लाइफ स्टाइल

जिस Treadmill पर आज दौड़ते हैं लोग, कभी कैदियों को दी जाती थी यातना

Ratna Netam
16 July 2026 6:48 PM IST
जिस Treadmill   पर आज दौड़ते हैं लोग, कभी कैदियों को दी जाती थी यातना
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Lifestyle लाइफ स्टाइल : आज के समय में जब भी कोई व्यक्ति जिम जाता है तो वहां ट्रेडमिल पर दौड़ते या चलते हुए लोग आसानी से दिखाई देते हैं। वजन कम करने, कैलोरी बर्न करने और फिट रहने के लिए ट्रेडमिल को सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली एक्सरसाइज मशीनों में शामिल किया जाता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस ट्रेडमिल को आज लोग अपनी सेहत सुधारने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसका इतिहास काफी अलग और चौंकाने वाला है। कभी यही मशीन कैदियों को सजा देने और उनसे कठिन मेहनत करवाने के लिए इस्तेमाल की जाती थी।

ट्रेडमिल का आविष्कार साल 1818 में ब्रिटेन के इंजीनियर विलियम क्यूबिट ने किया था। उस समय इसे ट्रेडव्हील कहा जाता था। यह मशीन आज की आधुनिक इलेक्ट्रिक ट्रेडमिल जैसी नहीं थी। इसमें एक बड़ा पहिया और चलने वाली पट्टी होती थी, जो सीढ़ियों की तरह लगातार घूमती रहती थी। कैदियों को इस पर लगातार चलना पड़ता था, जिससे मशीन चलती रहती थी।

जब ट्रेडव्हील बनाई गई थी, तब इसका उद्देश्य फिटनेस या स्वास्थ्य सुधारना नहीं बल्कि जेलों में कैदियों को कठोर सजा देना था। उस समय ब्रिटेन की कई जेलों में कैदियों को रोजाना कई घंटों तक इस मशीन पर चलने के लिए मजबूर किया जाता था। कई बार उन्हें 6 से 8 घंटे तक ट्रेडव्हील पर काम करना पड़ता था। लगातार चलने के कारण कैदियों को शारीरिक और मानसिक रूप से काफी परेशानी होती थी।

इस मशीन का इस्तेमाल केवल सजा देने तक सीमित नहीं था। कई जगहों पर ट्रेडव्हील से पैदा होने वाली ऊर्जा का उपयोग अनाज पीसने, पानी पंप करने और अन्य छोटे-मोटे कामों के लिए भी किया जाता था। हालांकि कई जेलों में इसका इस्तेमाल सिर्फ कैदियों को परेशान करने और उन्हें थकाने के उद्देश्य से किया जाता था।

समय के साथ लोगों को एहसास हुआ कि ट्रेडव्हील कैदियों में सुधार लाने के बजाय उनके साथ अमानवीय व्यवहार का प्रतीक बन चुकी है। इसके बाद 19वीं सदी में जेलों में इसके इस्तेमाल पर रोक लगनी शुरू हो गई। धीरे-धीरे यह मशीन इतिहास का हिस्सा बन गई।

इसके बाद 20वीं सदी में ट्रेडमिल के स्वरूप में बदलाव शुरू हुए। खासकर 1960 के दशक में इसे स्वास्थ्य और फिटनेस के क्षेत्र में इस्तेमाल करने का विचार सामने आया। विशेषज्ञों ने पाया कि ट्रेडमिल पर चलने और दौड़ने से शरीर की कैलोरी तेजी से खर्च होती है और वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

इसके बाद ट्रेडमिल को आधुनिक रूप दिया गया। इसमें इलेक्ट्रिक मोटर, स्पीड कंट्रोल, हार्ट रेट मॉनिटर, कैलोरी ट्रैकर और अलग-अलग वर्कआउट मोड जैसी सुविधाएं जोड़ी गईं। आज ट्रेडमिल दुनिया भर के जिम और घरों में फिटनेस का अहम हिस्सा बन चुकी है।

एक समय जिस मशीन को कैदियों के लिए सजा का साधन माना जाता था, वही आज लोगों की सेहत और फिटनेस सुधारने का जरिया बन गई है। ट्रेडमिल का सफर यह दिखाता है कि समय के साथ किसी तकनीक का इस्तेमाल और उद्देश्य पूरी तरह बदल सकता है।

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