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ज्यादा सोचना भी इंसान को कर सकता हैं पागल आइये जानते हैं कैसे

Teja
22 Oct 2021 11:15 AM GMT
ज्यादा सोचना भी इंसान को कर सकता हैं पागल आइये जानते हैं कैसे
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अधिक सोचने से न केवल आपके मन की शांति और आराम करने की क्षमता प्रभावित होती है बल्कि कई अध्‍ययनों में साबित किया गया है कि ज्‍यादा समय तक इस तरह से रहने वाला इंसान अवसाद और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से भी घिर जाता है.

जनता से रिस्ता वेबडेस्क | क्‍या आप भी किसी ऐसी बात को दिमाग में लिए बैठे हैं, जिसे आप भूलना तो चाहते हैं, लेकिन आपको इससे छुटकारा नहीं मिल पा रहा है. आप लाख कोशिशों के बावजूद अपने दिमाग से उन बातों को निकाल नहीं पा रहे जो आपको परेशान कर रही हैं. विशेषज्ञों की मानें तो बार-बार नकारात्‍मक विचारों के एक ही पैटर्न से गुजरने से ज्‍यादा थका देने वाला काम कुछ नहीं है. अधिक सोचने से न केवल आपके मन की शांति और आराम करने की क्षमता प्रभावित होती है बल्कि कई अध्‍ययनों में साबित किया गया है कि ज्‍यादा समय तक इस तरह से रहने वाला इंसान अवसाद और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से भी घिर जाता है.

जब आप अधिक सोच रहे होते हैं तो आपका दिमाग अथक विचारों का एक चक्रव्‍यूह बुन रहा होता है. ये स्थिति का विश्‍लेषण करता है और इंसान खुद को नकारात्‍मक रूप में आंकने लगता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि विचार हमेशा आपको एक बड़ी बात की तरह लगते हैं. ये भले ही ज्‍यादा महत्‍वहीन हों और भले ही इसे आपके दिमाग ने ही बुना हो, लेकिन इन विचारों से बाहर आना आसान नहीं होता है.

अधिक सोचने के कई खतरे हैं और इस समस्या से निजात पाना किसी भी इंसान के लिए बेहद जरूरी है. हालांकि यह वास्तव में एक मनोवैज्ञानिक विकार नहीं है. अधिक सोचने से बच्‍चों को पोस्ट-ट्रमटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्‍या पैदा हो सकती है.

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