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इमोशनल झटका और दिल का खतरा टूटे दिल वाली बीमारी का सच

Ratna Netam
13 Sept 2026 6:24 PM IST
इमोशनल झटका और दिल का खतरा टूटे दिल वाली बीमारी का सच
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नई दिल्ली।आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि किसी बड़े दुख या सदमे से “दिल टूट गया”। आमतौर पर इसे सिर्फ भावनात्मक दर्द समझा जाता है, लेकिन मेडिकल साइंस में **Broken Heart Syndrome (टूटे दिल की बीमारी)** नाम की एक वास्तविक स्थिति मौजूद है, जो कुछ मामलों में गंभीर और जानलेवा भी साबित हो सकती है।
लंदन के कार्डियोलॉजिस्ट और हृदय विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक मिलने वाला गहरा भावनात्मक या शारीरिक तनाव दिल की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है। हालांकि हर भावनात्मक सदमा दिल के लिए घातक नहीं होता, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
क्या है Broken Heart Syndrome?
Broken Heart Syndrome को मेडिकल भाषा में **Takotsubo Cardiomyopathy** कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें अचानक तनाव या भावनात्मक झटका लगने के बाद दिल की मांसपेशियां कुछ समय के लिए कमजोर हो जाती हैं।
यह स्थिति कई बार हार्ट अटैक जैसी दिखाई दे सकती है। मरीज को सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
हालांकि इसमें आमतौर पर दिल की धमनियों में ब्लॉकेज नहीं होता, बल्कि तनाव के कारण दिल के काम करने के तरीके में अस्थायी बदलाव आता है।
कब हो सकता है जानलेवा?
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, ज्यादातर लोग इस स्थिति से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर हो सकती है।
जोखिम तब बढ़ सकता है जब:
* दिल पहले से कमजोर हो।
* मरीज को पहले से हृदय संबंधी बीमारी हो।
* तनाव बहुत ज्यादा और अचानक हो।
* समय पर इलाज न मिल पाए।
* दिल की पंपिंग क्षमता बहुत कम हो जाए।
कुछ दुर्लभ मामलों में यह स्थिति हार्ट फेलियर, अनियमित धड़कन या अन्य गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
किन कारणों से हो सकता है ‘दिल टूटने’ का असर?
Broken Heart Syndrome केवल प्रेम संबंध टूटने से नहीं होता। इसके पीछे कई तरह के तनाव जिम्मेदार हो सकते हैं।
जैसे:
* किसी करीबी व्यक्ति की मौत का सदमा।
* तलाक या रिश्ते का टूटना।
* अचानक बड़ी आर्थिक परेशानी।
* गंभीर बीमारी की जानकारी मिलना।
* दुर्घटना या कोई बड़ा डर।
* लंबे समय तक मानसिक तनाव।
कई बार बहुत ज्यादा खुशी या उत्साह भी शरीर में अचानक तनाव प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है।
शरीर में क्या होता है?
जब व्यक्ति बहुत ज्यादा तनाव में होता है तो शरीर में एड्रेनालिन और अन्य स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ जाते हैं।
इन हार्मोन के बढ़ने से दिल पर दबाव पड़ सकता है। कुछ लोगों में इसका असर दिल की मांसपेशियों पर होता है और दिल सामान्य तरीके से पंप नहीं कर पाता।
यही स्थिति Broken Heart Syndrome का कारण बन सकती है।
महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है
चिकित्सकीय अध्ययनों के अनुसार, यह समस्या खासतौर पर उम्रदराज महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है, हालांकि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण तनाव के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
कई लोग भावनात्मक सदमे के बाद होने वाले शारीरिक लक्षणों को सिर्फ तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ संकेत गंभीर हो सकते हैं।
इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
* अचानक सीने में तेज दर्द।
* सांस लेने में परेशानी।
* दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना।
* अत्यधिक कमजोरी।
* चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना।
क्योंकि ये लक्षण हार्ट अटैक या अन्य हृदय समस्या से भी जुड़े हो सकते हैं।
इलाज कैसे किया जाता है?
Broken Heart Syndrome का इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। डॉक्टर दिल की जांच के लिए ECG, इकोकार्डियोग्राफी और अन्य टेस्ट कर सकते हैं।
कई मरीज कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दवाएं देते हैं ताकि दिल पर दबाव कम हो और रिकवरी बेहतर हो सके।
तनाव कम करना क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य और हृदय स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
तनाव कम करने के लिए:
* पर्याप्त नींद लें।
* नियमित व्यायाम करें।
* परिवार और दोस्तों से बात करें।
* भावनाओं को दबाने की बजाय साझा करें।
* जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।
क्या सच में दुख से मौत हो सकती है?
किसी प्रिय व्यक्ति को खोने या बड़े भावनात्मक सदमे से सीधे मौत होना सामान्य स्थिति नहीं है, लेकिन अत्यधिक तनाव शरीर में ऐसी प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकता है जो कुछ लोगों में गंभीर साबित हो सकती हैं।
यही कारण है कि विशेषज्ञ कहते हैं कि मानसिक तनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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