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लाइफ स्टाइल
गणेश उत्सव में ट्राई करें देसी मिठास से भरपूर पूरन पोली
Ratna Netam
11 Sept 2026 4:04 PM IST

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लाइफ स्टाइ : गणेश चतुर्थी का त्योहार आते ही घरों में भगवान गणेश के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पूजा-पाठ और सजावट के साथ इस पर्व पर बनने वाले पारंपरिक पकवानों का भी खास महत्व है। मोदक के अलावा महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के दौरान कई पारंपरिक मिठाइयां और व्यंजन बनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है स्वादिष्ट **पूरन पोली**। चने की दाल, गुड़ और इलायची की खुशबू से तैयार होने वाली पूरन पोली खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है और इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है।
पूरन पोली देखने में सामान्य रोटी या पराठे जैसी लग सकती है, लेकिन इसके अंदर भरी मीठी दाल की स्टफिंग इसे खास बनाती है। महाराष्ट्र के अलावा गुजरात, कर्नाटक और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी इसके अलग-अलग रूप लोकप्रिय हैं। कहीं इसे पूरन पोली कहा जाता है तो कहीं होलिगे, ओब्बट्टू या बोब्बट्लू जैसे नामों से जाना जाता है।
गणेश चतुर्थी पर अगर आप भी घर आए मेहमानों और परिवार के सदस्यों को पारंपरिक महाराष्ट्रीयन स्वाद देना चाहते हैं तो चने की दाल और गुड़ वाली पूरन पोली बना सकते हैं।
पूरन पोली बनाने के लिए सामग्री
पूरन पोली बनाने के लिए सबसे पहले सभी जरूरी सामग्री तैयार कर लें। लगभग 8 से 10 पूरन पोली बनाने के लिए आपको इन चीजों की जरूरत होगी।
**पूरन यानी स्टफिंग के लिए:**
* चना दाल – 1 कप
* गुड़ – 1 से 1¼ कप
* इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
* जायफल पाउडर – एक चुटकी
* घी – 1 छोटा चम्मच
* पानी – जरूरत के अनुसार
**आटा तैयार करने के लिए:**
* गेहूं का आटा – 1½ कप
* मैदा – ½ कप, वैकल्पिक
* हल्दी – एक छोटी चुटकी, वैकल्पिक
* नमक – एक चुटकी
* तेल या घी – 1 से 2 बड़े चम्मच
* पानी – जरूरत के अनुसार
**सेंकने और परोसने के लिए:**
* घी – जरूरत के अनुसार
अगर आप मैदा इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं तो केवल गेहूं के आटे से भी पूरन पोली तैयार की जा सकती है।
पहला स्टेप: चने की दाल पकाएं
सबसे पहले चने की दाल को अच्छी तरह धो लें। इसे लगभग 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखने से दाल जल्दी पक सकती है।
अब दाल को प्रेशर कुकर में डालें और जरूरत के मुताबिक पानी डालकर पकाएं। दाल इतनी पकनी चाहिए कि वह नरम हो जाए, लेकिन उसमें बहुत ज्यादा पानी न रहे।
अगर दाल पकने के बाद अतिरिक्त पानी बचा है तो उसे छान लें। इस पानी को फेंकने की जरूरत नहीं है। महाराष्ट्र में दाल के इस पानी से पारंपरिक 'कटाची आमटी' भी बनाई जाती है।
अब पकी हुई दाल को थोड़ा ठंडा होने दें।
दूसरा स्टेप: गुड़ के साथ तैयार करें पूरन
एक मोटे तले वाली कड़ाही लें। इसमें पकी हुई चना दाल और गुड़ डालें।
गैस को धीमी से मध्यम आंच पर रखें। जैसे-जैसे गुड़ गर्म होगा वह पिघलने लगेगा और दाल के साथ मिल जाएगा।
इस मिश्रण को लगातार चलाते रहें ताकि वह कड़ाही के नीचे चिपके नहीं।
शुरुआत में मिश्रण थोड़ा पतला दिखाई देगा क्योंकि गुड़ पिघलने के बाद नमी छोड़ेगा। लेकिन कुछ देर पकाने पर यह धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगेगा।
जब मिश्रण इतना गाढ़ा हो जाए कि उसे आसानी से स्टफिंग के रूप में इस्तेमाल किया जा सके तो गैस धीमी कर दें।
अब इसमें इलायची पाउडर और एक चुटकी जायफल पाउडर मिलाएं।
यही मीठा मिश्रण 'पूरन' कहलाता है।
पूरन को बिल्कुल मुलायम कैसे बनाएं?
