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बादाम प्रेमियों के लिए चेतावनी, किडनी स्टोन का हो सकता है रिस्क

Saba Naaz
15 Sept 2025 7:00 PM IST
बादाम प्रेमियों के लिए चेतावनी, किडनी स्टोन का हो सकता है रिस्क
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Lifestyle लाइफस्टाइल : क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रोज मुट्ठी भर बादाम खाकर खुद को सेहतमंद महसूस करते हैं? दरअसल, बादाम को दिमाग तेज करने और शरीर को ताकत देने वाला 'सुपरफूड' माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह सेहत का खजाना आपकी किडनी 'पत्थर' बना सकता है?
जी हां, हाल ही में द अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी ने इस बात का खुलासा किया है कि ज्यादा बादाम खाने से गुर्दे में पथरी बनने का खतरा (Almond Kidney Stone Risk) बढ़ सकता है। आइए जानते हैं कैसे। क्यों बादाम से बढ़ता है पथरी का खतरा?
बादाम पोषक तत्वों का भंडार माने जाते हैं। इनमें फाइबर, विटामिन-ई, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स भरपूर होते हैं। यही कारण है कि इन्हें “सुपरफूड” कहा जाता है, लेकिन इनके भीतर मौजूद ऑक्सलेट नामक तत्व कभी-कभी समस्या पैदा कर सकते हैं। बता दें, जब शरीर में ऑक्सलेट की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो यह कैल्शियम से मिलकर कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल बनाने लगता है। यही क्रिस्टल धीरे-धीरे किडनी स्टोन्स का रूप ले लेता है। अगर कोई व्यक्ति रोजाना बहुत ज्यादा मात्रा में बादाम खाता है, तो उसके यूरिन में ऑक्सलेट लेवल बढ़ सकता है और पथरी बनने का खतरा भी। किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
हर किसी के लिए बादाम खतरनाक नहीं हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें इनका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए, जैसे: जिनकी पहले से किडनी स्टोन की हिस्ट्री रही हो।
जो पर्याप्त पानी नहीं पीते।
जो हाई-प्रोटीन डाइट पर रहते हैं।
जिनके पेट या आंतों की सर्जरी हो चुकी है या जिन्हें इंफ्लेमेट्री बॉवेल डिजीज जैसी समस्याएं हैं।
जिनके शरीर में गट बैक्टीरिया (आंतों के अच्छे जीवाणु) कम हैं, जिससे ऑक्सलेट ज्यादा अवशोषित हो जाता है।
इन स्थितियों में बादाम का ज्यादा सेवन पथरी का खतरा और बढ़ा सकता है।
कितनी मात्रा में खाना है सुरक्षित?
अच्छी खबर यह है कि बादाम को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। संतुलित मात्रा में बादाम खाना फायदेमंद है।
दिन में एक छोटी मुट्ठी (लगभग 6–8 बादाम) ही पर्याप्त मानी जाती है।
खूब पानी पीना जरूरी है ताकि ऑक्सलेट शरीर से बाहर निकल सके।
बादाम को कैल्शियम से भरपूर भोजन (जैसे दही या दूध) के साथ खाने से ऑक्सलेट का असर कम हो सकता है।
भिगोकर या हल्का भूनकर बादाम खाने से भी इनमें मौजूद घुलनशील ऑक्सलेट कुछ हद तक कम हो जाते हैं।
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