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लाइफ स्टाइल
हर माता पिता के काम आएंगी करीना कपूर की ये 3 पैरेंटिंग टिप्स
Ratna Netam
2 Sept 2026 2:07 PM IST

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लाइफ स्टाइल : बच्चों की अच्छी परवरिश केवल उन्हें बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने तक सीमित नहीं होती। बचपन में सिखाई गई छोटी-छोटी आदतें आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और व्यवहार की नींव बनती हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान भी अपने दोनों बेटों तैमूर अली खान और जहांगीर अली खान यानी जेह की परवरिश को लेकर कई बार चर्चा में रही हैं। वह बच्चों को सुविधाओं के साथ अनुशासन, जिम्मेदारी और दूसरों का सम्मान करने जैसी बातें सिखाने पर जोर देती नजर आई हैं।
करीना कपूर और सैफ अली खान के बच्चे अक्सर पैपराजी के कैमरों में दिखाई देते हैं। ग्लैमर से घिरे परिवार में बड़े होने के बावजूद करीना की कोशिश बच्चों को सामान्य जिंदगी की अहमियत समझाने की रही है। उन्होंने अलग-अलग मौकों पर पैरेंटिंग को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उनकी बातों से तीन ऐसी आदतें सामने आती हैं जिन्हें माता-पिता अपने बच्चों की परवरिश में शामिल कर सकते हैं।
पहली आदत: सभी लोगों का सम्मान करना
बच्चों को कम उम्र से ही दूसरों का सम्मान करना सिखाना बेहद जरूरी है। करीना की पैरेंटिंग से जुड़ी चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से सामने आती रही है कि वह चाहती हैं कि उनके बच्चे अपने आसपास मौजूद लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें।
घर में काम करने वाले कर्मचारी हों, स्कूल के शिक्षक हों या बाहर मिलने वाले लोग, बच्चे जिस तरह दूसरों से व्यवहार करते हैं, उसमें माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। बच्चा सबसे पहले अपने घर से ही सामाजिक व्यवहार सीखता है। अगर वह माता-पिता को लोगों के साथ सम्मान से बात करते देखता है तो उसके भीतर भी वैसा ही व्यवहार विकसित होने की संभावना बढ़ती है।
बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि किसी व्यक्ति का सम्मान उसकी आर्थिक स्थिति, काम या सामाजिक पहचान के आधार पर तय नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति के साथ विनम्रता से पेश आना चाहिए। 'प्लीज', 'थैंक यू' और 'सॉरी' जैसे सामान्य शब्द भी बच्चों को शिष्टाचार और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाने का आसान तरीका हो सकते हैं।
दूसरी आदत: अनुशासन और जिम्मेदारी की समझ
बच्चों के जीवन में अनुशासन की शुरुआत बचपन से होनी चाहिए। इसका अर्थ बच्चों पर हर समय सख्ती करना नहीं है, बल्कि उन्हें धीरे-धीरे यह समझाना है कि उनके कुछ काम और जिम्मेदारियां भी हैं।
खेलने के बाद खिलौने अपनी जगह रखना, स्कूल का सामान व्यवस्थित करना, समय पर सोना-जागना और भोजन के समय कुछ सामान्य नियमों का पालन करना जैसी छोटी आदतें बच्चों में जिम्मेदारी विकसित कर सकती हैं।
करीना कपूर अपने बच्चों की परवरिश को लेकर यह संकेत देती रही हैं कि स्टार परिवार से आने का मतलब यह नहीं कि बच्चों के लिए हर नियम अलग हो जाए। बच्चों के लिए सीमाएं तय करना और उन्हें सामान्य दिनचर्या का पालन कराना आगे चलकर उनके लिए फायदेमंद हो सकता है।
माता-पिता अक्सर बच्चों की छोटी गलतियों को यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि वे अभी बहुत छोटे हैं। हालांकि बचपन में ही प्यार से सही और गलत के बीच अंतर समझाया जाए तो आगे चलकर बच्चे को अपने व्यवहार और फैसलों की जिम्मेदारी लेना आसान हो सकता है।
तीसरी आदत: अपनी पहचान और आत्मविश्वास बनाए रखना
आज के दौर में बच्चों पर तुलना का दबाव बहुत जल्दी शुरू हो जाता है। स्कूल की पढ़ाई हो, खेल हो या दूसरी गतिविधियां, कई बार माता-पिता अनजाने में अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं। इससे बच्चे के आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है।
