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New Delhi नई दिल्ली : हाल ही में मुस्लिम समुदाय का बड़ा त्योहार बकरीद मनाया गया। इस मौके पर देश-दुनिया में बड़े पैमाने पर बकरों की कुर्बानी दी गई और लोग इस अवसर पर मटन का आनंद बड़े उत्साह के साथ उठाते नजर आए।
विशेषज्ञों और अनुमान के अनुसार, दुनियाभर में रोजाना करीब 3 करोड़ 94 लाख किलोग्राम बकरे के मीट की खपत होती है। वहीं, भारत में रोजाना लगभग 17.5 लाख से 19 लाख किलोग्राम बकरे के मीट का सेवन होता है। त्योहार के दिन इन आंकड़ों में और अधिक वृद्धि देखने को मिली।
बकरीद के दौरान मांस की खपत में बढ़ोतरी के साथ-साथ मीट की मार्केट में भी हलचल देखने को मिलती है। बाजार में बकरी का मटन बड़ी मात्रा में बिकता है और कीमतों में थोड़ी वृद्धि भी देखी जा सकती है। लोग इस मौके पर परंपरा और स्वाद दोनों का आनंद लेते हैं।
हालांकि, कुछ नए रिसर्च और विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक मांस की खपत से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। लगातार बढ़ती मीट की खपत से न सिर्फ पेट की सेहत प्रभावित हो सकती है बल्कि यह पर्यावरणीय दबाव भी बढ़ाता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि मीट का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाना चाहिए और त्योहारों में भी स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए। इसके साथ ही मांस की गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कुल मिलाकर, बकरीद के अवसर पर बकरों की कुर्बानी और मटन की खपत में वृद्धि एक परंपरागत और सांस्कृतिक पहलू को दर्शाती है। वहीं, आधुनिक रिसर्च और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह दर्शकों को संतुलित और सुरक्षित खाने की ओर भी प्रेरित करती है।





