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क्यों गर्भावस्था के दौरान जंकफूड खाने होता है परहेज, जानिए वजह

Tara Tandi
28 Aug 2021 11:35 AM GMT
क्यों गर्भावस्था के दौरान जंकफूड खाने होता है परहेज, जानिए वजह
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गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से कई ​बार मुंह का स्वाद अच्छा नहीं होता.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क| गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से कई ​बार मुंह का स्वाद अच्छा नहीं होता. कभी कभी तीखा और खट्टा फूड खाने का मन करता है. ऐसे में महिलाएं कई बार जंक फूड और फास्टफूड आदि खाकर अपनी क्रेविंग को खत्म करती हैं. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान जंक फूड और फास्टफूड से परहेज करना चाहिए. इस समय महिला को कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है क्योंकि उसके शरीर से ही बच्चे का विकास होता है. ऐसे में जंकफूड महिला और उसके गर्भस्थ शिशु के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है. जानिए प्रेगनेंसी के दौरान क्यों नहीं खाना चाहिए जंकफूड.

1. जंकफूड में तेल, चीनी, वसा और कैलोरी की उच्च मात्रा में होती है. ऐसे में जंकफूड का अधिक सेवन वजन को तेजी से बढ़ाता है. चूंकि गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन प्राकृतिक रूप से पहले ही बढ़ रहा होता है, ऐसे में जंकफूड उसके वजन को और ज्यादा बढ़ा देता है. इससे ​महिला को कई तरह की समस्याएं तो होती ही हैं, साथ ही डिलीवरी में भी कई तरह के कॉम्प्लिीकेशंस आने का रिस्क रहता है.

2. जंकफूड को ज्यादा खाने से कई बार हाई बीपी की समस्या हो सकती है. अगर आप पहले से हाई बीपी या हार्ट की किसी समस्या से ग्रसित हैं तो आपको इस मामले में बहुत सजग रहने की जरूरत है.

3. गर्भावस्था के दौरान जंकफूड ज्यादा खाने से जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा बढ़ता है क्योंकि जंकफूड में शुगर और कैलोरिफिक पदार्थों की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. जेस्टेशनल डायबिटीज की वजह से जन्म के समय बच्चे का वजन बहुत ज्यादा हो सकता है या प्रीमैच्योर डिलीवरी भी हो सकती है.

4. जंकफूड में किसी तरह के ​न्यूट्रिएंट्स नहीं होते. इसके अधिक सेवन से बच्चे के दिमाग, दिल, लंग्स और हड्डियों पर विपरीत असर पड़ता है. साथ ही गर्भ में अंदर ही बच्चे को अनहेल्दी खाने की आदत लग जाती है.

5. गर्भावस्था के दौरान जंकफूड के अधिक सेवन से गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमागी विकास पर भी विपरीत असर पड़ता है. साथ ही कुछ शोध बताते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान जंकफूड के अधिक सेवन से महिलाओं में एलर्जी और अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है.

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