ होता है। लिखावट में ‘e’ और ‘t’ को जोड़कर लिखने से एक संयुक्त आकृति बनी। ऐसे संयुक्त अक्षर रूप को ‘लिगेचर’ कहा जाता है। समय के साथ लिखावट बदलती गई और इस संयुक्त रूप ने वह पहचान विकसित की, जिसे आज हम ‘&’ के तौर पर जानते हैं।
चिह्न का इतिहास और उसके अंग्रेजी नाम का इतिहास अलग-अलग हैं। ‘&’ पहले से इस्तेमाल में था, जबकि ‘एम्परसेंड’ नाम बाद में विकसित हुआ। पुराने समय में वर्णमाला पढ़ाते हुए कुछ ऐसे अक्षरों के साथ लैटिन पद ‘per se’ जोड़ा जाता था, जो अपने आप में एक शब्द भी हो सकते थे। ‘Per se’ का अर्थ है ‘अपने आप में’ या ‘स्वयं’। इसी परंपरा का संबंध ‘&’ को पढ़ने के तरीके से भी था।
वर्णमाला के अंत में इस चिह्न को पढ़ते समय ‘and per se and’ कहा जाता था। इसका भाव था कि यह चिह्न अपने आप में ‘and’ शब्द को दर्शाता है। बार-बार और लगातार बोले जाने पर इस पदबंध का उच्चारण बदलता गया। शब्द आपस में मिलते गए और अंततः ‘ampersand’ नाम प्रचलित हो गया।
इसी प्रक्रिया को लोकप्रिय किस्सों में कभी-कभी ‘एक गलती से पड़ा नाम’ कहा जाता है। लेकिन किसी एक बच्चे, शिक्षक या किसी एक दिन हुई गलती से यह नाम बनने का प्रमाण नहीं है। इसे लंबे समय में उच्चारण के संक्षिप्त और परिवर्तित होने की प्रक्रिया कहना अधिक उचित है। भाषा में ऐसे बदलाव होते रहते हैं, जहां कई शब्दों वाला वाक्यांश धीरे-धीरे एक नए शब्द का रूप ले लेता है।
उन्नीसवीं सदी में वर्णमाला के साथ ‘&’ पढ़ाए जाने का उल्लेख मिलता है। पुराने स्कूली पाठों में इसे अंत में रखा जाता था। यही स्थिति ‘27वें अक्षर’ वाली बात का आधार है। फिर भी उस दौर की हर जगह और हर पाठ्यपुस्तक की व्यवस्था को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा। यहां महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि चिह्न का वर्णमाला शिक्षण से संबंध रहा है, जिससे उसके नाम को आकार मिला।
आज ‘&’ अंग्रेजी की मानक 26 अक्षरों वाली वर्णमाला का हिस्सा नहीं है, लेकिन लेखन में इसकी उपयोगिता बनी हुई है। यह पूरे ‘and’ शब्द का स्थान ले सकता है, जबकि सामान्य अक्षर प्रायः मिलकर शब्द बनाते हैं। यही विशेषता इसे सामान्य वर्णमाला अक्षर से अलग करती है।
इसकी आकृति भी हर जगह बिल्कुल एक जैसी नहीं दिखती। अलग-अलग मुद्रण शैलियों और हस्तलेखन में इसका रूप बदल सकता है। कुछ रूपों में मूल ‘e’ और ‘t’ का जुड़ाव समझना आसान होता है, जबकि दूसरे रूप अधिक घुमावदार दिखाई देते हैं। अर्थ वही रहता है—‘और’।
‘एम्परसेंड’ की कहानी बताती है कि रोज इस्तेमाल होने वाले छोटे चिह्न भी शिक्षा, लिखावट और बोलचाल के बदलावों को अपने भीतर समेटे होते हैं। ‘&’ का वर्णमाला के अंत तक पहुंचना और ‘and per se and’ का एक शब्द में बदलना इसी भाषाई यात्रा के दो दिलचस्प पड़ाव हैं।
Next Story





