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लाइफ स्टाइल
बच्चे के जन्म के बाद अवसाद से डेयरी उद्योग के लिए क्या खास है?
Ratna Netam
23 Aug 2026 9:01 PM IST

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लाइफ स्टाइल : मां बनना किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत अनुभव होता है, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद नई मां के जीवन में कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। नवजात बच्चे की देखभाल, नींद की कमी, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और नई जिम्मेदारियों के कारण कई बार मां तनाव, थकान और भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस कर सकती है। ऐसे में कई विशेषज्ञ मानसिक शांति और सकारात्मक सोच के लिए मेडिटेशन यानी ध्यान को लाभकारी मानते हैं।
इसी विषय को लेकर एक बच्चों की डॉक्टर ने गुरुदेव से सवाल किया कि क्या नई मां के लिए मेडिटेशन वास्तव में फायदेमंद साबित हो सकता है? इस सवाल के जवाब में गुरुदेव ने बताया कि ध्यान केवल मन को शांत करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपनी भावनाओं को समझने और संतुलित करने में भी मदद करता है।
गुरुदेव ने कहा कि मां बनने के बाद महिला का पूरा जीवन बदल जाता है। बच्चे की जरूरतों को पूरा करते-करते कई बार मां खुद की भावनाओं और स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती है। ऐसे समय में कुछ समय अपने लिए निकालना जरूरी है। मेडिटेशन नई मां को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और तनाव कम करने में सहायता कर सकता है।
उन्होंने बताया कि ध्यान करने से मन में सकारात्मक विचार बढ़ते हैं और चिंता कम हो सकती है। जब मां मानसिक रूप से शांत और खुश रहती है तो उसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ता है। बच्चे मां की भावनाओं और व्यवहार से बहुत प्रभावित होते हैं। इसलिए मां का मानसिक स्वास्थ्य भी बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है।
हालांकि, गुरुदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिटेशन किसी भी बीमारी का इलाज नहीं है। अगर नई मां को अत्यधिक तनाव, उदासी, चिंता या किसी अन्य मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। ध्यान को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इसे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
बच्चों के डॉक्टर ने भी इस बात को समझते हुए कहा कि नवजात शिशु की देखभाल के दौरान मां का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। कई बार परिवार में सभी लोग बच्चे की चिंता करते हैं, लेकिन मां की जरूरतों पर उतना ध्यान नहीं दे पाते। इसलिए नई मां को आराम, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद और भावनात्मक सहयोग मिलना आवश्यक है।
मेडिटेशन शुरू करने के लिए नई मां को ज्यादा समय निकालने की जरूरत नहीं होती। शुरुआत में रोजाना कुछ मिनट शांत बैठकर गहरी सांस लेने और अपने विचारों को नियंत्रित करने का अभ्यास किया जा सकता है। धीरे-धीरे इसे नियमित आदत बनाया जा सकता है।
इसके अलावा नई मां के लिए हल्का व्यायाम, परिवार का सहयोग, पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार भी बहुत जरूरी है। बच्चे की देखभाल के साथ-साथ खुद की देखभाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि प्रसव के बाद महिलाओं को केवल शारीरिक आराम ही नहीं बल्कि मानसिक सहारे की भी जरूरत होती है। मेडिटेशन इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।
गुरुदेव के अनुसार, एक शांत और संतुलित मन वाली मां अपने बच्चे के साथ बेहतर जुड़ाव महसूस कर सकती है। ध्यान के जरिए महिला अपने भीतर की ऊर्जा और आत्मविश्वास को मजबूत कर सकती है। हालांकि हर मां की स्थिति अलग होती है, इसलिए अपनी जरूरत और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी अभ्यास अपनाना चाहिए।
नई मां के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वह खुद को समय दे और यह समझे कि बच्चे की देखभाल के साथ उसका अपना स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मेडिटेशन, परिवार का सहयोग और सही जीवनशैली मिलकर मां और बच्चे दोनों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर सकते हैं।
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