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सर्दियों में निखार की चाह?
लाइफस्टाइल : सर्दियों की शुरुआत होते ही त्वचा में खिंचाव, रूखापन और पपड़ी निकलने जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ठंडी हवा और घर के भीतर हीटर का इस्तेमाल त्वचा की नमी को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में मॉइस्चराइजर लगाने के साथ संतुलित खानपान का ध्यान रखना भी जरूरी है। फल शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने का आसान माध्यम हैं। हालांकि, किसी खास फल को खाने से चेहरे पर निश्चित चमक आने या रूखी त्वचा पूरी तरह ठीक होने का दावा सही नहीं है।
त्वचा की सेहत के संदर्भ में विटामिन सी की अहम भूमिका है। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार, शरीर को कोलेजन बनाने के लिए विटामिन सी की जरूरत होती है। कोलेजन एक प्रोटीन है, जो त्वचा सहित शरीर के विभिन्न ऊतकों की संरचना में योगदान देता है। इसलिए विटामिन सी वाले फल संतुलित आहार का उपयोगी हिस्सा हो सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक मात्रा में ऐसे फल खाने से झुर्रियां या त्वचा की दूसरी समस्याएं अपने आप दूर हो जाएंगी।
संतरा सर्दियों में आसानी से मिलने वाला विकल्प है। इसे नाश्ते के साथ या दिन में हल्की भूख लगने पर खाया जा सकता है। खट्टे फल विटामिन सी के प्रमुख खाद्य स्रोतों में शामिल हैं। संतरे को जूस बनाकर पीने के बजाय फांकों के रूप में खाना सुविधाजनक विकल्प है। इससे फल का रेशा भी भोजन का हिस्सा बना रहता है। स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से चीनी मिलाने की आवश्यकता नहीं है।
अमरूद भी रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसे अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काटें और अपनी भूख तथा जरूरत के अनुसार खाएं। फल पर बहुत अधिक नमक या मसाला डालने के बजाय उसका प्राकृतिक स्वाद अपनाना बेहतर आदत हो सकती है। अगर अमरूद खाने पर पेट में असुविधा होती है तो मात्रा कम रखें या कोई दूसरा फल चुनें। त्वचा के लिए किसी एक फल पर निर्भर रहने के बजाय भोजन में विविधता रखना अधिक व्यावहारिक है।
कीवी विटामिन सी का एक और स्रोत है। इसे सीधे खाया जा सकता है या दूसरे फलों के साथ छोटी कटोरी में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, इसे स्वस्थ त्वचा के लिए अनिवार्य या दूसरे सभी फलों से बेहतर मानने की जरूरत नहीं है। महंगा फल खरीदना जरूरी नहीं; उपलब्ध और बजट के अनुकूल विकल्पों से भी विविध आहार तैयार किया जा सकता है। किसी फल से एलर्जी होने पर उसे खाने से बचें। पपीता, सेब और अनार जैसे फल भी पसंद तथा उपलब्धता के अनुसार भोजन में रखे जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल बिस्कुट, मिठाई या बहुत मीठे स्नैक्स की जगह किया जा सकता है। लेकिन अनार खाने से चेहरे पर तुरंत लाली आने, सेब से दाग मिटने या पपीते से त्वचा की हर समस्या दूर होने जैसी बातें भरोसेमंद निष्कर्ष नहीं हैं। फल खाने का उद्देश्य समग्र पोषण होना चाहिए। इन्हें किसी त्वचा रोग के इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
फल खाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन विविध, कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों वाले आहार पर जोर देता है। बिना अतिरिक्त चीनी वाले फलों के जूस में भी पर्याप्त फ्री शुगर हो सकती है, इसलिए उनका सेवन सीमित रखना चाहिए। रोज बड़े गिलास में जूस पीने की जगह साबुत या कटे फल चुनें। पैकेट वाले फ्रूट ड्रिंक पर लिखे नाम के साथ उसकी सामग्री और अतिरिक्त चीनी की जानकारी भी देखें। फलों को रोजमर्रा में शामिल करने के लिए जटिल डाइट प्लान की जरूरत नहीं है। घर में उपलब्ध फल धोकर रखें और सुविधानुसार भोजन के बीच लें। फल की कटोरी में चीनी, मीठी क्रीम या सिरप मिलाने से अतिरिक्त शुगर बढ़ सकती है। केवल फल खाकर मुख्य भोजन छोड़ना भी उचित संतुलन नहीं होगा। दाल, सब्जियां, अनाज और अन्य उपयुक्त खाद्य पदार्थ भी आहार का हिस्सा रहने चाहिए। विविध भोजन से अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है।
खानपान के साथ त्वचा की बाहरी देखभाल जारी रखें। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, ठंडा और शुष्क वातावरण त्वचा की सुरक्षा परत को प्रभावित कर सकता है। मॉइस्चराइजर त्वचा में मौजूद नमी को बनाए रखने में मदद करता है। चेहरा धोने या नहाने के तुरंत बाद उपयुक्त मॉइस्चराइजर लगाना उपयोगी हो सकता है। रूखी और पपड़ीदार त्वचा को बार-बार स्क्रब करने से जलन तथा रूखापन बढ़ सकता है।
त्वचा का निखार केवल खाने की किसी एक चीज से तय नहीं होता। मौसम, त्वचा का प्रकार, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी असर डालती हैं। इसलिए मौसमी फलों को संतुलित आहार में जगह दें और अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार देखभाल करें। यदि रूखेपन के साथ लगातार खुजली, गहरी दरारें या परेशानी बनी रहे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। ऐसी स्थिति में केवल फल या घरेलू उपाय बढ़ाते रहने के बजाय उचित उपचार लेना जरूरी हो सकता है।
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