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स्ट्रोक में साढ़े चार घंटे का क्या है महत्व? इलाज के लिए न करें इंतजार
nidhi
28 Oct 2026 11:20 AM IST

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लाइफस्टाइल : ब्रेन स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें इलाज शुरू होने का समय मरीज के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकता है। अचानक चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ-पैर में कमजोरी या बोलने में परेशानी दिखाई दे, तो लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाएं। समय पर उपचार मस्तिष्क को होने वाले नुकसान और लंबे समय की विकलांगता का जोखिम कम कर सकता है। गंभीर मामलों में यह जान बचाने में भी मदद करता है।
स्ट्रोक में हर मिनट क्यों महत्वपूर्ण है?
स्ट्रोक मुख्यतः दो प्रकार का होता है। इस्कीमिक स्ट्रोक में खून का थक्का मस्तिष्क की रक्तवाहिका को बंद कर देता है। हेमरेजिक स्ट्रोक में रक्तवाहिका फटने से रक्तस्राव होता है। दोनों स्थितियों का उपचार अलग है। बंद रक्तवाहिका वाले स्ट्रोक में जल्दी रक्त प्रवाह बहाल करना उपचार का प्रमुख उद्देश्य होता है, ताकि मस्तिष्क की क्षति सीमित रहे। इसी वजह से लक्षण शुरू होते ही अस्पताल पहुंचना जरूरी है। घर पर यह पहचानने की कोशिश में समय नहीं गंवाना चाहिए कि स्ट्रोक किस प्रकार का है।
मस्तिष्क को हुई क्षति व्यक्ति की बोलने, चलने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित कर सकती है। कुछ मरीजों को लंबे समय तक दूसरों की सहायता की जरूरत पड़ती है। हालांकि, हर मरीज की स्थिति और सुधार की संभावना अलग होती है। नुकसान की गंभीरता, प्रभावित हिस्से और उपलब्ध उपचार सहित कई बातें परिणाम तय करती हैं। इसलिए तुरंत मदद लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी मरीज के ठीक होने या स्थायी विकलांगता के बारे में बिना जांच निश्चित निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
इन लक्षणों को पहचानें
स्ट्रोक की पहचान के लिए FAST तरीका उपयोगी है। इसमें चेहरे की असमान मुस्कान, एक हाथ की कमजोरी और लड़खड़ाती आवाज पर ध्यान दिया जाता है। व्यक्ति से मुस्कुराने, दोनों हाथ उठाने और एक आसान वाक्य दोहराने को कहा जा सकता है। इनमें परेशानी दिखे, तो तत्काल सहायता बुलाएं। जांचने में लंबा समय न लगाएं। लक्षण शुरू होने का समय नोट करना भी जरूरी है, क्योंकि इसी जानकारी के आधार पर डॉक्टर उपचार के विकल्पों का आकलन करते हैं।
चेहरे और आवाज के अलावा अचानक नजर धुंधली होना, एक या दोनों आंखों से देखने में परेशानी, शरीर के एक तरफ सुन्नपन, संतुलन बिगड़ना या बिना स्पष्ट कारण बहुत तेज सिरदर्द भी चेतावनी हो सकता है। सभी लक्षण एक साथ दिखाई देना जरूरी नहीं है। कोई संकेत कुछ मिनट बाद समाप्त हो जाए, तब भी आपात जांच कराएं। यह टीआईए यानी मस्तिष्क में रक्त प्रवाह के अस्थायी अवरोध का संकेत हो सकता है, जो आगे बड़े स्ट्रोक की चेतावनी बन सकता है।
इलाज के लिए कितना समय मिलता है?
इस्कीमिक स्ट्रोक के उपयुक्त मरीजों में थक्का घोलने की दवा सामान्यतः लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर दी जा सकती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि अस्पताल जाने के लिए इतना समय उपलब्ध समझकर इंतजार किया जाए। जांच, स्कैन और उपचार की पात्रता तय करने में भी समय लगता है। दवा सभी मरीजों के लिए सुरक्षित या उपयुक्त नहीं होती। उपचार जितनी जल्दी संभव हो, उतनी जल्दी शुरू करने पर जोर दिया जाता है।
कुछ चयनित मरीजों में विशेष इमेजिंग के आधार पर साढ़े चार घंटे के बाद भी थक्का घोलने वाले उपचार पर विचार किया जा सकता है। बड़ी रक्तवाहिका में थक्का होने पर पात्र मरीजों को मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी से लाभ मिल सकता है। इसमें कैथेटर की सहायता से थक्का निकाला जाता है। कुछ मामलों में यह प्रक्रिया लक्षण शुरू होने के 24 घंटे तक की जा सकती है। पात्रता डॉक्टर तय करते हैं; समय निकल गया समझकर अस्पताल जाना छोड़ना गलत होगा।
सुबह उठते ही स्ट्रोक के लक्षण दिखें और शुरुआत का सही समय मालूम न हो, तब भी तुरंत अस्पताल जाएं। परिजन डॉक्टर को बताएं कि मरीज आखिरी बार कब सामान्य देखा गया था। उदाहरण के लिए, सोने से पहले व्यक्ति सामान्य था और सुबह कमजोरी दिखी, तो दोनों समय की जानकारी उपयोगी होगी। अज्ञात शुरुआत वाले कुछ मामलों में भी जांच के आधार पर उपचार संभव हो सकता है। इसलिए सही समय न पता होना सहायता लेने में देरी का कारण नहीं बनना चाहिए।
मदद आने तक क्या करें?
भारत में 112 पर फोन करके चिकित्सा सहायता मांगें और स्ट्रोक की आशंका स्पष्ट बताएं। मरीज को खुद वाहन चलाने न दें। एंबुलेंस के जरिए पहुंचने पर रास्ते में निगरानी और अस्पताल को पहले सूचना देने की सुविधा मिल सकती है। लक्षणों का समय, पहले से चल रही बीमारियों और दवाओं की जानकारी तैयार रखें, लेकिन कागजात जुटाने में अस्पताल पहुंचने में देरी न करें।
मरीज को कुछ खाने-पीने को न दें। स्ट्रोक में निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अपनी तरफ से एस्पिरिन, खून पतला करने वाली या दूसरी दवा भी न दें। रक्तस्राव वाले स्ट्रोक में एस्पिरिन नुकसान बढ़ा सकती है। मरीज को सुरक्षित और आरामदायक स्थिति में रखें तथा कमजोर हाथ-पैर को खींचकर न उठाएं। यदि वह बेहोश हो जाए या सामान्य सांस न ले रहा हो, तो तुरंत आपातकालीन कर्मचारी को बताएं और उनके निर्देशों का पालन करें।
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