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महंगे कपड़ों को कहें बाय बाय, कम बजट में फैशनेबल बनने का नया ट्रेंड

Ratna Netam
21 Oct 2026 7:55 PM IST
महंगे कपड़ों को कहें बाय बाय, कम बजट में फैशनेबल बनने का नया ट्रेंड
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नई दिल्ली। फैशन की दुनिया में हर दिन नए ट्रेंड सामने आते रहते हैं, लेकिन इन दिनों युवाओं के बीच 'थ्रिफ्टिंग ट्रेंड' (Thrifting Trend) तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खास बात यह है कि इस फैशन को अपनाने के लिए महंगे ब्रांडेड कपड़े खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। कम बजट में स्टाइलिश और आकर्षक दिखने के लिए युवा अब सेकंड हैंड और विंटेज कपड़ों की खरीदारी कर रहे हैं। कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर नौकरीपेशा युवाओं तक, थ्रिफ्टिंग का क्रेज बढ़ रहा है। सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर थ्रिफ्ट स्टोर और पुराने कपड़ों को नए अंदाज में पहनने वाले वीडियो भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
क्या होता है थ्रिफ्टिंग ट्रेंड?
थ्रिफ्टिंग का मतलब ऐसे कपड़े, जूते, बैग और अन्य फैशन एक्सेसरीज खरीदना है, जिन्हें पहले किसी दूसरे व्यक्ति ने इस्तेमाल किया हो या जो पुराने कलेक्शन का हिस्सा हों।इन उत्पादों को आमतौर पर नई वस्तुओं की तुलना में कम कीमत पर बेचा जाता है। हालांकि, हर थ्रिफ्ट उत्पाद इस्तेमाल किया हुआ हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ दुकानों पर पुराने स्टॉक और बिना इस्तेमाल किए गए कपड़े भी मिलते हैं।इस फैशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लोग कम खर्च में अलग और आकर्षक लुक तैयार कर सकते हैं।
भारत में तेजी से बढ़ रहा थ्रिफ्टिंग का क्रेज
भारत में थ्रिफ्टिंग को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। गूगल इंडिया की 1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में 'हाउ टू थ्रिफ्ट' की ऑनलाइन खोज में 850 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।वहीं, आसपास थ्रिफ्ट स्टोर खोजने से संबंधित सर्च में 600 प्रतिशत की वृद्धि हुई।बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में थ्रिफ्टिंग को लेकर खास रुचि दिखाई दे रही है।
कम पैसों में मिल सकते हैं ब्रांडेड कपड़े
थ्रिफ्टिंग की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण इसकी किफायती कीमतें हैं। कई थ्रिफ्ट स्टोर में अच्छी स्थिति वाले जैकेट, जींस, शर्ट, टी-शर्ट और अन्य कपड़े अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं।उदाहरण के लिए, किसी स्टोर में नया जैकेट खरीदने पर हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं, जबकि अच्छी स्थिति वाला सेकंड हैंड जैकेट कम कीमत में मिल सकता है।हालांकि, वास्तविक बचत कपड़े की गुणवत्ता, ब्रांड, स्थिति और विक्रेता पर निर्भर करती है।
इंस्टाग्राम ने बदल दिया फैशन का अंदाज
इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने थ्रिफ्टिंग को युवाओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।कई युवा ऑनलाइन थ्रिफ्ट स्टोर चला रहे हैं, जहां विंटेज जैकेट, ओवरसाइज टी-शर्ट, बैगी जींस और स्टाइलिश बैग बेचे जाते हैं।सोशल मीडिया पर पुराने कपड़ों से नया लुक तैयार करने वाले वीडियो भी लोकप्रिय हो रहे हैं।इससे युवाओं को कम बजट में नए फैशन प्रयोग करने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, कुछ लोगों के लिए थ्रिफ्टिंग अतिरिक्त कमाई का जरिया भी बन गई है।
पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है थ्रिफ्टिंग
थ्रिफ्टिंग को टिकाऊ फैशन यानी सस्टेनेबल फैशन से भी जोड़कर देखा जाता है।जब पुराने कपड़ों का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो उनकी उपयोगिता बढ़ती है। इससे नए कपड़ों की मांग और कपड़ा कचरा कम करने में मदद मिल सकती है।फैशन उद्योग में कपड़ों के निर्माण के दौरान पानी, ऊर्जा और अन्य संसाधनों का उपयोग होता है।ऐसे में इस्तेमाल योग्य कपड़ों को फेंकने के बजाय दोबारा पहनना पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।गूगल इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, सर्कुलर फैशन से संबंधित खोजों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
विंटेज साड़ियों और पुराने जैकेट का बढ़ा चलन
थ्रिफ्टिंग केवल पश्चिमी कपड़ों तक सीमित नहीं है। भारतीय युवाओं के बीच विंटेज साड़ियां, पुराने डिजाइन के जैकेट और पारंपरिक कपड़ों की भी मांग बढ़ रही है।कई युवा अपनी मां और दादी की पुरानी साड़ियों को नए ब्लाउज और एक्सेसरीज के साथ पहनकर आकर्षक लुक तैयार कर रहे हैं।इस तरह पुराने कपड़ों को आधुनिक फैशन के साथ जोड़कर एक अलग पहचान बनाई जा रही है।
थ्रिफ्टिंग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
थ्रिफ्टिंग के कई फायदे हैं, लेकिन खरीदारी करते समय सावधानी बरतना भी जरूरी है।कपड़ों की सिलाई, कपड़े की स्थिति, दाग-धब्बे और साइज की अच्छी तरह जांच करें। ऑनलाइन खरीदारी के दौरान भरोसेमंद विक्रेता चुनें और रिटर्न पॉलिसी जरूर देखें।सेकंड हैंड कपड़ों को पहनने से पहले अच्छी तरह धोना और पूरी तरह सुखाना चाहिए। जूते तथा अन्य इस्तेमाल की गई वस्तुओं की सफाई पर भी ध्यान दें।
युवाओं की नई फैशन पसंद बन रहा थ्रिफ्टिंग
थ्रिफ्टिंग अब केवल पैसे बचाने का तरीका नहीं रह गया है, बल्कि व्यक्तिगत स्टाइल को अलग पहचान देने का माध्यम भी बन रहा है।कम बजट, विंटेज फैशन, सोशल मीडिया का प्रभाव और पर्यावरण के प्रति जागरूकता इसकी लोकप्रियता के प्रमुख कारण हैं।यही वजह है कि नई पीढ़ी महंगे ब्रांड के बजाय ऐसे कपड़ों को भी प्राथमिकता दे रही है, जो किफायती होने के साथ उनकी व्यक्तिगत पसंद को दर्शाते हैं।
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