पारंपरिक पूरन पोली की सबसे बड़ी खासियत उसकी मुलायम और बिना दानों वाली स्टफिंग है।
इसके लिए तैयार दाल-गुड़ के मिश्रण को पूरन यंत्र से निकाला जाता है। अगर आपके पास पूरन यंत्र नहीं है तो मिश्रण को अच्छी तरह मैश किया जा सकता है।
आप इसे छलनी से दबाकर भी मुलायम कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि मिश्रण बहुत गर्म न हो।
तैयार पूरन को पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडा होने पर यह और गाढ़ा हो जाएगा और इसकी छोटी-छोटी लोइयां आसानी से बनाई जा सकेंगी।
तीसरा स्टेप: पोली का आटा तैयार करें
अब एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा और चाहें तो मैदा डालें। इसमें एक चुटकी नमक और थोड़ा तेल या घी डालें।
धीरे-धीरे पानी डालकर मुलायम आटा गूंध लें।
पूरन पोली का आटा सामान्य रोटी के आटे की तुलना में थोड़ा ज्यादा नरम रखा जाता है। इससे स्टफिंग भरने के बाद इसे बेलना आसान होता है।
आटे के ऊपर थोड़ा तेल लगाएं और इसे ढककर लगभग 20 से 30 मिनट आराम करने दें।
इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाएगा और पूरन पोली बेलते समय फटने की संभावना कम होगी।
चौथा स्टेप: पूरन भरें
अब आटे की एक मध्यम आकार की लोई लें और उसे हाथ से थोड़ा फैलाएं।
बीच में तैयार पूरन की एक लोई रखें। कोशिश करें कि स्टफिंग पर्याप्त मात्रा में हो। अच्छी पूरन पोली में अंदर मीठा पूरन भरपूर रहता है।
अब आटे को चारों तरफ से उठाकर स्टफिंग को पूरी तरह बंद कर दें।
अतिरिक्त आटा हो तो उसे हल्के हाथ से हटा सकते हैं।
लोई को हथेली से थोड़ा चपटा करें और सूखे आटे की मदद से धीरे-धीरे बेलना शुरू करें।
बेलते समय रखें ये सावधानी
पूरन पोली बेलने का सबसे महत्वपूर्ण नियम है कि बहुत ज्यादा दबाव न डालें।
अगर बेलन से जोर लगाया गया तो अंदर की स्टफिंग बाहर निकल सकती है। इसलिए लोई को बीच से किनारों की तरफ हल्के हाथ से बेलें।
इसे सामान्य रोटी के आकार में बेल सकते हैं।
अगर पहली बार बना रहे हैं तो शुरुआत में छोटी पूरन पोली बनाना आसान रहेगा। अभ्यास होने के बाद बड़ी और पतली पूरन पोली भी आसानी से तैयार की जा सकती है।
पांचवां स्टेप: तवे पर सेंकें
तवा मध्यम आंच पर गर्म करें। बेली हुई पूरन पोली को सावधानी से तवे पर डालें।
एक तरफ हल्के बुलबुले दिखाई देने लगें तो इसे पलट दें।
अब दूसरी तरफ हल्के सुनहरे धब्बे आने तक सेंकें। फिर जरूरत के मुताबिक थोड़ा घी लगाएं और दोनों तरफ से अच्छी तरह सेंक लें।
पूरन पोली को बहुत तेज आंच पर न सेंकें, क्योंकि इससे बाहर का हिस्सा जल्दी जल सकता है जबकि अंदर का आटा ठीक से नहीं पकेगा।
तैयार पूरन पोली को प्लेट में निकालें और ऊपर से थोड़ा घी डालकर गर्मागर्म परोसें।
किसके साथ परोसें पूरन पोली?
