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लाइफ स्टाइल
लेट प्रेग्नेंसी में क्या रखें ध्यान? जानें हेल्थ टिप्स
Kanchan Paikara
27 Jun 2026 5:02 PM IST

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Lifestyle:आज के आज के समय में करियर, आर्थिक स्थिरता और अन्य जिम्मेदारियों के चलते कई महिलाएं 30 साल की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी प्लान करने का फैसला ले रही हैं। पहले जहां कम उम्र में मां बनने को प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब बदलती जीवनशैली के कारण देर से प्रेग्नेंसी एक आम बात बनती जा रही है। हालांकि, 35 साल की उम्र के बाद गर्भधारण को लेकर महिलाओं के मन में कई सवाल रहते हैं कि क्या यह सुरक्षित है और इससे मां व बच्चे की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 35 की उम्र के बाद भी महिलाएं स्वस्थ प्रेग्नेंसी कंसीव कर सकती हैं, लेकिन इस उम्र में गर्भधारण को मेडिकल भाषा में एडवांस्ड मैटरनल एज (Advanced Maternal Age) कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि इस उम्र में प्रेग्नेंसी संभव नहीं है, बल्कि इस दौरान कुछ अतिरिक्त सावधानियों और नियमित जांच की जरूरत होती है।
डॉक्टर्स बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की फर्टिलिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है। 35 साल के बाद अंडों की संख्या और गुणवत्ता में बदलाव आ सकता है, जिससे गर्भधारण में समय लग सकता है। इसके अलावा कुछ स्वास्थ्य जोखिमों की संभावना भी बढ़ सकती है, इसलिए प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले हेल्थ चेकअप कराना जरूरी माना जाता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 35 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान करने वाली महिलाओं को ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल, थायरॉयड और अन्य स्वास्थ्य जांच जरूर करानी चाहिए। अगर महिला पहले से किसी बीमारी से जूझ रही है तो डॉक्टर की सलाह लेना और भी जरूरी हो जाता है।
इस उम्र में गर्भावस्था के दौरान कुछ जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है, जैसे गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes), हाई ब्लड प्रेशर और कुछ मामलों में डिलीवरी से जुड़ी परेशानियां। हालांकि, सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज, समय पर जांच और डॉक्टर की निगरानी से इन जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले महिला को अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और फोलिक एसिड जैसे जरूरी सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना फायदेमंद हो सकता है।
इसके अलावा, प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित प्रीनेटल चेकअप बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। समय-समय पर होने वाली जांचों से मां और बच्चे दोनों की सेहत पर नजर रखी जा सकती है और किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
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