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लाइफ स्टाइल
Cigarettes से ज्यादा खतरनाक तंबाकू: स्टडी में हुआ खुलासा, तेजी से बढ़ाता है कैंसर का खतरा
Harrison
10 Oct 2025 7:43 PM IST

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Lifestyle,लाइफस्टाइल: धूम्रपान यानी सिगरेट को अब तक कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक वैज्ञानिक स्टडी ने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया है। इस रिसर्च के मुताबिक, तंबाकू (जैसे गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला) सिगरेट की तुलना में कैंसर का खतरा कहीं अधिक तेजी से बढ़ाता है।
यह अध्ययन भारत समेत उन देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां तंबाकू का सेवन धूम्रपान से अधिक प्रचलित है। भारत में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और युवाओं में माउथ फ्रेशनर के नाम पर खाए जा रहे तंबाकू उत्पाद शरीर को खतरनाक बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं।
स्टडी में क्या सामने आया?
AIIMS (All India Institute of Medical Sciences) और ICMR (Indian Council of Medical Research) की संयुक्त स्टडी में यह साफ हुआ कि:
तंबाकू चबाने वालों में मुंह का कैंसर (Oral Cancer) होने की आशंका धूम्रपान करने वालों से 3 गुना ज्यादा होती है।
केवल सिगरेट पीने वालों में फेफड़ों का कैंसर अधिक होता है, लेकिन तंबाकू सेवन करने वालों में मुंह, गले, जीभ, होंठ और अन्ननली के कैंसर के मामले काफी अधिक देखे गए हैं। तंबाकू में मौजूद नाइट्रोसामाइंस और कार्सिनोजेनिक रसायन शरीर के ऊतकों को तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं।
तंबाकू सेवन के तरीके और उनसे जुड़े खतरे
तंबाकू कई रूपों में प्रयोग किया जाता है, और हर रूप अपने साथ गंभीर खतरे लेकर आता है:
गुटखा / पान मसाला
सबसे अधिक मुंह और गले के कैंसर के मामले इन्हीं उत्पादों से जुड़े होते हैं।
इसमें मिलाए जाने वाले स्लेक्ड लाइम, सुपारी और फ्लेवरिंग एजेंट भी कैंसरकारी होते हैं।
खैनी (सादा तंबाकू)
होंठों के नीचे रखने से कैंसर की कोशिकाएं सीधे उत्पन्न हो सकती हैं।
यह निकोटीन की लत बहुत जल्दी लगाता है।
जर्दा / मावा
जीभ और मसूड़ों पर सीधा प्रभाव डालता है, जिससे प्री-कैंसरस लक्षण जल्द दिखने लगते हैं।
भारत में तंबाकू से जुड़े कैंसर के आंकड़े
भारत में हर साल कैंसर से मरने वाले लोगों में से करीब 40% लोग तंबाकू से संबंधित कैंसर के शिकार होते हैं।
मुंह का कैंसर भारत में पुरुषों के बीच सबसे आम कैंसर बन गया है, और इसका मुख्य कारण तंबाकू चबाना है।
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 26 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं।
तंबाकू और शरीर पर असर
तंबाकू में मौजूद निकोटीन, बेंजोपीरीन, और नाइट्रोसामाइंस जैसे रसायन डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं।
यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है और कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने का अनुकूल माहौल देता है।
साथ ही यह दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, और सांस की बीमारियों का भी प्रमुख कारण है।
विशेषज्ञों की राय
AIIMS के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव गुप्ता के अनुसार:
“तंबाकू उत्पादों को सुरक्षित मानने की मानसिकता बहुत खतरनाक है। लोग सोचते हैं कि सिगरेट न पीकर गुटखा खाना सुरक्षित है, जबकि वैज्ञानिक रूप से यह कहीं अधिक खतरनाक साबित हो चुका है।”
रोकथाम और सावधानी
सरकार द्वारा लगाए गए तंबाकू निषेध कानूनों का पालन करें।
युवाओं को जागरूक करें कि तंबाकू कोई स्टाइल नहीं, मौत की ओर पहला कदम है।
स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों में तंबाकू मुक्त अभियान चलाएं।
निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और परामर्श के ज़रिए तंबाकू की लत छोड़ी जा सकती है।
सिगरेट के मुकाबले तंबाकू को हल्का समझना जानलेवा भूल है। स्टडीज़ अब स्पष्ट कर चुकी हैं कि तंबाकू से जुड़ी आदतें, खासकर चबाने वाले उत्पाद, कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि कर रहे हैं।
अब वक्त है सच का सामना करने और आदतें बदलने का। क्योंकि तंबाकू में कोई स्वाद नहीं — सिर्फ बीमारी, लत और मौत छिपी है।
अगर आप चाहें, तो इस रिपोर्ट को स्वास्थ्य जागरूकता पोस्टर, वीडियो स्क्रिप्ट, या इंफोग्राफिक के रूप में भी तैयार किया जा सकता है। बताइए किस फॉर्मेट में चाहिए?
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