महाराष्ट्र में पूरन पोली को कई अलग-अलग तरीकों से परोसा जाता है। गर्म पूरन पोली के ऊपर एक चम्मच देसी घी डालना सबसे लोकप्रिय तरीका है।
इसे दूध के साथ भी खाया जा सकता है। कुछ घरों में पूरन पोली के साथ कटाची आमटी परोसी जाती है, जो चना दाल पकाने के बाद बचे पानी से तैयार की जाती है।
कई लोग इसे घी और गर्म दूध के साथ खाना पसंद करते हैं।
मीठी पूरन पोली और मसालेदार आमटी का कॉम्बिनेशन भी बेहद लोकप्रिय है।
गुड़ कितना डालें?
गुड़ की मात्रा स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है। आमतौर पर एक कप चना दाल में करीब एक कप गुड़ पर्याप्त होता है।
अगर ज्यादा मीठा पसंद है तो मात्रा थोड़ी बढ़ाई जा सकती है।
गुड़ डालते समय ध्यान रखें कि अलग-अलग प्रकार के गुड़ में मिठास अलग हो सकती है। इसलिए पहली बार थोड़ी कम मात्रा डालकर स्वाद देखना बेहतर है।
पूरन पोली फटने से कैसे बचाएं?
अगर आपकी पूरन पोली बेलते समय बार-बार फट रही है तो इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं।
पहला, आटा ज्यादा सख्त है। दूसरा, पूरन में ज्यादा नमी है। तीसरा, बेलते समय जरूरत से ज्यादा दबाव लगाया जा रहा है।
आटा मुलायम रखें और पूरन को अच्छी तरह गाढ़ा होने तक पकाएं। स्टफिंग पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही भरें।
इसके बाद हल्के हाथ से बेलेंगे तो पूरन पोली आसानी से तैयार हो जाएगी।
पहले से बनाकर रख सकते हैं पूरन
अगर गणेश चतुर्थी के दिन मेहमान आने वाले हैं तो पूरन एक दिन पहले भी तैयार किया जा सकता है।
इसे ठंडा करके एयरटाइट डिब्बे में फ्रिज में रखें। अगले दिन इस्तेमाल से पहले कमरे के तापमान के करीब आने दें।
इससे त्योहार के दिन आपका काफी समय बच जाएगा और आपको केवल आटा तैयार करके पूरन पोली बेलनी और सेंकनी होगी।
गणेश उत्सव पर पारंपरिक स्वाद
गणेश चतुर्थी पर मोदक भगवान गणेश से सबसे ज्यादा जुड़ा प्रसाद माना जाता है, लेकिन महाराष्ट्र के घरों में पूरन पोली जैसे पारंपरिक व्यंजन भी त्योहार की थाली को खास बनाते हैं।
चना दाल से मिलने वाला स्वाद, गुड़ की मिठास, इलायची-जायफल की खुशबू और ऊपर से डाला गया घी—इन सबका मेल पूरन पोली को साधारण मीठी रोटी से बिल्कुल अलग बनाता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत महंगी या मुश्किल से मिलने वाली सामग्री की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद चना दाल, गुड़ और आटे से ही शानदार पारंपरिक मिठाई तैयार की जा सकती है।
तो इस गणेश चतुर्थी अगर आप मोदक के साथ कुछ अलग बनाना चाहते हैं तो महाराष्ट्र की फेमस पूरन पोली जरूर ट्राई करें। बस पूरन को सही गाढ़ापन दें, आटा मुलायम रखें और पोली को हल्के हाथ से बेलें। ऊपर से देसी घी डालकर गर्मागर्म परोसेंगे तो त्योहार का स्वाद और भी खास हो जाएगा।
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