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शरीर में दिख रहे है फैटी लिवर के लक्षण, तो न करें इग्नोर

Sandhya Yadav
26 Nov 2021 3:32 AM GMT
शरीर में दिख रहे है फैटी लिवर के लक्षण, तो न करें इग्नोर
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एक स्वस्थ व्यक्ति के लिवर में फैट की मात्रा न के बराबर होती है। फैटी लिवर एक ऐसी समस्या है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिवर में फैट की मात्रा न के बराबर होती है। फैटी लिवर एक ऐसी समस्या है, जिसमें शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी फैट में बदल कर लिवर की कोशिकाओं में जमने लगती है, जिससे लिवर ढंग से काम नहीं कर पाता।

जब लिवर की कोशिकाओं में वसा ज्यादा मात्रा में जमने लगती है तो सूजन आने लगती है, जिसका असर पाचन तंत्र पर पड़ता है और शरीर कमजोर होने लगता है। जब शरीर में मौजूद कुल वसा की मात्रा लिवर के वजन से 10 प्रतिशत ज्यादा हो जाए तो उस स्थिति को फैटी लिवर कहते हैं।
लिवर पर वसा जमने से खाना पचाने में कठिनाई होने लगती है और मरीज के पेट में दर्द सहित अन्य लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इस समस्या के बारे में आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद पता चलता है। स्थिति बढ़ने पर लिवर में सूजन भी आ सकती है।
फैटी लिवर के दो प्रकार
एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज
ऐसा ज्यादा शराब पीने से होता है। ज्यादा शराब पीने से लिवर पर फैट जमा होने लगता है व उस पर सूजन आ जाती है। शराब न पीने पर करीब छह सप्ताह के भीतर लिवर से फैट की परत हटने लगती है।
नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज
अधिक तला-भुना और उच्च वसायुक्त भोजन करने वाले लोग मोटापे और मधुमेह से ग्रस्त हो सकते हैं, जो फैटी लिवर का कारण भी बन सकता है। लंबे समय तक ऐसा भोजन करने से लिवर पर वसा जमने लगती है। समय पर इलाज न किया जाए तो लिवर फाइब्रोसिस की स्थिति आ सकती है। लिवर और उसके आस-पास के ऊतक क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। स्थिति गंभीर हो जाए तो यह समस्या सिरोसिस में बदल सकती है, जिसमें लिवर सामान्य रूप से कार्य करना बंद कर देता है।
क्या होते हैं लक्षण
आमतौर पर शुरुआती अवस्था में फैटी लिवर के लक्षण नहीं दिखाई देते, पर कुछ सामान्य लक्षणों के आधार पर इस बीमारी के बारे में जाना जा सकता है।
-पेट में दर्द महसूस होना
-पेट के ऊपरी भाग में सूजन आ जाना
-भूख न लगना और भोजन ढंग से न पचना
-वजन घटना और कमजोरी महसूस करना
-गफलत और भ्रम की स्थिति
- उल्टी आना
-थकान महसूस करना
क्या हैं कारण
अधिक शराब पीने के अलावा यह लंबे समय तक गलत खान-पान से भी हो सकता है। जब शरीर में मौजूद वसा धीमे मेटाबॉलिज्म की वजहसे ऊर्जा में नहीं बदल पाती तो वह लिवर कोशिकाओं पर जमने लगती है। इसके अलावा ये कारण भी समस्या को जन्म देते हैं-
-खून में वसा का बढ़ना
-टाइप 2 डाइबिटीज या मोटापा
-आनुवंशिक कारण
-बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले खाना
-ज्यादा स्टेरॉएड्स लेना ह
-हाई कोलेस्ट्रोल
-मेेटाबॉलिक सिंड्रोम
-हाईपोथायरॉएडिज्म
-पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
बचने के तरीके
● फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों और साबुत अनाज का भरपूर सेवन करें।
● डिब्बाबंद जूस के स्थान पर ताजे फल खाएं। ग्रीन टी पिएं।
● नियमित व्यायाम करें।
● एल्कोहल का सेवन न करें।
● रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स और सफेद चीनी का सेवन बिलकुल बंद कर दें।
● लहसुन और पत्ता गोभी का सेवन करें।
● सफेद चने, उड़द दाल और राजमा जैसे बादी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ कम मात्रा में खाएं। रात में इन्हें खाने से परहेज करें।
● छाछ, नारियल पानी, सूप और दाल का पानी पिएं।
● देर रात भोजन करने से बचें।
● खाना चबाकर ही खाएं।
● ज्यादा फास्ट फूड न खाएं। ब्रोकली, मछली, एवेकाडो और अखरोट खाएं।
● बैरिएट्रिक सर्जरी की सलाह भी दी जा सकती है।
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