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बेवजह उदासी और चिंता का मतलब क्या है? जानिए इसके पीछे की वजहें

Saba Naaz
15 Jun 2025 9:51 PM IST
बेवजह उदासी और चिंता का मतलब क्या है? जानिए इसके पीछे की वजहें
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Lifestyle लाइफस्टाइल : उदासी हो या खुशी ये दोनों हमारी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं हैं, जिनसे हमारे मूड का पता चलता है। किसी दुख, चिंता में मन उदास हो जाता है, वहीं अपनों से मिलने, सफलता प्राप्त होने पर खुशी का एहसास होता है। पर कई बार हमारा मन बिना किस कारण के भी उदास महसूस करने लगता है। आखिर ऐसा क्यों होता है?
जब हम परेशान होते हैं या किसी विषय पर अत्यधिक सोचने लगते हैं तो कई बार उदास महसूस करते हैं। इस हालत में ओवर थिंकिंग हो सकती है, जो चिंता और तनाव का कारण भी बन सकती है। लेकिन कई बार उदासी बेवजह भी हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। बिना कारण हर वक्त उदास रहना अवसाद के कारण भी हो सकता है। अगर यह समस्या दो सप्ताह से ज्यादा बनी रहती है तो यह गंभीर मानसिक स्थिति का रूप ले सकती है।
रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स में बदलाव आने से भी दिनभर उदासी हो सकती है, ऐसा ज्यादातर महिलाओं में होता है। कई बार लोग कुछ ऐसी परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं, जिनका समाधान उनके पास भी नहीं होता है। ऐसे में न चाहते हुए भी उन चीजों के बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगते हैं और परेशान होने लगते हैं। इसका कारण काम का तनाव, किसी करीबी का बीमार होना, रिश्ते से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं
मौसम में बदलाव आने पर भी शरीर पर असर पड़ता है, जिससे जीवनशैली में बदलाव आता है। यह भी बेवजह उदास रहने और मूड बदलने का कारण बन सकता है। वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. एस धनंजय कहते हैं, जब बिना वजह दिल भारी लगे, तो जरूरी है वजह को समझना। डोपामिन और सेरोटोनिन की कमी अक्सर उदासी बने रहना का प्रमुख कारण हो सकता है। ये दो खास ‘फील गुड’ हार्मोन हैं। इनकी कमी से मूड खराब रहता है और लगातार थकावट या दुख का एहसास बना रहता है।
इसके अलावा थायरॉइड की समस्या या हार्मोनल असंतुलन भी आपके मूड को प्रभावित कर सकती है। खासकर महिलाओं में थायरॉइड, पीसीओएस या मेनोपॉज के कारण मूड में उतार-चढ़ाव और उदासी देखी जाती है। अक्सर उदास रहने, काम में मन न लगने या चिंतित रहने के पीछे कई और भी कारण हो सकते हैं जिनके बारे में समझना जरूरी है। नींद की कमी या नींद में अनियमितता के कारण दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता और इसका सीधा असर मूड पर पड़ता है। अध्ययनों में कुछ प्रकार के विटामिन्स जैसे विटामिन-डी और बी12 की कमी को भी आपके मूड को प्रभावित करने वाला पाया गया है।
इसके अलावा बार-बार खुद को दोष देना, भविष्य को लेकर चिंता करना या पुराने अनुभवों को दोहराते रहना भी उदासी को बढ़ाता है। डॉक्टर कहते हैं उदासी की समस्या से बाहर आने के लिए करीबियों से अपनी भावनाएं साझा करें। मनपसंद गाने सुनें या मनपसंद कार्यों में ध्यान लगाएं। समस्या बढ़ने पर मनोवैज्ञानिक से संपर्क जरूर करें। अगर यह उदासी हफ्तों तक लगातार बनी रहती है, तो यह क्लिनिकल डिप्रेशन भी हो सकता है जिसे इलाज की जरूरत होती है, इसे अनदेखा बिल्कुल न करें।
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