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एग्जाम में Children को टेंशन फ्री और फोन से दूर रखने के लिए एक्सपर्ट ने दी अहम सलाह

Harrison
31 Jan 2026 9:33 PM IST
एग्जाम में Children को टेंशन फ्री और फोन से दूर रखने के लिए एक्सपर्ट ने दी अहम सलाह
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Lifestyle, लाइफस्टाइल : एग्जाम का समय न सिर्फ बच्चों के लिए बल्कि उनके माता-पिता के लिए भी तनावपूर्ण होता है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे परीक्षा के दौरान अत्यधिक दबाव महसूस करते हैं और मोबाइल या सोशल मीडिया पर ध्यान लगाकर पढ़ाई में बाधा डालते हैं। इस दौरान माता-पिता की भूमिका बेहद अहम होती है। मनोवैज्ञानिक और एजुकेशन एक्सपर्ट्स ने बच्चों को तनाव मुक्त रखने और फोन से दूर रखने के लिए कई टिप्स दिए हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चों को एग्जाम के समय टेंशन फ्री रखने का सबसे पहला तरीका है एक सकारात्मक और सपोर्टिव माहौल तैयार करना। घर में लगातार डराने या दबाव डालने की बजाय माता-पिता को बच्चों की मेहनत की तारीफ करनी चाहिए और उन्हें भरोसा देना चाहिए कि वे अपनी पूरी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन करेंगे। लगातार यह कहना कि “तुम फेल मत होना” या “अच्छा मार्क्स लाओ” बच्चे पर दबाव बढ़ा सकता है और उनका तनाव बढ़ा सकता है।
फोन से दूर रखने के लिए रणनीति: एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बच्चों को सीधे फोन को छीनने या लगातार डांटने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करना और पढ़ाई के लिए एक शेड्यूल तैयार करना बेहतर होता है। इसके लिए घर में एक पढ़ाई का साइलेंट एरिया बनाना उपयोगी है, जहां बच्चे बिना डिस्टर्बेंस के पढ़ सकें और फोन या अन्य गैजेट्स बाहर रखे जाएँ।
इसके साथ ही, माता-पिता को यह समझना चाहिए कि मोबाइल पूरी तरह से बैन करना जरूरी नहीं। बल्कि उसे नियंत्रित करना और केवल जरूरी समय पर इस्तेमाल की अनुमति देना ज्यादा असरदार होता है। उदाहरण के लिए, पढ़ाई के दौरान बच्चे का फोन दूसरे कमरे में रखा जा सकता है या फ़ोन पर केवल शैक्षणिक एप्स की अनुमति दी जा सकती है।
एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि बच्चों की रूटीन और टाइम मैनेजमेंट में मदद करना भी तनाव कम करता है। बच्चों को पढ़ाई, ब्रेक और नींद के लिए निश्चित समय दें। छोटे-छोटे ब्रेक्स के दौरान थोड़ी एक्टिविटी या हल्की स्ट्रेचिंग उन्हें फ्रेश महसूस कराती है। इसके अलावा, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि बच्चों के लिए रिलैक्सेशन और माइंडफुलनेस तकनीकें भी कारगर साबित होती हैं। एग्जाम से पहले हल्की एक्सरसाइज, गहरी सांस लेना या शॉर्ट मेडिटेशन बच्चों के दिमाग को शांत करता है और उनके तनाव को कम करता है। माता-पिता खुद भी इस समय शांत रहें, क्योंकि बच्चों को माता-पिता के तनाव का असर तुरंत महसूस होता है।
कम्युनिकेशन की अहमियत: बच्चों से खुलकर बात करना और उनकी चिंता सुनना बेहद जरूरी है। यदि बच्चे पढ़ाई या एग्जाम को लेकर परेशान हैं, तो माता-पिता को उन्हें समझना चाहिए और समाधान खोजने में मदद करनी चाहिए। बच्चों को यह भरोसा देना कि कोई भी परिस्थिति में उनका समर्थन है, उनकी मानसिक स्थिरता को बनाए रखने में मदद करता है।
अंत में, एक्सपर्ट्स का कहना है कि एग्जाम के समय माता-पिता का रियलिस्टिक और पॉजिटिव अप्रोच बच्चों को टेंशन फ्री रखने और फोन से दूर रखने में सबसे बड़ा सहारा बनता है। बच्चे जब माता-पिता से समर्थन और समझदारी महसूस करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बिना तनाव के अपनी पूरी क्षमता से परीक्षा में प्रदर्शन कर पाते हैं।
एग्जाम में बच्चों को टेंशन फ्री और फोन से दूर रखने के लिए माता-पिता को सकारात्मक माहौल बनाना, स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना, पढ़ाई के लिए साइलेंट स्पेस तैयार करना, नियमित रूटीन और ब्रेक्स देना, माइंडफुलनेस तकनीक अपनाना और बच्चों से खुलकर संवाद करना चाहिए। ये छोटे-छोटे कदम बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई की सफलता दोनों के लिए अहम साबित होते हैं।
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