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कानों में घंटी बजना हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत

Rajeshwari Nishad
18 Oct 2026 5:25 PM IST
कानों में घंटी बजना हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत
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Lifestyle : शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए लोग अक्सर दिल, फेफड़ों और किडनी की सेहत पर ध्यान देते हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं। लेकिन शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग ऐसा भी है, जिसकी देखभाल को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह अंग है कान। कान हमें आसपास की आवाजें सुनने में मदद करते हैं और शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में कानों की सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना शरीर के दूसरे अंगों की देखभाल करना।
कान में दर्द, खुजली, भारीपन या सुनने में परेशानी होने पर कई लोग खुद ही इलाज करने लगते हैं। कुछ लोग कान में कॉटन बड, पिन या दूसरी वस्तुएं डालकर सफाई करते हैं, जबकि कुछ लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के ईयर ड्रॉप का इस्तेमाल करने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी आदतें कान को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कानों की सही देखभाल के लिए जरूरी है कि उनकी बनावट और काम को समझा जाए और कुछ सामान्य सावधानियां अपनाई जाएं।
सुनने के साथ शरीर का संतुलन भी बनाए रखते हैं कान
कान का काम केवल आवाजों को सुनना नहीं है। हमारे कान के अंदरूनी हिस्से में मौजूद वेस्टिबुलर सिस्टम शरीर की स्थिति और संतुलन का पता लगाने में मदद करता है। यह मस्तिष्क को जानकारी भेजता है, जिससे हमें खड़े होने, चलने और सिर घुमाने के दौरान शरीर का संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
इसी वजह से अंदरूनी कान में कुछ समस्याएं होने पर चक्कर आने, अस्थिरता महसूस होने या चलते समय संतुलन बिगड़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, चक्कर आने के कई अन्य कारण भी होते हैं। इसलिए ऐसी समस्या लगातार बनी रहे तो चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
कान की सेहत प्रभावित होने पर सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। कुछ मामलों में समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआत में व्यक्ति को इसका पता नहीं चल पाता। यदि टीवी की आवाज बार-बार तेज करनी पड़े, बातचीत समझने में परेशानी हो या लोगों से बात करते समय उन्हें बार-बार दोहराने के लिए कहना पड़े, तो सुनने की जांच कराने पर विचार करना चाहिए।
कान साफ करने के लिए कॉटन बड का इस्तेमाल न करें
कान की सफाई को लेकर सबसे आम गलतफहमी यह है कि अंदर जमा होने वाला वैक्स गंदगी है और उसे पूरी तरह
निकालना
जरूरी है। वास्तव में, कान में बनने वाला ईयरवैक्स कान की नली को धूल, छोटे कणों और कुछ बाहरी तत्वों से बचाने में मदद करता है। यह कान की त्वचा को नम रखने में भी भूमिका निभाता है।
आमतौर पर कान खुद ही अतिरिक्त वैक्स को धीरे-धीरे बाहर निकाल देते हैं। इसलिए कान के अंदर कॉटन बड, हेयरपिन, चाबी या कोई दूसरी वस्तु डालकर सफाई करने से बचना चाहिए। इससे वैक्स और अंदर धकेला जा सकता है, कान की नली में चोट लग सकती है और गंभीर स्थिति में पर्दे को भी नुकसान पहुंच सकता है।
कान के बाहरी हिस्से को साफ, मुलायम कपड़े से पोंछना पर्याप्त होता है। यदि वैक्स जमा होने के कारण सुनाई देने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उसे सुरक्षित तरीके से निकलवाना बेहतर है।
तेज आवाज से बचाएं अपनी सुनने की क्षमता
आजकल तेज आवाज में संगीत सुनना, लंबे समय तक ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करना और तेज ध्वनि वाले वातावरण में रहना सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। तेज आवाज से होने वाला नुकसान कई बार धीरे-धीरे बढ़ता है और हमेशा तुरंत महसूस नहीं होता।
कानों की सुरक्षा के लिए संगीत की आवाज मध्यम रखें और लगातार लंबे समय तक ईयरफोन इस्तेमाल करने से बचें। शोर वाली जगह पर लंबे समय तक रहना पड़े तो उपयुक्त ईयरप्लग या ईयरमफ का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि आसपास की आवाज इतनी तेज हो कि किसी से बात करने के लिए आवाज ऊंची करनी पड़े, तो संभव हो तो उस जगह से दूरी बनाना या ध्वनि से बचाव के उपाय करना बेहतर है।
ध्यान रखें कि सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाने वाली तेज आवाज से बचाव करना, बाद में उपचार कराने से अधिक प्रभावी हो सकता है।
कान में दर्द या खुजली को नजरअंदाज न करें
कान में दर्द, खुजली, पानी या पस जैसा स्राव, अचानक सुनाई कम देना और कान बंद होने का एहसास कई कारणों से हो सकता है। कभी-कभी नहाने या तैरने के बाद कान में नमी रहने से बाहरी कान में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, कान में वैक्स जमा होना या मध्य कान से जुड़ी समस्या भी परेशानी पैदा कर सकती है।
ऐसे लक्षणों में बिना सलाह के कोई तेल, घरेलू मिश्रण या ईयर ड्रॉप कान में नहीं डालना चाहिए। खासकर कान के पर्दे में छेद होने या उसकी आशंका होने पर कुछ ड्रॉप नुकसान पहुंचा सकते हैं। कान को साफ करने के लिए पानी या किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल करना भी उचित नहीं है।
यदि कान में तेज दर्द हो, बुखार आए, स्राव निकले या सुनने की क्षमता अचानक कम हो जाए, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें। अचानक सुनाई देना कम होना एक ऐसी स्थिति है, जिसमें तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
कानों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें
कानों की देखभाल के लिए बहुत जटिल दिनचर्या की जरूरत नहीं होती। कुछ सामान्य आदतें लंबे समय तक कानों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।कान के बाहरी हिस्से को साफ और सूखा रखें।कान के अंदर कॉटन बड या दूसरी वस्तुएं न डालें।ईयरफोन और हेडफोन की आवाज सीमित रखें।तेज शोर वाले वातावरण में कानों की सुरक्षा करें।बिना चिकित्सकीय सलाह के ईयर ड्रॉप या घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल न करें।सुनने में परेशानी, लगातार चक्कर या कान में दर्द होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।बच्चों के कानों में भी कोई वस्तु डालकर सफाई न करें और समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
कब करानी चाहिए कानों की जांच?
यदि बार-बार कान में वैक्स जमा होता है, सुनने में परेशानी होती है या कान से संबंधित लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना उपयोगी है। उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता में बदलाव हो सकता है, लेकिन कम उम्र के लोगों में भी तेज आवाज के संपर्क के कारण ऐसी समस्या हो सकती है।
कानों की नियमित देखभाल का अर्थ बार-बार उनकी अंदरूनी सफाई करना नहीं, बल्कि उन्हें चोट, संक्रमण और अत्यधिक शोर से बचाना है। शरीर के दूसरे अंगों की तरह कानों की सेहत भी जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी है। इसलिए छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने और संतुलन से जुड़ी समस्याओं को समय पर पहचानने में मदद मिल सकती है।
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