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फारस की मिठाई लुकमात अल-कादी बनी भारतीयों का फेवरेट गुलाब जामुन, जानें इतिहास

लाइफस्टाइल डेस्क: शादी, त्योहार, जन्मदिन या कोई भी खुशी का मौका हो, भारतीय मिठाइयों की सूची में गुलाब जामुन का नाम सबसे ऊपर आता है। नरम, रस से भरे और मुंह में घुल जाने वाले गुलाब जामुन को भारत की सबसे पसंदीदा मिठाइयों में गिना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मिठाई को आज हर भारतीय अपनी परंपरा का हिस्सा मानता है, उसकी जड़ें भारत से बाहर फारस तक जाती हैं। इतिहासकारों के अनुसार, गुलाब जामुन का संबंध मध्य पूर्व की प्रसिद्ध मिठाई 'लुकमात अल-कादी' से माना जाता है।
गुलाब जामुन की कहानी बेहद रोचक है। माना जाता है कि यह मिठाई फारस क्षेत्र से भारत पहुंची। लुकमात अल-कादी नाम की मिठाई देखने में काफी हद तक गुलाब जामुन जैसी ही होती थी। इसे भी छोटे गोल आकार में तैयार कर चाशनी में डुबोकर परोसा जाता था। हालांकि, समय के साथ भारत में इस मिठाई में कई बदलाव हुए और यह पूरी तरह भारतीय स्वाद के अनुसार ढल गई।
इतिहासकारों का मानना है कि तुर्क और अफगान शासकों के भारत आगमन के साथ उनकी खान-पान की संस्कृति भी यहां पहुंची। उनके साथ आए रसोइयों ने कई विदेशी व्यंजनों को भारतीय सामग्री और स्वाद के साथ मिलाकर नए रूप दिए। दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के दौरान शाही रसोई में फारसी व्यंजनों का काफी प्रभाव था। इसी दौरान लुकमात अल-कादी में भारतीय सामग्री का इस्तेमाल शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह गुलाब जामुन के रूप में लोकप्रिय हो गया।
भारत में आने के बाद गुलाब जामुन बनाने के तरीके में बड़ा बदलाव आया। फारसी मिठाई में जहां मैदा और खमीर का इस्तेमाल किया जाता था, वहीं भारतीय रसोइयों ने इसमें मावा, खोया, छेना और इलायची जैसी चीजों को शामिल किया। इससे इसका स्वाद और भी ज्यादा समृद्ध हो गया। आज बाजार में मिलने वाला गुलाब जामुन मुख्य रूप से खोये से तैयार किया जाता है, जिसे धीमी आंच पर तलने के बाद मीठी चाशनी में डुबोया जाता है।
गुलाब जामुन नाम भी अपने आप में काफी दिलचस्प है। यह नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। 'गुलाब' शब्द फारसी भाषा से आया है, जो गुल यानी फूल और आब यानी पानी से मिलकर बना है। इसका मतलब होता है गुलाब का पानी। पुराने समय में मिठाइयों की चाशनी में खुशबू के लिए गुलाब जल का इस्तेमाल किया जाता था। वहीं, 'जामुन' नाम इसे इसके आकार और रंग के कारण मिला। जब इसे घी में तला जाता है तो इसका रंग भूरा या गहरा काला हो जाता है, जो भारतीय फल जामुन जैसा दिखाई देता है।
समय के साथ भारत के अलग-अलग हिस्सों में गुलाब जामुन के कई रूप देखने को मिले। कहीं इसे छोटे आकार में बनाया जाता है तो कहीं बड़े आकार में। कुछ जगहों पर इसे काला जामुन के नाम से भी जाना जाता है। कई क्षेत्रों में इसमें नारियल, केसर, ड्राई फ्रूट्स और अन्य स्वाद भी जोड़े जाते हैं। इसके बावजूद इसकी मूल पहचान और स्वाद आज भी कायम है।
गुलाब जामुन केवल एक मिठाई नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुका है। यह मिठाई अलग-अलग संस्कृतियों और खान-पान की परंपराओं के मेल का उदाहरण है। फारस से शुरू हुई इसकी यात्रा भारत में आकर पूरी तरह बदल गई और आज यह दुनिया भर में भारतीय मिठास की पहचान बन चुकी है।
विदेशों में रहने वाले भारतीय भी त्योहारों और खास मौकों पर गुलाब जामुन को अपनी परंपरा से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि सदियों पुरानी यह मिठाई आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रही है। गुलाब जामुन की कहानी बताती है कि कैसे अलग-अलग संस्कृतियां मिलकर एक ऐसी चीज को जन्म दे सकती हैं, जो समय के साथ पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो जाए।





