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कदम कदम बढ़ाए जा गीत की कहानी नेताजी की सेना से फिल्म समाधि तक कैसे हुआ अमर

nidhi
14 Aug 2026 8:37 AM IST
कदम कदम बढ़ाए जा गीत की कहानी नेताजी की सेना से फिल्म समाधि तक कैसे हुआ अमर
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देशभक्ति के सुरों की अमर कहानी नेताजी बोस की सेना का गीत जो आज भी गूंजता है
नई दिल्ली : "कदम कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा..." यह गीत सिर्फ एक देशभक्ति गीत नहीं बल्कि भारतीय सैनिकों के हौसले, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक बन चुका है। आज भी जब भारतीय सेना की टुकड़ियां परेड करती हैं तो इस धुन की गूंज जवानों में जोश भर देती है। यह वही तराना है जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (INA) से जुड़ा हुआ है।
आजाद हिंद फौज का जोशीला गीत
"कदम कदम बढ़ाए जा" गीत को आजाद हिंद फौज के लिए तैयार किया गया था। इसके बोल सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने और देश की आजादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देते थे। इस गीत की रचना मेजर आबिद हसन सफरानी और संगीत कैप्टन राम सिंह ठाकुर से जुड़ी मानी जाती है। कैप्टन राम सिंह ठाकुर आजाद हिंद फौज के बैंड मास्टर थे और उन्होंने इस धुन को तैयार किया था। आजाद हिंद फौज के जवान युद्ध के समय इस गीत को गाते हुए मार्च करते थे। इसका उद्देश्य सैनिकों में आत्मविश्वास, एकता और लड़ने का जज्बा बनाए रखना था।
फिल्म 'समाधि' ने दिलाई नई पहचान
साल 1950 में आई फिल्म 'समाधि' में इस गीत को शामिल किया गया, जिसके बाद यह देशभर में लोकप्रिय हो गया। फिल्म में आजाद हिंद फौज और स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि को दिखाया गया था। इसके बाद "कदम कदम बढ़ाए जा" आम लोगों के बीच भी देशभक्ति के सबसे लोकप्रिय गीतों में शामिल हो गया। फिल्म के जरिए इस गीत ने नई पीढ़ी तक पहुंच बनाई और आजादी के आंदोलन की यादों को जीवंत कर दिया।
भारतीय सेना का प्रेरणादायक मार्चिंग सॉन्ग
आजादी के बाद भारतीय सेना ने भी इस गीत को अपनाया। इसकी धुन सेना के मार्चिंग गीतों में शामिल की गई। गणतंत्र दिवस परेड, सैन्य समारोहों और विभिन्न अवसरों पर इसकी धुन सुनाई देती है। यह गीत जवानों को अनुशासन, साहस और निरंतर आगे बढ़ने का संदेश देता है। भारतीय सेना के जवान आज भी इस धुन पर कदमताल करते हैं।
नेताजी के सपनों से जुड़ा संदेश
"कदम कदम बढ़ाए जा" केवल एक गीत नहीं बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के उस सपने की आवाज है, जिसमें उन्होंने भारत को स्वतंत्र और मजबूत राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया था। आज भी यह गीत देशवासियों और सैनिकों के भीतर देशसेवा की भावना को मजबूत करता है। करीब आठ दशक बाद भी इस गीत की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। इसकी धुन सुनते ही लोगों के मन में देशभक्ति और गर्व की भावना जाग उठती है।
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