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दिल की सेहत के लिए क्या खाएं जानिए संतुलित शाकाहार का तरीका

nidhi
1 Nov 2026 7:45 AM IST
दिल की सेहत के लिए क्या खाएं जानिए संतुलित शाकाहार का तरीका
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मिठाई तो शाकाहार भी नहीं देगा पूरी सुरक्षा
शाकाहारी भोजन अपनाने को अक्सर बेहतर स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन केवल मांसाहार नहीं खाने से दिल की बीमारियों से सुरक्षा या वजन नियंत्रित रहने की गारंटी नहीं मिलती। समोसा, नमकीन, मिठाई, बिस्कुट और मीठे पेय भी शाकाहारी हो सकते हैं, फिर भी इनका अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। असली महत्व भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और रोजमर्रा की आदतों का है। संतुलित खानपान हृदय रोग का जोखिम कम करने और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करता है, लेकिन इसे पूर्ण नियंत्रण का निश्चित उपाय नहीं माना जा सकता।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के 2026 के आहार संबंधी मार्गदर्शन में किसी एक खाद्य पदार्थ के बजाय पूरे आहार के स्वरूप पर ध्यान देने की बात कही गई है। इसमें विविध फल-सब्जियां, साबुत अनाज, स्वस्थ प्रोटीन स्रोत और कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल करने पर जोर है। साथ ही, भोजन से मिलने वाली ऊर्जा और शरीर द्वारा खर्च होने वाली ऊर्जा में संतुलन जरूरी है। इसलिए शाकाहारी होने के बावजूद जरूरत से अधिक कैलोरी लेने और शारीरिक गतिविधि कम रहने पर वजन बढ़ सकता है। स्वस्थ भोजन की मात्रा भी व्यक्ति की जरूरत के अनुरूप होनी चाहिए।
रोज की थाली में सबसे पहले विविधता बढ़ाएं। केवल रोटी या चावल के साथ थोड़ी सब्जी खाने के बजाय दाल, चना, राजमा, मौसमी सब्जियां और फल भी शामिल करें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दस वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को प्रतिदिन कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां लेने का लक्ष्य रखना चाहिए। साबुत अनाज और दालें प्राकृतिक फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। फल का रस पीने के बजाय पूरा फल चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि अधिकांश जूस में मुक्त शर्करा की मात्रा अधिक होती है।
अनाज का चुनाव भी महत्वपूर्ण है। मैदे से बनी चीजों पर निर्भर रहने के बजाय साबुत गेहूं, ओट्स, बाजरा और अन्य साबुत अनाजों को जगह दें। उदाहरण के लिए, नाश्ते में रोज बिस्कुट या तली हुई चीजों की जगह सब्जियों वाला दलिया और साथ में दही लिया जा सकता है। दोपहर में रोटी या चावल के साथ दाल और सब्जी शामिल करना संतुलन बढ़ाता है। ये सामान्य उदाहरण हैं; भोजन की सही मात्रा उम्र, गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग होगी। किसी एक अनाज को वजन घटाने वाला जादुई खाद्य पदार्थ समझना उचित नहीं है।
शाकाहारी भोजन में प्रोटीन के लिए दालों, चने, राजमा, सोया, टोफू और अपनी पसंद के अनुसार दूध-दही जैसे स्रोतों का उपयोग किया जा सकता है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के अनुसार, अच्छी तरह नियोजित शाकाहारी आहार से जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। हालांकि, सिर्फ आलू, चावल और रोटी पर आधारित भोजन में पर्याप्त विविधता नहीं रहती। दिनभर अलग-अलग खाद्य समूह शामिल करना उपयोगी है। प्रत्येक भोजन को बिल्कुल एक जैसा संतुलित बनाना जरूरी नहीं, लेकिन पूरे दिन और सप्ताह के भोजन में संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
तेल और घी की मात्रा पर भी नजर रखें। शाकाहारी होने के कारण घी, मक्खन या तली हुई चीजों को असीमित खाना सुरक्षित नहीं हो जाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन संतृप्त वसा वाले स्रोतों की जगह असंतृप्त वनस्पति तेल चुनने और वसा का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह देता है। उबालना, भाप में पकाना और कम तेल में भोजन तैयार करना उपयोगी विकल्प हैं। मेवे और बीज पौष्टिक हैं, लेकिन ऊर्जा से भरपूर भी होते हैं। इसलिए उन्हें अतिरिक्त नाश्ते के ऊपर लगातार खाते रहने के बजाय अपनी कुल जरूरत के अनुरूप शामिल करें।
नमक और चीनी कम करना दिल तथा वजन के लिए महत्वपूर्ण कदम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए पूरे दिन में कुल नमक पांच ग्राम से कम रखने की सलाह देता है। इसमें खाना पकाने के दौरान डाला गया नमक और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का नमक दोनों शामिल हैं। अचार, पापड़, नमकीन और सॉस से भी सोडियम मिलता है। इसी तरह मीठी चाय, शरबत और पैकेट वाले पेय कुल शर्करा बढ़ाते हैं। पैकेट खरीदते समय प्रति सर्विंग मात्रा, नमक, अतिरिक्त चीनी और संतृप्त वसा का विवरण पढ़ना बेहतर चुनाव करने में मदद करता है।
शाकाहार में आयरन और विटामिन बी12 की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित करें। वनस्पति स्रोतों से मिलने वाला आयरन शरीर में अपेक्षाकृत कम आसानी से अवशोषित होता है। दाल या चने के साथ नींबू अथवा अन्य विटामिन सी वाला खाद्य पदार्थ लेना इसके अवशोषण में मदद कर सकता है। दूध और अन्य पशु उत्पाद बिल्कुल नहीं लेने वाले लोगों को बी12 के भरोसेमंद फोर्टिफाइड स्रोत या जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट की आवश्यकता पड़ सकती है। सप्लीमेंट का चुनाव व्यक्तिगत जरूरत और स्वास्थ्य सलाह के आधार पर करें।
खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने में कमी भी जरूरी है। वजन प्रबंधन को केवल इच्छाशक्ति या भोजन की किसी एक आदत से नहीं समझा जा सकता। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की स्थिति भी दिल के जोखिम को प्रभावित करती है। पहले से मधुमेह, गुर्दे या हृदय की बीमारी होने पर भोजन की व्यक्तिगत योजना बनवाएं। छोटे और टिकाऊ बदलाव—जैसे मीठे पेय कम करना, सब्जियां बढ़ाना और नियमित चलना—लंबे समय तक अपनाना अधिक व्यावहारिक होता है।
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