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लाइफ स्टाइल: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं इस दौरान कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मॉनसून में हवा में नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे सर्दी, खांसी, जुकाम, गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत रखना बेहद जरूरी हो जाता है। आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियों और मसालों का जिक्र मिलता है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है काढ़ा, जिसे सदियों से घरेलू उपचार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। काढ़ा दरअसल पानी में उबाली गई जड़ी-बूटियों और मसालों का मिश्रण होता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को गर्माहट देने के साथ-साथ सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी परेशानियों से राहत दिलाने में सहायक माने जाते हैं।
मॉनसून के दौरान तुलसी और अदरक का काढ़ा काफी फायदेमंद माना जाता है। इसे बनाने के लिए दो कप पानी में 10 से 12 तुलसी के पत्ते, अदरक का छोटा टुकड़ा और 3 से 4 कुटी हुई काली मिर्च डालकर धीमी आंच पर उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो इसे छानकर हल्का गुनगुना होने पर पिया जा सकता है। स्वाद के लिए इसमें थोड़ा गुड़ या शहद मिलाया जा सकता है। तुलसी और अदरक में पाए जाने वाले प्राकृतिक गुण गले की खराश, खांसी और सर्दी जैसी समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकते हैं। बारिश के मौसम में छींक, नाक बहने या शरीर में जकड़न जैसी परेशानियों के लिए दालचीनी और लौंग का काढ़ा भी उपयोगी माना जाता है। इसे तैयार करने के लिए दो कप पानी में दालचीनी का छोटा टुकड़ा, 2 से 3 लौंग और आधा चम्मच अजवाइन डालकर करीब 10 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसमें एक चुटकी हल्दी मिलाकर छान लें और हल्का गर्म पिएं। दालचीनी, लौंग और हल्दी का यह मिश्रण शरीर को गर्माहट देने के साथ मौसमी संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकता है।
इसके अलावा गिलोय और हल्दी का काढ़ा भी आयुर्वेद में काफी लोकप्रिय है। गिलोय को आयुर्वेद में बेहद गुणकारी औषधि माना जाता है। इसे बनाने के लिए गिलोय की डंडी का छोटा टुकड़ा लेकर पानी में उबालें और इसमें आधा चम्मच हल्दी व कुछ पुदीने के पत्ते मिला सकते हैं। जब पानी आधा रह जाए तो इसे छानकर पिएं। स्वाद को बेहतर बनाने के लिए इसमें थोड़ी मिश्री या सेंधा नमक मिलाया जा सकता है। हालांकि, काढ़ा प्राकृतिक चीजों से तैयार होता है, लेकिन इसका सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। दिन में एक या दो बार आधा कप काढ़ा पर्याप्त माना जाता है। ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन या शरीर में गर्मी बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा गर्म काढ़े में सीधे शहद नहीं डालना चाहिए। काढ़ा थोड़ा ठंडा होने के बाद ही शहद मिलाना बेहतर माना जाता है। मॉनसून में स्वस्थ रहने के लिए काढ़े के साथ-साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, साफ-सफाई और नियमित व्यायाम पर भी ध्यान देना जरूरी है। घरेलू उपाय कई लोगों को मौसमी परेशानियों में राहत दे सकते हैं, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।





