लाइफ स्टाइल

Newborns में छिपी बीमारियों का खतरा

Harrison
18 Jan 2026 8:28 PM IST
Newborns में छिपी बीमारियों का खतरा
x
Lifestyle, लाइफस्टाइल : अक्सर माता-पिता अपने नवजात शिशु को पूरी तरह स्वस्थ समझ बैठते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि बाहर से स्वस्थ दिखने वाले बच्चों में भी कुछ गंभीर बीमारियां छिपी हो सकती हैं। ये बीमारियां जन्म के समय या कुछ हफ्तों बाद धीरे-धीरे प्रकट होती हैं। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से शिशु का जीवन सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सकता है।
नवजात शिशुओं में सबसे आम छिपी बीमारियों में थैलेसीमिया, हाइपोथायरॉइडिज्म, किडनी या हृदय संबंधी दोष, पाचन तंत्र की समस्याएं और कुछ मेटाबॉलिक विकार शामिल हैं। ये सभी बीमारियां शुरुआती चरण में किसी बाहरी लक्षण के बिना हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, हाइपोथायरॉइडिज्म में शिशु सामान्य दिख सकता है लेकिन धीरे-धीरे थकान, वजन बढ़ने में देरी और पाचन समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, नवजात शिशु की स्वास्थ्य जांच जन्म के तुरंत बाद और शुरुआती महीनों में बेहद जरूरी है। इसमें ब्लड टेस्ट, हृदय की धड़कन की जांच, कान और आंखों की स्क्रीनिंग और मेटाबॉलिक टेस्ट शामिल होते हैं। ये जांचें शिशु में किसी छिपी बीमारी की प्रारंभिक पहचान में मदद करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को अपने बच्चे के व्यवहार और शारीरिक बदलावों पर भी ध्यान देना चाहिए। लगातार रोना, दूध न पीना, वजन बढ़ने में देरी, त्वचा या आंखों का पीलापन, और बार-बार संक्रमण होना ऐसे संकेत हो सकते हैं जो छिपी बीमारियों की ओर इशारा करते हैं। किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
साथ ही, डॉक्टर नवजात स्क्रीनिंग प्रोग्राम की सलाह देते हैं। यह प्रोग्राम जन्म के पहले सप्ताह में बच्चों की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांच कराता है। इसके जरिए थैलेसीमिया, हृदय दोष, हाइपोथायरॉइडिज्म और अन्य मेटाबॉलिक विकार जल्दी पकड़ में आ जाते हैं और समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।
नवजात शिशु की सुरक्षा के लिए टीकाकरण का सही समय पर होना भी जरूरी है। डॉक्टर यह भी बताते हैं कि संतुलित पोषण, मां का सही आहार, शिशु का नियमित स्वास्थ्य निरीक्षण और साफ-सफाई बनाए रखना बीमारियों के जोखिम को कम करता है।
निष्कर्षतः, बाहर से हेल्दी दिखने वाले शिशु में भी कई छिपी बीमारियां हो सकती हैं। माता-पिता को जागरूक रहना, शुरुआती जांच कराना और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से शिशु का जीवन स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सकता है।
Next Story