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लाइफ स्टाइल
"डायबिटिक, प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीडिंग महिलाएं Karwa Chauth व्रत रखें या नहीं? जानें एक्सपर्ट्स की राय"
Harrison
9 Oct 2025 8:31 PM IST

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Lifestyle,लाइफस्टाइल : करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति में विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। लेकिन सवाल उठता है कि क्या डायबिटिक, प्रेग्नेंट (गर्भवती) और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएं इस कठिन व्रत को बिना नुकसान के निभा सकती हैं?
इस विषय पर डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की राय बेहद अहम है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ, और किन बातों का ध्यान रखकर यह व्रत किया जा सकता है।
डायबिटिक महिलाएं व्रत रखें या नहीं?
डायबिटीज़ से ग्रसित महिलाओं के लिए दिनभर का निर्जला व्रत जोखिम भरा हो सकता है।
संभावित खतरे:
ब्लड शुगर का अचानक गिरना (हाइपोग्लाइसीमिया)
घबराहट, चक्कर, कमजोरी या बेहोशी
लंबे समय तक खाली पेट रहने से मेटाबॉलिक असंतुलन
एक्सपर्ट की राय:
डॉ. नीना मिश्रा, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट कहती हैं –
"अगर डायबिटिक महिला अपनी दवा/इंसुलिन समय पर नहीं लेती या व्रत में बिना खाए-पिए रहती है तो उसे ब्लड शुगर में भारी उतार-चढ़ाव हो सकता है, जो खतरनाक है।"
समाधान:
व्रत से पहले और दौरान ब्लड शुगर की निगरानी करें।
पूरी तरह निर्जला न रहें — थोड़ा पानी, नारियल पानी या नींबू शरबत जैसी चीजें बीच-बीच में लें।
डॉक्टर से पहले सलाह लेकर ही व्रत रखें।
प्रेग्नेंट महिलाएं क्या करें?
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को पोषण और हाइड्रेशन की ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में लंबा उपवास भ्रूण के विकास और मां की सेहत को प्रभावित कर सकता है।
संभावित खतरे:
डिहाइड्रेशन
ब्लड प्रेशर का गिरना
भ्रूण तक पर्याप्त पोषण न पहुंचना
थकावट, कमजोरी, चक्कर
एक्सपर्ट की राय:
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता बंसल कहती हैं –
"प्रेग्नेंट महिलाओं को करवा चौथ व्रत में लचीलापन रखना चाहिए। निर्जला व्रत न रखें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तरल पदार्थ और हल्का आहार लेते रहें। धार्मिक भावना बनाए रखते हुए शरीर की ज़रूरतों को प्राथमिकता दें।"
सुझाव:
व्रत के दौरान फल, दूध या नारियल पानी लेते रहें।
भूखा रहना या पानी तक न पीना प्रेग्नेंसी में बिल्कुल उचित नहीं।
डॉक्टर की सलाह लेकर व्रत का तरीका तय करें।
ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाएं?
स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ज्यादा कैलोरी, तरल और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस दौरान उपवास करने से मां के शरीर में कमजोरी आ सकती है और दूध की मात्रा पर असर पड़ सकता है।
संभावित खतरे:
दूध की मात्रा में कमी
कमज़ोरी या चक्कर आना
बच्चे को सही पोषण न मिलना
एक्सपर्ट की राय:
न्यूट्रिशनिस्ट मानसी अग्रवाल कहती हैं –
"ब्रेस्टफीडिंग महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में पानी और पोषक तत्व लेना जरूरी होता है। उपवास से मां के दूध की क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों प्रभावित हो सकती हैं।"
समाधान:
निर्जला व्रत से बचें।
दिनभर पानी, दूध, जूस जैसे तरल लें।
बच्चे की फीडिंग रूटीन को प्राथमिकता दें।
धार्मिक भावना और स्वास्थ्य के बीच संतुलन जरूरी
करवा चौथ भावनाओं और विश्वास से जुड़ा पर्व है। लेकिन महिलाओं को यह समझना जरूरी है कि धर्म की पालना करते हुए भी स्वास्थ्य से समझौता नहीं करना चाहिए।
व्रत करने का मतलब खुद को कष्ट देना नहीं है, बल्कि श्रद्धा से जुड़ना है। ऐसे में प्रेग्नेंसी, डायबिटीज़ या ब्रेस्टफीडिंग जैसी स्थिति में पूरी तरह निर्जला व्रत करना आवश्यक नहीं है। आप व्रत में लचीलापन रखते हुए भी भगवान से जुड़ सकते हैं।
डायबिटिक, प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीडिंग महिलाएं डॉक्टर की सलाह के बिना व्रत न रखें।
निर्जला उपवास के बजाय फलाहार, जूस, नारियल पानी जैसे विकल्प चुनें।
धार्मिक अनुष्ठान में भावनात्मक रूप से भाग लें, लेकिन स्वास्थ्य के साथ समझौता न करें।
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