लाइफ स्टाइल

खुशियों के हर मौके पर रंग भरता है मंगलमकली नृत्य

Saba Naaz
21 July 2026 4:53 PM IST
खुशियों के हर मौके पर रंग भरता है मंगलमकली नृत्य
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लाइफ स्टाइल: भारत अपनी विविध संस्कृति और अनगिनत लोक कलाओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे पारंपरिक नृत्य हैं, जो वहां की संस्कृति, इतिहास और सामाजिक जीवन की झलक दिखाते हैं। दक्षिण भारत के केरल राज्य का 'मंगलमकली' भी ऐसा ही एक अनोखा और मनमोहक लोकनृत्य है। अपनी सादगी, मधुर लोकगीतों और सामूहिक प्रस्तुति के कारण यह नृत्य आज भी लोगों के बीच खास पहचान बनाए हुए है।

मंगलमकली मुख्य रूप से केरल के ईसाई समुदाय का पारंपरिक लोकनृत्य है, जिसे खासतौर पर शादी समारोहों और अन्य शुभ अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को आगे बढ़ाने का एक जरिया भी है। इसमें कलाकार मिलकर एक साथ नृत्य करते हैं और पूरे माहौल को उत्सवमय बना देते हैं।

मंगलमकली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता है। जहां कई लोकनृत्यों में कठिन मुद्राएं और जटिल स्टेप्स देखने को मिलते हैं, वहीं मंगलमकली में नर्तकों का ध्यान तालमेल, भावनाओं और समूह की एकजुटता पर अधिक होता है। इसमें कलाकार गोल घेरा बनाकर खड़े होते हैं और तालियों की लय के साथ कदम मिलाते हुए नृत्य करते हैं। यही सहज अंदाज इसे आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता है।

इस लोकनृत्य की परंपरा कई सदियों पुरानी मानी जाती है। इसका विकास केरल के पूर्वी ईसाई समुदाय के बीच हुआ। इस समुदाय ने अपनी धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय मलयाली संस्कृति को मिलाकर एक ऐसी कला को जन्म दिया, जिसमें परंपरा और उत्सव दोनों की झलक दिखाई देती है। समय के साथ मंगलमकली केरल की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

केरल के कई क्षेत्रों में मंगलमकली को विशेष महत्व दिया जाता है। कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, पथानामथिट्टा और त्रिशूर जैसे इलाकों में यह लोकनृत्य काफी प्रचलित है। खास अवसरों पर लोग इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ प्रस्तुत करते हैं।

मंगलमकली नाम भी अपने आप में इसके महत्व को दर्शाता है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। 'मंगलम' का अर्थ होता है शुभ, कल्याण या अच्छा अवसर, जबकि 'कली' का मतलब होता है नृत्य या खेल। इस तरह मंगलमकली का अर्थ हुआ शुभ अवसर पर किया जाने वाला नृत्य। नाम से ही पता चलता है कि यह कला खुशियों और शुभ भावनाओं से जुड़ी हुई है।

इस नृत्य में संगीत की भूमिका भी बेहद खास होती है। मंगलमकली के दौरान पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं, जिनमें पारिवारिक जीवन, विवाह परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और धार्मिक भावनाओं का सुंदर वर्णन होता है। कलाकार समूह में गीत गाते हुए तालियों की लय पर नृत्य करते हैं। कई बार स्थानीय वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिससे प्रस्तुति और अधिक आकर्षक बन जाती है।

मंगलमकली केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक परंपरा है। इसमें किसी एक व्यक्ति की कला से ज्यादा पूरे समूह की एकता और सामूहिक भावना महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि इसे देखने वाले लोग भी इस नृत्य से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं।

आधुनिक समय में जहां कई पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं, वहीं मंगलमकली आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है। केरल के लोग इसे अपनी विरासत मानते हैं और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। यह नृत्य हमें याद दिलाता है कि संस्कृति केवल इतिहास नहीं होती, बल्कि वह लोगों के जीवन, भावनाओं और खुशियों का हिस्सा भी होती है।

सादगी, संगीत और सामूहिक उत्साह से भरा मंगलमकली नृत्य केरल की समृद्ध संस्कृति का खूबसूरत प्रतीक है, जो हर शुभ अवसर को यादगार बना देता है।

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