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Lifestyle लाइफस्टाइल : सागवान की खेती किसानों के लिए लंबे समय में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार सागवान के पौधे लगाने की सबसे सही शुरुआत मानसून की पहली बारिश के बाद की जाती है। बारिश का मौसम इसके पौधों की ग्रोथ के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय नमी पर्याप्त होती है और पौधे तेजी से विकसित होते हैं।
छतरपुर के लवकुश नगर स्थित सरकारी नर्सरी में पिछले 40 वर्षों से पौधे तैयार कर रहे विशेषज्ञ राजाराम कुशवाहा के अनुसार सागवान का पौधा बीज से भी तैयार किया जा सकता है। बीज से पौधा तैयार करने में लगभग एक साल का समय लगता है। यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी जरूर होती है, लेकिन इससे मजबूत और अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे तैयार होते हैं।
बीज से पौधा तैयार करने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध होती है। सबसे पहले सागवान के बीजों को सड़ाया जाता है, जिससे उनका बाहरी कठोर आवरण नरम हो सके। इसके बाद उन्हें कुचला जाता है और पानी में भिगोया जाता है। कुछ समय बाद इन्हें धूप में सुखाया जाता है ताकि अंकुरण की प्रक्रिया बेहतर हो सके। गर्मियों में इन्हें बालू (रेत) में भी रखा जाता है, जिससे बीज अच्छी तरह तैयार हो सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार सागवान की खेती के लिए उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, अन्यथा पौधों को नुकसान हो सकता है। इसलिए खेत का चयन सोच-समझकर करना जरूरी है।
सागवान की खेती से मुनाफा धीरे-धीरे लेकिन काफी बड़ा मिलता है। एक बार पौधा लगने के बाद इसे परिपक्व होने में कई साल लगते हैं, लेकिन तैयार लकड़ी की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। यही कारण है कि इसे लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट खेती माना जाता है।
कुल मिलाकर, सागवान की खेती उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जो धैर्य के साथ लंबे समय तक निवेश करना चाहते हैं और भविष्य में अच्छा लाभ कमाने की योजना रखते हैं।





