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हरियाणा की शादियों का सदाबहार लोकगीत
लाइफस्टाइल : हरियाणा की शादियों में ढोलक की थाप, महिलाओं की सामूहिक गायकी और देसी अंदाज का अपना अलग ही रंग होता है। आधुनिक दौर में डीजे और नए गानों की धूम बढ़ी है, लेकिन कुछ पारंपरिक लोकगीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। ऐसा ही एक गीत है 'मेरा नौ डांडी का बीजणा...', जिसे हरियाणा के साथ-साथ राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में शादी-ब्याह और महिला संगीत के दौरान गाया जाता है। इसकी खासियत इसके ठेठ देसी बोल और पारंपरिक अंदाज में छिपी है।
महिला संगीत की रौनक है यह लोकगीत
हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में शादी-ब्याह केवल विवाह की रस्मों तक सीमित नहीं रहे हैं। इनके साथ लोकगीतों और सामूहिक गायन की लंबी परंपरा जुड़ी हुई है। शादी के दिनों में घर की महिलाएं और आसपास की रिश्तेदारें एक जगह जुटती हैं। ढोलक की थाप के साथ गीत गाए जाते हैं और हंसी-मजाक के बीच शादी का माहौल जीवंत हो उठता है। इसी महिला संगीत में 'मेरा नौ डांडी का बीजणा' जैसे गीतों की खास जगह रही है। गीत के बोल और उसकी धुन सुनने वालों को ग्रामीण जीवन और पारंपरिक शादी समारोहों की याद दिलाते हैं। कई जगह इसे महिलाएं खुद गाती हैं, जबकि अब इसके रिकॉर्डेड और डीजे वाले संस्करण भी सुनाई देते हैं।
क्या है 'नौ डांडी का बीजणा' का मतलब?
इस लोकगीत को समझने के लिए इसके देसी शब्दों का अर्थ जानना जरूरी है। यहां 'बीजणा' हाथ से हवा करने वाले पारंपरिक पंखे के लिए इस्तेमाल किया गया है। गीत में घरेलू जीवन, ससुराल और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी बातें देसी अंदाज में सामने आती हैं। इसके बोलों में लोकजीवन की सहजता और महिलाओं के बीच होने वाली चुहल की झलक मिलती है। हरियाणवी लोकगीतों की खासियत यही रही है कि उनमें रोजमर्रा की जिंदगी को मनोरंजक अंदाज में पिरोया जाता है। घरेलू सामान, रिश्तेदारों की नोकझोंक, शादी की रस्में और नई दुल्हन के अनुभव जैसे विषय इन गीतों का हिस्सा बनते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक गीत केवल मनोरंजन नहीं करते, बल्कि समाज और संस्कृति की झलक भी दिखाते हैं।
लोकगीत से फिल्मों और नए संगीत तक का सफर
'मेरा नौ डांडी का बीजणा' का जिक्र हरियाणवी लोकसंगीत और क्षेत्रीय फिल्मों से जुड़ी चर्चाओं में भी मिलता है। हरियाणवी सिनेमा के पुराने लोकप्रिय गीतों में इसे गिना जाता है। समय के साथ अलग-अलग गायकों ने इसे अपनी शैली में प्रस्तुत किया और इसकी धुन नए श्रोताओं तक पहुंचती रही।
आज इंटरनेट पर इस गीत के कई संस्करण उपलब्ध हैं। गायिका सिमरन राठौड़ के नाम से प्रकाशित एक संस्करण 2022 में सामने आया था, जबकि हरियाणवी लोकगीत चंदा के चैनल पर पूजा दीवाकर की आवाज में इसका एक और संस्करण सितंबर 2024 में प्रकाशित किया गया। इससे पता चलता है कि इस पारंपरिक गीत को नए रिकॉर्डिंग प्रारूपों में भी प्रस्तुत किया जा रहा है। पुराने लोकगीतों को नए संगीत के साथ पेश करने का एक फायदा यह है कि वे नई पीढ़ी के श्रोताओं तक पहुंचते हैं। हालांकि, पारंपरिक गायन और आधुनिक रिकॉर्डेड संस्करणों के अनुभव में अंतर रहता है। घरों में ढोलक के साथ बैठकर गाने की सामूहिक परंपरा का अपना अलग महत्व है।
हरियाणा की शादी में लोकगीतों का महत्व
हरियाणा की पारंपरिक शादियों में अलग-अलग रस्मों के लिए अलग तरह के गीत गाने की परंपरा रही है। बन्ना-बन्नी गीत दूल्हा-दुल्हन से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ गीतों में ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों के साथ हंसी-मजाक किया जाता है। विदाई के समय गाए जाने वाले गीतों का भाव अधिक भावुक हो जाता है। इन गीतों के बोल क्षेत्र और परिवार के अनुसार बदल भी सकते हैं। ऐसे आयोजनों में संगीत का हिस्सा केवल गाना सुनना नहीं, बल्कि साथ बैठकर गाना, ताल देना और रिश्तेदारों के साथ समय बिताना भी होता है। यही सामूहिकता पारंपरिक महिला संगीत को विशेष बनाती है। 'मेरा नौ डांडी का बीजणा' जैसे गीत इस सांस्कृतिक माहौल से जुड़े हुए हैं।
नई पीढ़ी में भी बना हुआ है देसी गीतों का आकर्षण
आज शादी समारोहों में बॉलीवुड गीतों, डीजे और आधुनिक हरियाणवी संगीत की लोकप्रियता बढ़ी है। इसके बावजूद पारंपरिक लोकगीतों की पहचान बनी हुई है। सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोग पुराने गीतों के नए संस्करण सुन सकते हैं और उन्हें शादी समारोहों में भी शामिल कर सकते हैं। 'मेरा नौ डांडी का बीजणा' की लोकप्रियता इसी निरंतरता का उदाहरण है। गीत की पहचान उसके देसी बोल, पारंपरिक धुन और शादी के माहौल से जुड़ी है। पीढ़ियों के बीच संगीत की पसंद बदल सकती है, लेकिन लोकगीतों में समाई स्थानीय भाषा और संस्कृति उन्हें अलग पहचान देती है। हरियाणा की लोकसंगीत परंपरा की खूबसूरती इसी में है कि वह बदलते समय के साथ नए रूप अपनाते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है। 'मेरा नौ डांडी का बीजणा' आज भी उस देसी रंग की याद दिलाता है, जिसमें शादी की महफिल केवल संगीत का कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवार और समाज के एक साथ आने का उत्सव होती है।
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