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45 साल की उम्र में त्वचा के डल होने का यह है मुख्य कारण, इस ड्रिंक से मिलेगी मदद

SANTOSI TANDI
14 Aug 2023 7:05 AM GMT
45 साल की उम्र में त्वचा के डल होने का यह है मुख्य कारण, इस ड्रिंक से मिलेगी मदद
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इस ड्रिंक से मिलेगी मदद
उम्र के अनुसार हमारी त्वचा और शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं। एक उम्र के बाद स्किन डल होने लगती है, हड्डियों की मजबूती में भी कमी आ जाती है और भी कई बदलाव होते हैं। बात अगर महिलाओं की करें, तो महिलाओं में 45-50 की उम्र में शरीर में काफी बदलाव आते हैं। मेनोपॉज के वक्त, शरीर में होने वाले हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव के चलते, कई तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं। हार्मोनल लेवल में होने वाले इस अंतर का असर, कई तरह से महिलाओं के शरीर पर पड़ता है। इससे लिवर, हार्ट और स्किन भी प्रभावित हो सकती है।
45 की उम्र में महिलाओं की स्किन डल और ड्राई हो सकती है। इसके पीछे क्या मुख्य कारण है, और इसे दूर करने के लिए किस खास ड्रिंक को डाइट में शामिल करना चाहिए, इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं। यह जानकारी डाइटिशियन मनप्रीत दे रही हैं। मनप्रीत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से न्यूट्रिशन्स में मास्टर्स की है। वह हार्मोन और गट हेल्थ कोच हैं।
45 की उम्र में क्यों आते हैं महिलाओं की स्किन में बदलाव?
45 की उम्र में अक्सर महिलाओं की ड्राई और डल स्किन की समस्या होने लगती है। ऐसा शरीर में एस्ट्रोजन लेवल के कम होने के कारण होता है। हमारी स्किन में एस्ट्रोजन रिसेप्टर लगे होते हैं, जो सीबम के सीक्रेशन में मदद करते हैं। सीबम असल में एक मोम जैसा तेलीय पदार्थ होता है। यह स्किन को प्रोटेक्ट करता है और नमी होता है। डल और ड्राई स्किन को भी यह लंबे समय तक जवां बनाए रखता है। यह कोलेजन (30 की उम्र में क्यों लेना चाहिए कोलेजन) को बनाने में भी मदद करता है। जिससे त्वचा में लचीलापन आता है। इसलिए एस्ट्रोजन लेवल कम होने पर स्किन से जुड़ी दिक्कते होने लगती हैं।
45 की उम्र में महिलाओं को पीनी चाहिए यह एस्ट्रोजन बूस्टिंग ड्रिंक
सामग्री
फ्लैक्स सीड्स पाउडर- 1 टीस्पून
सौंफ- 1 टीस्पून
दालचीनी- 1 चुटकी
पानी- 200 मि.ली
नींबू- आधा
विधि
नींबू के अलावा बाकी चीजों को गुनगुने पानी में मिलाएं।
जब यह ठंडा हो जाए, तो इसमें नींबू डालें।
आपकी ड्रिंक तैयार है।
इसे सुबह के समय पिएं।
एस्ट्रोजन बूस्टिंग ड्रिंक के फायदे
फ्लैक्स सीड्स में फाइटोएस्ट्रोजन होते हैं,जो शरीर में एस्ट्रोजन एक्टिविटी को कंट्रोल करते हैं।
सौंफ के बीजों में एनेथॉल होता है, जो एस्ट्रोजन की तरह की शरीर में असर करता है।
दालचीनी ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है।
नींबू डाइजेस्टिव एंजाइम्स के प्रोडक्शन को बढ़ाता है।
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