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मौसमी बीमारी से बचने के ल‍िए पीएं पपीते का जूस, डेंगू मलेरिया जैसी बीमार‍ियां रहेंगी कोसों दूर

Neha Dani
18 July 2022 10:48 AM GMT
मौसमी बीमारी से बचने के ल‍िए पीएं पपीते का जूस, डेंगू मलेरिया जैसी बीमार‍ियां रहेंगी कोसों दूर
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वायरल फीवर से बचाव में मदद करता है और बरसात में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाता है।

देश में इन दिनों मानसूनी बारिश का दौर चल रहा है। मानसून में आसमान से बरसते पानी से गर्मी से राहत भले मिलती हो लेकिन इसी खूबसूरत मानसून का एक पहलू और भी है जो थोड़ा बहुत डराने वाला है। जो मौसमी बीमारियों के रूप में सामने आता है, जिनका समय रहते निदान करना बहुत जरूरी है।

वैसे तो ऐसी कई सारी चीजें है जो आपको मौसमी बीमारियों से लड़ने की ताकत देती है। लेकिन पपीते के पत्ते का जूस, उन बीमारियों में किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं, जो आपकी इम्यूनिटी को बुरी तरह प्रभावित करते है। पपीते के पत्तों में विटामिन ए, सी, ई, के, बी और कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और आयरन जैसे मिनरल्स होते हैं जो कि इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और संक्रामक बीमारियों से बचाते हैं। तो आइए जानते है बारिश के मौसम में किस तरह की बीमारियों में पपीते के पत्ते का जूस औषधी के रूप में काम करता है।

डेंगू
डेंगू को बारिश के मौसम में होने वाली सबसे आम बीमारियों में से एक कहा जा सकता है। डेंगू संक्रमित एडीज मच्छरों के कारण होता है, जो इस बीमारी को हमारे खून में पहुंचाते हैं। इससे डेंगू बुखार होता है जो कि खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम कर देता है। ऐसी स्थिति में यदि पेशेंट को पपीते के पत्ते का जूस दिया जाए तो प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ जाते है। और पेशेंट कुछ ही दिनों में बेहतर महसूस करने लगता है।

मलेरिया
पपीते के पत्तों से बना जूस एंटी ऐसे गुणों से भरपूर होता है जो बारिश के मौसम में मलेरिया से बचाव करने में मदद करता है। दरअसल, पपीते के पत्ते में पाया जाने वाला एक यौगिक एसिटोजिनिन होता है, जो मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी को रोकने में मदद कर सकता है। इसलिए बारिश में मलेरिया के बचाव के लिए पपीते के पत्ते का जूस जरुर पिएं।

वायरल फीवर
बारिश के मौसम में वायरल फीवर होना आम परेशानी है। जो लो इम्यूनिटी के कारण होता है। तो अगर आप किसी इम्यूनिटी बूस्टर की तलाश में है, तो पपीते के पत्तों से बना जूस आपके लिए बेस्ट ऑप्शन होगा। दरअसल, ये एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है जो कि वायरल फीवर से बचाव में मदद करता है और बरसात में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाता है।


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