करीना कपूर की पैरेंटिंग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सीख यह भी मानी जा सकती है कि हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है। तैमूर और जेह दोनों की अपनी अलग-अलग पसंद और व्यक्तित्व हो सकते हैं। इसलिए बच्चों को बिल्कुल एक जैसा बनाने के बजाय उनकी व्यक्तिगत खूबियों को समझना महत्वपूर्ण है।
बच्चा पढ़ाई में अच्छा है तो उसे प्रोत्साहित करें, लेकिन यदि उसकी रुचि संगीत, कला, खेल या किसी दूसरी गतिविधि में ज्यादा है तो उस प्रतिभा को भी पहचानने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि माता-पिता का प्यार केवल उसकी उपलब्धियों पर निर्भर नहीं है।
बच्चों के सामने उदाहरण बनें माता-पिता
केवल बच्चों को अच्छी बातें बताना पर्याप्त नहीं होता। बच्चे अपने माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अगर माता-पिता बच्चे को मोबाइल कम इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं लेकिन खुद ज्यादातर समय फोन पर रहते हैं तो बच्चे पर उस सलाह का प्रभाव कम हो सकता है।
इसी तरह यदि माता-पिता चाहते हैं कि बच्चा सभी का सम्मान करे तो उन्हें भी घर और बाहर लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। यदि बच्चे को समय की पाबंदी सिखानी है तो परिवार के बड़े सदस्यों को भी इसका पालन करने की कोशिश करनी चाहिए।
बच्चों के सामने माता-पिता का व्यवहार उनके लिए एक तरह की रोजमर्रा की शिक्षा होता है। इसलिए अच्छी पैरेंटिंग में नियम बनाने के साथ खुद उन मूल्यों को अपनाना भी महत्वपूर्ण है।
गलती करने की आजादी भी जरूरी
बच्चों को अनुशासन सिखाने के साथ उन्हें गलतियां करने और उनसे सीखने का अवसर देना भी जरूरी है। हर छोटी गलती पर डांटना या तुरंत बच्चे की मदद के लिए पहुंच जाना उसके स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
अगर बच्चा कोई छोटा काम खुद करना चाहता है तो उसे कोशिश करने देना चाहिए। शुरुआत में वह गलतियां कर सकता है, लेकिन धीरे-धीरे उसी प्रक्रिया से वह नई चीजें सीखता है। माता-पिता का काम हर समस्या का समाधान तुरंत देना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सही दिशा दिखाना भी है।
बच्चों से खुलकर बातचीत करें
माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद मजबूत होना भी अच्छी परवरिश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चे को ऐसा माहौल मिलना चाहिए जिसमें वह बिना डर के अपनी बात परिवार के सामने रख सके।
स्कूल में क्या हुआ, किस बात से खुशी मिली और किस चीज ने परेशान किया—इन छोटी बातों पर नियमित बातचीत बच्चे और माता-पिता के रिश्ते को मजबूत बना सकती है। इससे माता-पिता को बच्चे की भावनाओं और व्यवहार में होने वाले बदलावों को समझने में भी मदद मिलती है।
बच्चे की बात सुनते समय तुरंत उसे गलत साबित करने के बजाय पहले उसकी पूरी बात सुनना बेहतर होता है। इससे बच्चे में यह भरोसा पैदा होता है कि मुश्किल स्थिति में वह अपने माता-पिता से मदद मांग सकता है।
हर माता-पिता के काम आ सकती हैं ये बातें
सेलिब्रिटी परिवार और सामान्य परिवार की जीवनशैली में बड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन बच्चों की परवरिश के कुछ बुनियादी सिद्धांत लगभग हर परिवार में उपयोगी हो सकते हैं। बच्चों को दूसरों का सम्मान करना, अनुशासन और जिम्मेदारी समझना तथा अपनी पहचान पर भरोसा करना सिखाना भविष्य में उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।
करीना कपूर और सैफ अली खान की पैरेंटिंग से जुड़ी चर्चाओं से भी यही संदेश निकलता है कि बच्चों को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उन्हें जीवन के सामान्य मूल्य समझाना भी उतना ही जरूरी है। माता-पिता अगर बचपन से ही प्यार और धैर्य के साथ अच्छी आदतों की नींव रखें तो ये छोटी सीख आगे चलकर बच्चों के व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा बन सकती हैं।
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